घुमक्कड़ समाज द्वारा जयपुर में होगा सरकार का महा-बहिष्कार आंदोलन
० आशा पटेल ०
जयपुर । डीएनटी संघर्ष समिति द्वारा जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में एक जुलाई के आंदोलन से पूर्व एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई । जिसमें लालजी राईका अध्यक्ष राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनटी संघर्ष समिति और रतन नाथ कालबेलिया, प्रदेशाध्यक्ष विमुक्त, घुमंतू अर्ध घुमंतू जाति परिषद ने संबोधित किया .
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यक्ष लालजी राईका और रतन नाथ ने बताया कि हमने सरकार के सामने विमुक्त, घुमंतू ,और अर्ध घुमंतू ( डीएनटी) के विकास के लिए और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए दस माँगे रखी गई है । ये सभी माँगे इन समाजों के विकास के लिए गठित रेनके आयोग और इदाते आयोग की सिफारिशों के अनुरूप हैं ।
3 फरवरी को जोधपुर में आंदोलन किया लेकिन फिर भी सरकार नहीं जागी । अंत में निर्णय लिया गया की जयपुर में “ महा-बहिष्कार “ आंदोलन किया जाएगा । एक जुलाई को वीटी ग्राउंड, मानसरोवर में एक विशाल आंदोलन होने जा रहा है जिसमें राजस्थान के हर भाग से लोग आ रहे हैं । यदि इस आंदोलन के बाद भी सरकार नहीं सुनती है तो ये आंदोलन गाँव- गाँव तक ले जाया जाएगा । रतन नाथ कालबेलिया अध्यक्ष घुमंतू जाति ने बताया कि जो सरकारी सिस्टम है वो डीएनटी समाज के अनुकूल नहीं है ।
जैसे विभिन्न समाजों के नामों में विसंगतियां हैं जिससे उन समाजों का एक बड़ा भाग डीएनटी में शामिल नहीं किया गया । जैसे रेबारी नाम है लेकिन राईका और देवासी नहीं है जबकि तीनों नाम एक दूसरे के पर्याय हैं । जोगी कालबेलिया को एक कर दिया गया है जबकि दोनों समाज अलग अलग हैं , मीरासी समाज को शामिल नहीं किया गया आदि। इससे इनके प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहें हैं और इन समाजों का एक बड़ा भाग वंचित रह गया है . इसलिए हमारा नारा था की “ या तो सभी नाम शामिल हों ,नहीं तो एक भी नहीं अर्थात् एक नाम स्वीकार नहीं अतः सरकार का बहिष्कार।
उन्होंने कहा कि आरक्षण में इन्हें अन्य समाजों के साथ मिला दिया गया जिनसे ये समाज सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के कारण प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते इसलिए इनका अलग से ग्रुप “ डीएनटी समाज “ बनाया जाए जिसे अलग से आरक्षण मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्णय दिया है की आरक्षण के भीतर आरक्षण होना चाहिए अर्थात् आरक्षण का उप वर्गीकरण होना चाहिए । यही बात डीएनटी आयोग ने भी कहा है । इसलिए हम वर्तमान आरक्षण व्यवस्था का बहिष्कार करेंगे। हमारी 70 प्रतिशत लोग गोचर और वन भूमि में रहते हैं लेकिन सरकार केवल आबादी में ही पट्टे दे रही है इसलिए इस सिस्टम का भी बहिष्कार करेंगे। शिक्षा के लिए अगल से स्पेशल व्यवस्था नहीं है और ना ही अलग से शिक्षा के लिए सहायता इसलिए वर्तमान शिक्षा सिस्टम का भी बहिष्कार ।
बहिष्कार एक सांकेतिक शब्द है जिसका अर्थ यही है कि सरकार हमारे समाजों की प्रकृति समझे और उसी के अनुसार योजना बनाये और उनका विकास करे नहीं तो वर्तमान सिस्टम का बहिष्कार होगा ।
आजादी के बाद पहली बार “ बायकॉट “ शब्द प्रयोग हो रहा है जो सरकार को इन समाजों को गंभीरता से लेने और इनके प्रति संवेदनशील होने के लिए एक आव्हान है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में DNT की विभिन्न जातियों के प्रतिनिधि मौजूद थे जिनमें गीता बागरिया, नारायण सिंह पड़िहार, एडवोकेट पूनम नाथ सपेरा, विकास नरवाल, राजाराम नायक, विशन लाल बावरी,राजू सिंघवी, बलवंत कंजर, दिनेश नाथ सपेरा, ज्ञान सिंह सांसी, नकुल कुमार गायरी, देवी लाल गाडरी, मांगी राम योगी, लुनियासिंह गाड़िया लोहार, रूपाराम नायक, डॉ. उदयलाल बंजारा, कपूर खेताजी राईका, झालाराम देवासी, किशना राम देवासी, भीकू सिंह राईका, कैप्टन ओमप्रकाश देवासी, सवाराम देवासी, डॉ. सुखराम राईका इत्यादि शामिल थे।
जयपुर । डीएनटी संघर्ष समिति द्वारा जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में एक जुलाई के आंदोलन से पूर्व एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई । जिसमें लालजी राईका अध्यक्ष राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनटी संघर्ष समिति और रतन नाथ कालबेलिया, प्रदेशाध्यक्ष विमुक्त, घुमंतू अर्ध घुमंतू जाति परिषद ने संबोधित किया .
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यक्ष लालजी राईका और रतन नाथ ने बताया कि हमने सरकार के सामने विमुक्त, घुमंतू ,और अर्ध घुमंतू ( डीएनटी) के विकास के लिए और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए दस माँगे रखी गई है । ये सभी माँगे इन समाजों के विकास के लिए गठित रेनके आयोग और इदाते आयोग की सिफारिशों के अनुरूप हैं ।
डीएनटी की सरकारी लिस्ट में क़रीब 32 समाज हैं लेकिन कुल 50 से अधिक डीएनटी समाज हैं जिनकी राजस्थान में कुल जनसंख्या 1.23 करोड़ यानि राजस्थान की जनसंख्या का 15% है । आजादी से लेकर अभी तक इन समाजों को प्रशासन, राजनीति , व्यवसाय आदि में कोई भागीदारी नहीं दी गई । इन समाजों के पास घर नहीं है , घर हैं तो पट्टे नहीं है । घुमंतू समाजों के लिए अलग से शिक्षा की व्यवस्था नहीं है और ना ही अलग से आरक्षण की व्यवस्था। विकसित भारत के नारे इनके लिए बेमानी हैं और सरकारों की बेरुखी के कारण ये समाज हासियें पर हैं ।
ये समाज संगठित होकर जयपुर में 1 जुलाई को महा-बहिष्कार आंदोलन कर रहे हैं । आज़ादी के बाद पहली बार “ बॉयकॉट” शब्द का प्रयोग किया जा रहा है क्योंकि डीएनटी समाजों की आवश्यकतानुसार नीतियों नहीं बनायी गई इसलिए ये समाज विकास में सबसे निचले पायदान पर हैं । चार महीने पहले डीएनटी समाज के प्रतिनिधि इकट्ठा हुए और सरकार के मंत्री मदन दिलावर से मिले और उन्हें समस्याओं से अवगत करवाया । लेकिन सरकार का कोई जवाब नहीं आया । अध्यक्ष राइका ने बताया की हमने 7 जनवरी को पाली में पहला बहिष्कार आंदोलन किया जिसमें दस हज़ार लोगों ने भाग लिया और सरकार को एक माह का समय दिया गया लेकिन सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा ।
3 फरवरी को जोधपुर में आंदोलन किया लेकिन फिर भी सरकार नहीं जागी । अंत में निर्णय लिया गया की जयपुर में “ महा-बहिष्कार “ आंदोलन किया जाएगा । एक जुलाई को वीटी ग्राउंड, मानसरोवर में एक विशाल आंदोलन होने जा रहा है जिसमें राजस्थान के हर भाग से लोग आ रहे हैं । यदि इस आंदोलन के बाद भी सरकार नहीं सुनती है तो ये आंदोलन गाँव- गाँव तक ले जाया जाएगा । रतन नाथ कालबेलिया अध्यक्ष घुमंतू जाति ने बताया कि जो सरकारी सिस्टम है वो डीएनटी समाज के अनुकूल नहीं है ।
जैसे विभिन्न समाजों के नामों में विसंगतियां हैं जिससे उन समाजों का एक बड़ा भाग डीएनटी में शामिल नहीं किया गया । जैसे रेबारी नाम है लेकिन राईका और देवासी नहीं है जबकि तीनों नाम एक दूसरे के पर्याय हैं । जोगी कालबेलिया को एक कर दिया गया है जबकि दोनों समाज अलग अलग हैं , मीरासी समाज को शामिल नहीं किया गया आदि। इससे इनके प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहें हैं और इन समाजों का एक बड़ा भाग वंचित रह गया है . इसलिए हमारा नारा था की “ या तो सभी नाम शामिल हों ,नहीं तो एक भी नहीं अर्थात् एक नाम स्वीकार नहीं अतः सरकार का बहिष्कार।
उन्होंने कहा कि आरक्षण में इन्हें अन्य समाजों के साथ मिला दिया गया जिनसे ये समाज सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के कारण प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते इसलिए इनका अलग से ग्रुप “ डीएनटी समाज “ बनाया जाए जिसे अलग से आरक्षण मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्णय दिया है की आरक्षण के भीतर आरक्षण होना चाहिए अर्थात् आरक्षण का उप वर्गीकरण होना चाहिए । यही बात डीएनटी आयोग ने भी कहा है । इसलिए हम वर्तमान आरक्षण व्यवस्था का बहिष्कार करेंगे। हमारी 70 प्रतिशत लोग गोचर और वन भूमि में रहते हैं लेकिन सरकार केवल आबादी में ही पट्टे दे रही है इसलिए इस सिस्टम का भी बहिष्कार करेंगे। शिक्षा के लिए अगल से स्पेशल व्यवस्था नहीं है और ना ही अलग से शिक्षा के लिए सहायता इसलिए वर्तमान शिक्षा सिस्टम का भी बहिष्कार ।
बहिष्कार एक सांकेतिक शब्द है जिसका अर्थ यही है कि सरकार हमारे समाजों की प्रकृति समझे और उसी के अनुसार योजना बनाये और उनका विकास करे नहीं तो वर्तमान सिस्टम का बहिष्कार होगा ।
आजादी के बाद पहली बार “ बायकॉट “ शब्द प्रयोग हो रहा है जो सरकार को इन समाजों को गंभीरता से लेने और इनके प्रति संवेदनशील होने के लिए एक आव्हान है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में DNT की विभिन्न जातियों के प्रतिनिधि मौजूद थे जिनमें गीता बागरिया, नारायण सिंह पड़िहार, एडवोकेट पूनम नाथ सपेरा, विकास नरवाल, राजाराम नायक, विशन लाल बावरी,राजू सिंघवी, बलवंत कंजर, दिनेश नाथ सपेरा, ज्ञान सिंह सांसी, नकुल कुमार गायरी, देवी लाल गाडरी, मांगी राम योगी, लुनियासिंह गाड़िया लोहार, रूपाराम नायक, डॉ. उदयलाल बंजारा, कपूर खेताजी राईका, झालाराम देवासी, किशना राम देवासी, भीकू सिंह राईका, कैप्टन ओमप्रकाश देवासी, सवाराम देवासी, डॉ. सुखराम राईका इत्यादि शामिल थे।
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