मोदी भारत की अर्थव्यवस्था डुबो रहे हैं,इससे ज़्यादा शर्मनाक बात हो नहीं सकती : डोटासरा
मुख्यमंत्री कांग्रेस के कार्यों की समीक्षा की तो बात कर रहे हैं, खुद के शासन में विभागों के कार्यों की समीक्षा क्यों नहीं कर रहे हैं? केवल भाषणबाजी हो रही है, इसमें समय व्यतीत हो रहा है। सरकार का जनता के हितों पर ध्यान नहीं है और जो झालावाड़ में घटना हुई वह इतनी दु:खद है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है, लेकिन सरकार ने कोई स्पेशल पैकेज नहीं दिया, केवल सामान्य सहायता प्रदान कर इतिश्री कर ली है।
o संवाददाता द्वारा o जयपुर। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्व.मोहन लाल सुखाडिय़ा की जयंती के अवसर पर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, इन्दिरा गाँधी भवन,जयपुर पर पुष्पांजलि कार्यक्रम हुआ। इस अवसर पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा सहित अनेक कांग्रेसजनों ने स्व.मोहन लाल सुखाडिय़ा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी पुष्पांजलि दी। इस अवसर पर प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि अतिवृष्टि के कारण प्रदेश की राजधानी सहित अन्य शहरों में पानी के भराव के कारण लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है,
ऐसे में सभी का कत्र्तव्य है कि लोगों का जीवन और दैनिक कार्य सुचारू चल सके इसके लिये व्यवस्था की जाये तथा सरकार से लोग मदद की अपेक्षा करते हैं किन्तु राजस्थान की सरकार प्रदेश में लोगों के दु:ख-तकलीफ दूर करने की बजाए दिल्ली में हाजिरी दे रही है। मुख्यमंत्री केन्द्रीय मंत्रियों, लोकसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं, किन्तु राजस्थान की जनता को नहीं सम्भाल रहे हैं। राजस्थान में ऐसा शासन चल रहा है कि ना तो ब्यूरोक्रेट, ना ही प्रभारी मंत्री फील्ड में जा रहे हैं,
केवल बयानबाजी से शासन चलाया जा रहा है, आश्चर्य की बात है कि बरसात में एक ओर तो लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है, दूसरी ओर मुख्यमंत्री जयपुर आकर 100 गाडिय़ों के काफिले के साथ निकलकर अपनी रील बनवा रहे हैं जिससे लोगों को आवाजाही में और अधिक कष्ट का सामना करना पड़ रहा है, जबकि ऐसे समय में मुख्यमंत्री को निर्देश देने चाहिये कि प्रभारी मंत्री अपने-अपने प्रभार क्षेत्रों में जाकर नुकसान का जायजा लें और जनजीवन सामान्य करने के लिये सुझाव प्रस्तुत करें।
राजस्थान का दुर्भाग्य है कि मुख्यमंत्री का समय प्रदेश की जनता के हित में निर्णय लेने की बजाए मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा दिल्ली में प्रधानमंत्री की हाजिरी में व्यतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भवन बनना और उनके रख-रखाव के कार्य सतत् प्रक्रिया है, सरकार का दायित्व है कि समय-समय पर भवनों का सर्वे करवाये और जहॉं अति-आवश्यक हो वहॉं बजट का इस्तेमाल कर मरम्मत के कार्य करवाये, लेकिन हो यह रहा है कि सरकार केवल कांग्रेस के कार्यों की समीक्षा कर रही है,
अनर्गल बयानबाजी कर कांग्रेस को कोसने का काम हो रहा है, इसके अतिरिक्त कोई कार्य नहीं हो रहा है। शिक्षा विभाग में पिछले डेढ़ वर्ष में ना तो किसी शिक्षक की भर्ती हुई है और ना ही किसी भवन की मरम्मत हेतु राशि जारी हुई है, मंत्री ने झालावाड़ में दुर्घटना होने पर आनन्-फानन् में बयान दिया कि सरकार ने जर्जर स्कूलों के भवनों की मरम्मत के लिये 159 करोड़ रूपये बजट में दिये हैं, किन्तु जानकारी मिली है कि इसकी प्रशासनिक स्वीकृति तो बयान के भी सात दिन बाद जारी हुई और वित्तीय स्वीकृति व टेण्डर प्रक्रिया तो प्रारम्भ ही नहीं हुई, काम होना तो दूर की बात है।
अच्छा होता कि मुख्यमंत्री घोषणा करते कि जितने भी जन उपयोगी भवन है जिनमें स्कूल, कॉलेज, प्राथमिक चिकित्सालय, सामुदायिक चिकित्सालय या सामुदायिक भवन इत्यादि की मरम्मत सरकार करवायेगी और स्पेशल पैकेज की घोषणा करते, किन्तु मुख्यमंत्री ने यह घोषणा करने की बजाए कहा है कि कांग्रेस सरकार द्वारा पॉंच वर्ष में करवाये गये निर्माण कार्यों की जॉंच सरकार करवायेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे भवनों की जॉंच सरकार क्या करवायेगी, यह भवन तो अभी गारंटी पीरियड में है, उसमें कोई गड़बड़ी पाई गई तो ठेकेदार के खिलफ वैसे ही कार्यवाही हो जायेगी।
किसी भवन की जॉंच करवाना, गुणवत्ता को जांचना एक विषय है लेकिन जो भवन सुरक्षित नहीं है उसे मरम्मत कर सुरक्षित बनाना, जनता को सुविधायें उपलब्ध करवाना दीगर विषय है, लेकिन इस पर मुख्यमंत्री जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ऐसी स्थिति हो गई है कि जो बरसात में सडक़ें टूटी है तथा जिन भवनों में बरसात में पानी टपक रहा है उनकी भी मरम्मत करवाने की स्थिति में सरकार नहीं है। मुख्यमंत्री का एक बयान नहीं आया कि अतिवृष्टि से प्रभावित भवनों की मरम्मत अथवा उन्हें सुरक्षित बनाने हेतु कोई बजट राशि आवंटित कर जिला कलेक्टरों को जिम्मेदारी दी हो।
मुख्यमंत्री कांग्रेस के कार्यों की समीक्षा की तो बात कर रहे हैं, खुद के शासन में विभागों के कार्यों की समीक्षा क्यों नहीं कर रहे हैं? केवल भाषणबाजी हो रही है, इसमें समय व्यतीत हो रहा है। सरकार का जनता के हितों पर ध्यान नहीं है और जो झालावाड़ में घटना हुई वह इतनी दु:खद है जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है, लेकिन सरकार ने कोई स्पेशल पैकेज नहीं दिया, केवल सामान्य सहायता प्रदान कर इतिश्री कर ली है।
डोटासरा ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव को लेकर जो अधिकृत नहीं है, सरकार की ओर से वे ही बयान दे रहे हैं, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त ने साफ कहा है कि सरकार की मंशा इन चुनावों को कराने की नहीं है, बार-बार सरकार बहानेबाजी कर रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतों का, वार्डों का पुनर्गठन करते हुये कई महिने बीत गये किन्तु जून में डेड लाईन दी थी उसे गुजरे हुये भी लम्बा समय निकल गया है लेकिन राज्य सरकार ने अब तक निर्णय नहीं लिया है,
जबकि यह कार्य 12 महिने पहले पूर्ण हो जाना चाहिये था। पंचायतों और नगर निकायों के कार्यकाल की समाप्ति से पूर्व पुनर्गठन का कार्य कर लिया जाकर सही समय पर चुनाव होने चाहिये थे। उन्होंने कहा कि मई माह में वार्डों के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी होनी चाहिये थी लेकिन अगस्त महिना आ गया, सरकार ने निर्णय ही नहीं लिया और माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुसार नगर निकायों एवं पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों से पूर्व ओबीसी आयोग का गठन कर रिपोर्ट लेनी आवश्यक थी,
किन्तु सरकार ने देरी से इस आयोग का गठन किया, अब ओबीसी आयोग कब तो अपनी रिपोर्ट देगा और कब निकायों व पंचायती राज संस्थाओं के लिये गजट नोटिफिकेशन जारी होगा इसका जवाब नहीं मिल रहा है। नई पंचायत समितियां गठित होंगी, नये निकाय गठित होंगे उनके वार्डों के परिसीमन के लिये भी कार्य होना है, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के पश्चात् ओबीसी आरक्षण के लिये ही लाटरी निकलनी है, वोटर लिस्ट भी तैयार होनी है, यह सब कार्य अभी हुये नहीं है, केवल बयानबाजी सरकार की ओर से हो रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये कि वे इन संस्थाओं के चुनाव कराने में सक्षम है या नहीं। राजस्थान की भाजपा सरकार लोकतंत्र और प्रजातंत्र का गला घोट रही है, यदि मुख्यमंत्री संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इन संस्थाओं का चुनाव कराने में सक्षम नहीं है तो दिल्ली से दूसरी पर्ची आकर सरकार में बदलाव होने चाहिये।
डोटासरा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प तो प्रधानमंत्री मोदी के मित्र हैं, देश पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाकर क्या भारत को अमेरिका ने तोफा दिया है, इसका जवाब केन्द्र सरकार को देना चाहिये। लोकसभा में प्रधानमंत्री का वक्तव्य है कि सीज फायर किसी के कहने से नहीं किया, इस पर भी देश पर 25 प्रतिशत टैरिफ अमेरिका ने लगा दी और यदि नाम ले लेते तो क्या होता, यह सोचने का विषय है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो देश के लिये यहॉं तक कह दिया कि पाकिस्तान से तेल लेना पड़ेगा और भारत की अर्थव्यवस्था डुबो रहे हो, इससे शर्मनाक बात देश के लिये नहीं हो सकती,
क्योंकि यह प्रधानमंत्री मोदी का विषय नहीं है, देश के स्वाभिमान का विषय है। आश्चर्य है कि प्रधानमंत्री इस विषय पर ना लोकसभा, ना राज्यसभा कहीं नहीं बोल रहे हैं। कम से कम इतना तो कहें कि उन्होंने अमेरिकी दबाव में सीज फायर नहीं किया और जिसमें देश का हित ना हो ऐसा कोई निर्णय अमेरिका के दबाव में नहीं लिया जायेगा, यह बात प्रधानमंत्री को देश के समक्ष रखनी चाहिये। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहते थे कि चीन को लाल ऑंख दिखानी चाहिये, अमेरिका को लव लेटर लिखना बंद होना चाहिये,
पाकिस्तान से एक सिर के बदले दस सिर लायेंगे, लेकिन यह बातें हवा हो गई, प्रधानमंत्री चुप हो गये हैं, इसलिये देश समझ गया है कि इनसे कमजोर प्रधानमंत्री हो नहीं सकता और प्रदेश में वर्तमान सरकार से कमजोर सरकार नहीं हो सकती है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव व मीडिया प्रभारी स्वर्णिम चतुर्वेदी ने बताया कि आज कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के समक्ष नागौर सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमेन
महेन्द्र पाल चौधरी ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर पार्टी की मजबूती के लिये कार्य करने का संकल्प लिया और प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा ने चौधरी को पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराते हुये कांग्रेस का दुपट्टा उढ़ाकर पार्टी में शामिल किया। इस अवसर पर नागौर विधायक हरेन्द्र मिर्धा भी उपस्थित रहे।

टिप्पणियाँ