डिजिटल तकनीक से लव लोकल ला रहा है ऑनलाइन खरीदारी का नया दौर

o योगेश भट्ट o 
नयी दिल्ली : भारत का ऑनलाइन किराना बाजार तेजी से बदल रहा है, और मुंबई की कंपनी लव लोकल एक नए "क्वॉलिटी कॉमर्स" मॉडल के साथ नया मानदंड स्थापित कर रही है। यह मॉडल सिर्फ तेज डिलीवरी नहीं, बल्कि गुणवत्ता, भरोसे और स्थानीय दुकानदारों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। लव लोकल का हाइपर लोकल ऐप ग्राहकों को ऐसा अनुभव देने के लिए तैयार किया गया है, जिसमें सुविधा के साथ विश्वास को प्राथमिकता दी गई है।

लव लोकल अगले 12 महीनों में 15 गुना वृद्धि और 2026 तक कई नए शहरों में विस्तार की योजना पर काम कर रहा है। यह एक ऐसा टेक-सक्षम और बड़े स्तर पर लागू किया जा सकने वाला मॉडल तैयार कर रहा है, जिसका दीर्घकालिक प्रभाव होगा। कंपनी का उद्देश्य है कि लोगों को उनके भरोसेमंद मोहल्ले की दुकानों के ज़रिए ताजा किराना वस्तुएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएं। 

अभी भारत में केवल 7% घर ही फल और सब्जियां ऑनलाइन खरीदते हैं। फाइनेंशियल टाइम्स के एक हालिया सर्वेक्षण में शामिल 24,000 भारतीय उपभोक्ताओं में से लगभग 80% ने क्विक कॉमर्स और अन्य इन्वेंट्री-आधारित प्लेटफॉर्म्स से ताजा उत्पाद खरीदने में असंतोष जताया और एक बार फिर अपनी पारंपरिक दुकानों की ओर लौटने लगे हैं।

बदलते उपभोक्ता रुझानों के बीच, लव लोकल ‘क्वॉलिटी कॉमर्स’ को बढ़ावा दे रहा है, जो फलों, सब्जियों, मांस, मछली और चुनिंदा किराना उत्पादों की ताजगी और गुणवत्ता की वास्तविक चिंताओं को संबोधित करता है। स्थानीय दुकानों के साथ साझेदारी के ज़रिए यह सभी ऑर्डर्स पर मुफ्त डिलीवरी और फ्री रिप्लेसमेंट की सुविधा देता है। लव लोकल की वीडियो-आधारित शॉपिंग सुविधा ग्राहकों को वर्चुअली अपनी पड़ोस की दुकान में जाने और वहां मौजूद वस्तुएं देखने का अनुभव देती है।

 ब्रांड दो घंटे के भीतर डिलीवरी सुनिश्चित करता है, जिससे ताजगी बरकरार रहती है। इसके अलावा, यह स्लॉटेड डिलीवरी और एक्सप्रेस डिलीवरी विकल्प भी शुरू कर रहा है। लव लोकल मौजूदा रिटेल नेटवर्क को फुलफिलमेंट हब के रूप में इस्तेमाल करता है, जिससे यह मॉडल न सिर्फ किफायती बनता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी प्रभाव डालता है। यह छोटे दुकानदारों को डिजिटल स्टोरफ्रंट, लॉजिस्टिक सपोर्ट, पेमेंट सॉल्यूशंस, मार्केटिंग टूल्स और बिजनेस एनालिटिक्स जैसी सुविधाएं देकर एक संपूर्ण डिजिटल ऑपरेटिंग सिस्टम उपलब्ध कराता है।

भारत का ई-ग्रॉसरी बाजार 2033 तक 96 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद, ताजा उत्पादों की बढ़ेगी मांग। ताजगी, गुणवत्ता, तेज़ डिलीवरी और भरोसा ये ऐसे प्रमुख कारक हैं, जिनके चलते लोग ऑनलाइन ग्रॉसरी, खासकर फल, सब्जियां और दैनिक ज़रूरतों की चीज़ें, खरीदना पसंद करते हैं। 

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