तलाश ए सहर

० मुहम्मद नासिर ० 
मैं किसी खामोश वादी में
तलाश ए सहर की खातिर
भटकता फिर रहा हूँ

गिर रहा हूँ
चल रहा हूँ
चल रहा हूँ
गिर रहा हूँ।

खामोशी रास्ते की मुझ को
खौफ से ताकती है शायद
मैं किसी अंधे नगर का
एक वासी हूँ
जो अपनी तरिकी

रास्ते में इसको छोड़ कर
ज़ुल्मात में खो जाऊंगा
फिर ना वापस आऊंगा।
और मैं इस रोशनी से डर रहा हूँ
ये मुझे बहका ना दे
मेरे रास्ते से मुझे भटका ना दे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

स्पेशल ओलंपिक्स यूनिफाइड बास्केटबॉल 3x3 वर्ल्ड कप भारत ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

महामना मालवीय मिशन,जयपुर द्वारा मालवीय जयंती मनाई

कृष्ण चंद्र सहाय स्मृति समारोह : सवाई सिंह को सहाय स्मृति सम्मान

वरिष्ठ पत्रकार कानाराम कड़वा और कमलेश गोयल को पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि

डॉ. नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम’ कृत ‘खूब लड़ी मर्दानी’ अंग्रेजी रूपान्तरण का लोकार्पण

पुणे ग्रैंड टूर 2026 भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग रोड रेस की शुरुआत

एमएनआईटी जयपुर एल्युमिनी एसोसिएशन ने किया गोल्डन जुबली व सिल्वर जुबली बैच के पूर्व छात्रों का सम्मान