गढ़वाल हितैषिणी सभा द्वारा वरिष्ठ व पूर्व अध्यक्ष उम्मेद सिंह रावत का सम्मान
० योगेश भट्ट ०
नयी दिल्ली - गढ़वाल हितैषिणी सभा के वरिष्ठ सदस्यों की सुध लेने की योजना गढ़वाल हितैषिणी सभा पहुंची अपने सदस्यों के द्वार के तहत सभा के उपाध्यक्ष अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह नेगी, महासचिव पवन कुमार मैठानी, सांस्कृतिक सचिव अधिवक्ता वीरेन्द्र सिंह नेगी, कार्यकारिणी सदस्य जगत सिंह असवाल, गोविन्द राम भट्ट व रेनू उनियाल ने सभा अध्यक्ष सूरत सिंह रावत के मार्गदर्शन में सभा के सबसे वरिष्ठ व वयोवृद्ध पूर्व अध्यक्ष उम्मेद सिंह रावत के शतायु ( 12 जून 1925 ) होने पर उनके सेक्टर-74 Cape Town, Supertech स्थित आवास पर जाकर सम्मानित किया।
नयी दिल्ली - गढ़वाल हितैषिणी सभा के वरिष्ठ सदस्यों की सुध लेने की योजना गढ़वाल हितैषिणी सभा पहुंची अपने सदस्यों के द्वार के तहत सभा के उपाध्यक्ष अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह नेगी, महासचिव पवन कुमार मैठानी, सांस्कृतिक सचिव अधिवक्ता वीरेन्द्र सिंह नेगी, कार्यकारिणी सदस्य जगत सिंह असवाल, गोविन्द राम भट्ट व रेनू उनियाल ने सभा अध्यक्ष सूरत सिंह रावत के मार्गदर्शन में सभा के सबसे वरिष्ठ व वयोवृद्ध पूर्व अध्यक्ष उम्मेद सिंह रावत के शतायु ( 12 जून 1925 ) होने पर उनके सेक्टर-74 Cape Town, Supertech स्थित आवास पर जाकर सम्मानित किया।
सम्मान के तहत उम्मेद सिंह रावत को सभा के श्रीदेव सुमन वरिष्ठ सदस्य सम्मान -2025 से सम्मानित करते हुए उन्हें पुष्पहार के साथ गढ़ गौरव की प्रतीक उत्तराखंडी टोपी पहनाकर तथा सम्मान स्वरूप शॉल ओढ़ाकर व प्रशस्ति पत्र देकर उनके स्वस्थ रहते हुए दीघार्यु की मंगल कामना की। आपसी बातचीत में सौ वर्षीय उम्मेद सिंह रावत ने अपने दौर के साथ रहे साथियों के कुछ नाम बताये साथ ही उनके हाल-चाल भी पूछा। उन्होंने बताया की प्रसिद्ध नाटककार ललित मोहन थपलियाल मेरे साथी रहे। जिनका प्रसिद्ध नाटक खाडू लापता है। मेहताब सिंह रावत व घनश्याम नौटियाल भी उन्होंने जिक्र किया।
उम्मेद सिंह रावत अपने समय में भारत सरकार के Export & Import विभाग में उच्च अधिकारी अर्थात Joint Chief Controller के पद पर रहे। रावत के बेटे राकेश मोहन ने बताया कि मेरे पिताजी सरोजिनी नगर, पंडारा रोड़ व भारती नगर में रहे। रावत की इंजीनियर बेटी सुनीता ने बताया कि अपनी नौकरी के दौरान हमारे पिताजी आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, लंदन आदि देशों की यात्रा की। रावत जी के तीन बेटियां व दो बेटे हैं। उनकी दो बेटी डॉक्टर है व एक बेटी इंजीनियर तथा दो बेटे इंजीनियर हैं। बड़ा बेटा राकेश मोहन स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया से चीफ इंजीनियर के पद से वीआरएस ले लिया है।
रावत जी के इंजीनियर बेटे राकेश मोहन ने बताया कि मेरे पिताजी ने आज से पच्चीस साल पहले पौड़ी स्थित तिमली में अपनी 15 नाली जमीन स्कूल व होस्टल बनाने के लिए दान कर दी थी। दान की हुई जमीन पर आज रावत जी की माता जी के नाम से राजमती देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज तिमली पौड़ी चल रहा है। जिसने इसी वर्ष अपने पच्चीस वर्ष पूर्ण किए। रावत जी के अधिकतर पोते, बेटा-बेटी वाशिंगटन डीसी-अमेरिका में रहते हैं। ये सभी उम्मेद सिंह रावत का सौंवा जन्मदिन मनाने भारत आये हुए हैं। रावत जी के सौ वर्ष पूर्ण करने में उनके परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जो कि निश्चल भाव से उनकी सेवा कर रहे हैं।
रावत जी तक पहुंचाने के लिए सभा के वरिष्ठ सदस्य नब्बे वर्षीय मेहताब सिंह रावत का भी धन्यवाद करते हैं। आज सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य सौ वर्षीय श्रद्धेय उम्मेद सिंह रावत का सम्मान कर सभा स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही है। एक तरह से ये हमारी वो महान विभूति हैं जिनके त्याग तपस्या से हमें विरासत में गढ़वाल हितैषिणी सभा व गढ़वाल भवन मिला तथा शताब्दी वर्ष मनाने का मौका मिला।
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