श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर में भगवान जगन्नाथ का ‘सुनाभेष’

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य सुनाभेष (स्वर्णाभूषण श्रृंगार) दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। रथयात्रा महोत्सव के अंतर्गत होने वाला यह श्रृंगार समारोह मंदिर में पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। सुनाभेष, जिसे स्वर्ण वेश भी कहा जाता है, भगवान के राजसी स्वरूप का प्रतीक है। इस दिन तीनों विग्रहों को विभिन्न स्वर्ण आभूषणों से सजाया जाता है जिनमें मुकुट, कर्णफूल, हार, बाजूबंद, कंगन आदि शामिल होते हैं। भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ रत्न सिंहासन पर विराजमान होकर स्वर्ण आभूषणों से विभूषित हुए।

 पाहंडी और संध्या आरती के बाद सुनाभेष का प्रारंभ हुआ। जैसे ही एक-एक करके स्वर्ण आभूषण भगवानों पर सजाए गए, समस्त मंदिर परिसर "जय जगन्नाथ" के नारों से गूंज उठा। भक्तों की आस्था और भक्ति से वातावरण अत्यंत दिव्य और भावपूर्ण हो गया। मंदिर समिति के अनुसार, यह आयोजन रथयात्रा महोत्सव की श्रृंखला में सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण होता है। इस वर्ष यह श्री जगन्नाथ मंदिर की 58वीं रथयात्रा का हिस्सा रहा। मंदिर को भव्य पुष्प सज्जा, रंगोली और विद्युत रोशनी से सजाया गया था। साथ ही भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।

समारोह में सभी भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया गया। त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित यह सुनाभेष न केवल आध्यात्मिक अनुभव का अवसर था, बल्कि राजधानी में ओड़िया संस्कृति और परंपरा की गौरवमयी झलक भी प्रस्तुत करता है।

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