स्मार्ट मीटर थोपने और बिजली निजीकरण की जबरन कार्रवाई पर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
० आशा पटेल ०
जयपुर । राजस्थान नागरिक मंच ने प्रदेशभर में बिना जनता की सहमति और जानकारी के ज़बरन स्मार्ट मीटर लगाने और बिजली निजीकरण की कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन भेजा है । मंच के अध्यक्ष बी पी गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष आर सी शर्मा, महासचिव बसंत हरियाणा, सचिव अनिल गोस्वामी, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष हेमलता कंसोटिया ने कहा कि प्रदेश में बिना जनता की सहमति और जानकारी के जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
मंच के सचिव अनिल गोस्वामी ने बताया कि यह कार्रवाई न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि पूरे बिजली तंत्र को कार्पोरेट कम्पनियों के हवाले करने की दिशा में एक चिंताजनक कदम है। स्मार्ट मीटर की रीडिंग अत्यधिक तेज चल रही है, जिससे हजारों उपभोक्ताओं के बिजली बिल अकल्पनीय स्तर तक पहुंच रहे हैं। यह मीटर किसी निजी कम्पनी द्वारा बनाए जा रहे हैं, बिना सार्वजनिक परीक्षण व गुणवत्ता सत्यापन के, जो राज्यहित और उपभोक्ताओं के आर्थिक अधिकारों के विरुद्ध है। स्मार्ट मीटर सीधे निजी कम्पनी के सर्वर से जुड़ जाते हैं,
मंच ने मुख्यमंत्री से मांग रखी है कि प्रदेशभर में स्मार्ट मीटर लगाने की इस जबरिया और एकतरफा प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोका जाए। स्मार्ट मीटर लगाने से पूर्व जन संवाद, पारदर्शी परीक्षण और उपभोक्ता सहमति को अनिवार्य बनाया जाए।जिन उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से अव्यवहारिक और अत्यधिक बिल भेजे गए हैं, उनकी जांच कर उन्हें तत्काल राहत प्रदान की जाए।
जयपुर । राजस्थान नागरिक मंच ने प्रदेशभर में बिना जनता की सहमति और जानकारी के ज़बरन स्मार्ट मीटर लगाने और बिजली निजीकरण की कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन भेजा है । मंच के अध्यक्ष बी पी गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष आर सी शर्मा, महासचिव बसंत हरियाणा, सचिव अनिल गोस्वामी, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष हेमलता कंसोटिया ने कहा कि प्रदेश में बिना जनता की सहमति और जानकारी के जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
मंच के सचिव अनिल गोस्वामी ने बताया कि यह कार्रवाई न केवल उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि पूरे बिजली तंत्र को कार्पोरेट कम्पनियों के हवाले करने की दिशा में एक चिंताजनक कदम है। स्मार्ट मीटर की रीडिंग अत्यधिक तेज चल रही है, जिससे हजारों उपभोक्ताओं के बिजली बिल अकल्पनीय स्तर तक पहुंच रहे हैं। यह मीटर किसी निजी कम्पनी द्वारा बनाए जा रहे हैं, बिना सार्वजनिक परीक्षण व गुणवत्ता सत्यापन के, जो राज्यहित और उपभोक्ताओं के आर्थिक अधिकारों के विरुद्ध है। स्मार्ट मीटर सीधे निजी कम्पनी के सर्वर से जुड़ जाते हैं,
जिससे रीडिंग व बिल प्रणाली पर उपभोक्ता का कोई नियंत्रण नहीं रह जाता। समय पर भुगतान न होने पर बिजली स्वत: काट दी जाती है, जो नागरिक अधिकारों पर सीधा हमला है। यह संपूर्ण प्रक्रिया बिजली विधेयक 2020 के क्रियान्वयन की दिशा में है, जिसका विरोध स्वयं किसान आंदोलन के दौरान किया गया था और सरकार ने लिखित रूप में उसे वापिस लेने का वादा किया था। इस प्रक्रिया में लोकतांत्रिक संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही का पूर्णत: अभाव है। यह न केवल जनतंत्र विरोधी है, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों को निजी हितों के हवाले करने की गुपचुप साजिश है।
मंच ने मुख्यमंत्री से मांग रखी है कि प्रदेशभर में स्मार्ट मीटर लगाने की इस जबरिया और एकतरफा प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोका जाए। स्मार्ट मीटर लगाने से पूर्व जन संवाद, पारदर्शी परीक्षण और उपभोक्ता सहमति को अनिवार्य बनाया जाए।जिन उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से अव्यवहारिक और अत्यधिक बिल भेजे गए हैं, उनकी जांच कर उन्हें तत्काल राहत प्रदान की जाए।
बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर राज्य सरकार अपनी स्पष्ट नीति जनता के सामने रखे और संसद/विधानसभा में व्यापक बहस कर उसे पारित करे। बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा हेतु एक स्वतंत्र और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना की जाए। लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में जनता की आवाज़ को सुना जाएगा और इस जनविरोधी कार्रवाई पर अविलंब रोक लगाई जाएगी।
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