महा-बहिष्कार रैली में घुमंतूओं ने मंत्रियों-अफसरों को कहा भ्रष्ट और सरकार को अहंकारी

० आशा पटेल ० 
जयपुर , जयपुर के मानसरोवर स्थित वीटी ग्राउंड पर हुई डीएनटी समाज के नेता और पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राईका और विमुक्त, घुमंतू अर्धघुमंतू जाति परिषद के प्रदेशाध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया पाली और जोधपुर में भी अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। लेकिन दोनों ही जगहों की रैली में सरकार ने डीएनटी नेताओं की किसी भी मांग को शायद सही नहीं माना जिसके चलते उनकी जयपुर सहित तीनों रैलियों का परिणाम निष्फल रहा। हालांकि इस रैली में प्रदेशभर से आए 32 समाजों के करीब 25 हजार लोग ने भाग लिया लेकिन सरकार ने समाज की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की लेकिन सरकार ने फिर भी समाज की बात का मान रखते हुए एडिशनल एसपी रैंक के अधिकारी को उनका ज्ञापन लेने के लिए मौके पर भेजा।
 राजधानी में बॉयकॉट रैली करते हुए लालजी राईका और रतन नाथ कालबेलिया ने भजनलाल सरकार को अहंकारी बताया और कहा कि सरकार अगर उनकी मांगें नहीं मानेगी तो समाज के घर-घर गांव गांव में मुख्यमंत्री का रावण दहन करेंगे। साथ ही रतन नाथ ने सरकार को चेतावनी भी दे डाली कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो समाज के लोग नेताओं के साथ 2 अक्टूबर से हाईवे पर आकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। वहीं रतन नाथ ने सरकार के तमाम IAS अफसरों और मंत्रियों को भ्रष्टचार में लिप्त बताते हुए कहा कि सभी अफसरों, कलेक्टरों और मंत्रियों के एनजीओ बने हुए हैं सरकार से जो भी पैसा हमारे विकास के लिए आता है उन एनजीओ में मर्ज हो जाता है।
 सारा पैसा ये मंत्री और अधिकारी डकार जाते हैं। डीएनए समाज के नेता और पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राईका और विमुक्त, घुमंतू अर्धघुमंतू जाति परिषद के प्रदेशाध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया पाली और जोधपुर में भी अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। लेकिन दोनों ही जगहों की रैली में सरकार ने डीएनटी नेताओं की किसी भी मांग को शायद सही नहीं माना जिसके चलते उनकी जयपुर सहित तीनों रैलियों का परिणाम निष्फल रहा।
डीएनटी समाज की प्रमुख मांगों में अधिकतर मांगें सरकार बिना कहे ही पूरी कर रही है। सरकार गरीब और असहाय लोगों के लिए रियायती दर पर राशन और आवास दे रही है। शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ाई, किताबें, यूनिफॉर्म फ्री दे रही है, बच्चों को 10 वीं से आगे की पढ़ाई के लिए शहर में छात्रवृत्ति के साथ साथ हॉस्टलों में रहने की सुविधा दे रही है। गांवों में बेराजगार युवाओं के लिए मनरेगा जैसी योजनाएं और सस्ती दरों पर लघु उद्योंगों और कृषि के लिए ब्याज रहित ऋण उपलब्ध करवा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार हर परेशानी में गरीबों और असहाय लोगों के लिए जब बिना मांगे ही सब कर रही है तो फिर इस आंदोलन का औचित्य क्या है?

डीएनटी समाज के नेताओं की बात करें तो समज के लिए लोगों द्वारा दबे कानों ऐसा कहा जा रहा है कि सरकार के सामने शक्ति प्रदर्शन कर समाज के ही कुछ बड़े नेता अपनी राजनीति को चमकाकर आगामी चुनावों में टिकट के लिए अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार करने में जुटे हैं। जब सरकार अपने हर नागरिक के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ दे रही है तो डीएनटी समाज के नेता घुमन्तु समाज के भोले भाले लोगों को एकत्र कर क्यों अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करना चाहते हैं।

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