पद्मश्री मालिनी अवस्थी की प्रस्तुति "सावन ए सेलिब्रेशन ऑफ़ रेन " दिल्ली में होगी
० योगेश भट्ट ०
नई दिल्ली, भारतीय लोक परंपराओं की आत्मा को छू लेने वाली सुरधारा 31 जुलाई को कमानी ऑडिटोरियम में पद्मश्री मालिनी अवस्थी अपनी अनोखी प्रस्तुति "सावन – अ सेलिब्रेशन ऑफ़ रेन " के साथ मंच पर होंगी। यह संगीतमय संध्या केवल सुरों का उत्सव नहीं होगी, बल्कि भारतीय वर्षा ऋतु की सांस्कृतिक विरासत, लोक स्मृतियों और भावनात्मक संवेदनाओं का एक जीवंत उत्सव बनेगी जहाँ संगीत, मौसम और परंपरा का त्रिवेणी संगम दर्शकों को एक अनोखे अनुभव से भर देगा।
सोंचिरैया द्वारा संकल्पित एवं प्रस्तुत, तथा एक्सक्यूरेटर इवेंट्स द्वारा निर्मित और प्रचारित यह आयोजन भारतीय मानसून की दृश्य, श्रव्य और भावनात्मक अनुभूतियों में पूरी तरह से डूब जाने का आमंत्रण देता है।‘सावन’ उन कालजयी रागों और लोक ध्वनियों को पुनर्जीवित करता है, जो पीढ़ियों और सीमाओं को पार करते हुए आज भी हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों में गूंजते हैं। यह संध्या केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय ऋतु संस्कृति की आत्मा से जुड़ने का एक अवसर है।
सावन की सांस्कृतिक और भावनात्मक आत्मा को समर्पित इस संगीतमय संध्या को श्रद्धांजलि स्वरूप रचा गया है। इस सुरमयी यात्रा में कजरी, झूला, मल्हार, विंटेज ठुमरी और दुर्लभ ग़ज़लों के माध्यम से सावन की मोहकता को जीवंत किया जाएगा वे संगीत विधाएँ जो पीढ़ियों से बरसात, प्रेम, भक्ति और विरह की अनुभूतियों को स्वर देती रही हैं। सावन कार्यक्रम पर अपने विचार रखते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा , “वर्षा का आगमन, धरती ही नहीं, हम सबके तन मन में आशा उमंग और प्रसन्नता लेकर आता है,
नई दिल्ली, भारतीय लोक परंपराओं की आत्मा को छू लेने वाली सुरधारा 31 जुलाई को कमानी ऑडिटोरियम में पद्मश्री मालिनी अवस्थी अपनी अनोखी प्रस्तुति "सावन – अ सेलिब्रेशन ऑफ़ रेन " के साथ मंच पर होंगी। यह संगीतमय संध्या केवल सुरों का उत्सव नहीं होगी, बल्कि भारतीय वर्षा ऋतु की सांस्कृतिक विरासत, लोक स्मृतियों और भावनात्मक संवेदनाओं का एक जीवंत उत्सव बनेगी जहाँ संगीत, मौसम और परंपरा का त्रिवेणी संगम दर्शकों को एक अनोखे अनुभव से भर देगा।
सोंचिरैया द्वारा संकल्पित एवं प्रस्तुत, तथा एक्सक्यूरेटर इवेंट्स द्वारा निर्मित और प्रचारित यह आयोजन भारतीय मानसून की दृश्य, श्रव्य और भावनात्मक अनुभूतियों में पूरी तरह से डूब जाने का आमंत्रण देता है।‘सावन’ उन कालजयी रागों और लोक ध्वनियों को पुनर्जीवित करता है, जो पीढ़ियों और सीमाओं को पार करते हुए आज भी हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों में गूंजते हैं। यह संध्या केवल एक प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारतीय ऋतु संस्कृति की आत्मा से जुड़ने का एक अवसर है।
सावन की सांस्कृतिक और भावनात्मक आत्मा को समर्पित इस संगीतमय संध्या को श्रद्धांजलि स्वरूप रचा गया है। इस सुरमयी यात्रा में कजरी, झूला, मल्हार, विंटेज ठुमरी और दुर्लभ ग़ज़लों के माध्यम से सावन की मोहकता को जीवंत किया जाएगा वे संगीत विधाएँ जो पीढ़ियों से बरसात, प्रेम, भक्ति और विरह की अनुभूतियों को स्वर देती रही हैं। सावन कार्यक्रम पर अपने विचार रखते हुए मालिनी अवस्थी ने कहा , “वर्षा का आगमन, धरती ही नहीं, हम सबके तन मन में आशा उमंग और प्रसन्नता लेकर आता है,
सावन के महीने में बरसने वाले आनंद की संगीतमय अभिव्यक्ति! संगीत ने सदा प्रकृति से प्रेरणा ली है, इसीलिए वर्षा को उत्सव के रूप में मानने जाने की परंपरा है। मौसम में आकाश में घिरे बादलों की रिमझिम बूंदाबांदी के बीच नहाए हुए वृक्ष, नाचते मयूर कुहुकते पंछी, हरियाए खेत खलिहान ताल नदियां, सब कुछ मोहित कर देने वाला होता है। ऐसे में गाय जाने वाले राग रागिनी मल्हार हो या ठुमरी कजरी झूला सावनी ऐसे कर्णप्रिय रस छंद सावन के श्रृंगार हैं।
ये गीत हमारी सामूहिक स्मृति को प्रतिध्वनित करते हैं जो पीढ़ियों को जोड़ती है। तेजी से शहरीकरण और पारंपरिक जीवन से बढ़ती दूरी के युग में, हमारी धरोहर को संजोने की अपूर्व आवश्यकता है और "सावन" ऐसी ही विशिष्ट प्रस्तुति है जो मैने बहुत मन से आप सबके लिए तैयार की है। अवध और बनारस की समृद्ध सांगीतिक परंपरा में रची-बसी पद्मश्री मालिनी अवस्थी भारत की क्षेत्रीय लोक संगीत विरासत की एक सशक्त संवाहिका हैं। उनकी प्रस्तुतियाँ केवल गीत नहीं होतीं, बल्कि लोककथा, भावना और भूगोल का संगम होती हैं जहाँ स्वर, शब्द और स्मृति मिलकर एक ऐसा सांस्कृतिक संसार रचते हैं जो दर्शकों के हृदय में गहराई तक उतर जाता है।
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