उत्तराखंडी बोली-भाषा ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का समापन समारोह
० योगेश भट्ट ०
नई दिल्ली। उत्तराखंड संस्कृतिक मंच बुराड़ी,उत्तराखंड प्रवासी संगठन लोनी,रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन शास्त्री पार्क एक्सटेंशन ए-ब्लॉक, डी-ब्लॉक एवं उत्तराखंड पार्ट-2 के संयुक्त संयोजन से तथा उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच व डी.पी.एम.आई. के तत्वाधान में संचालित उत्तराखंडी बोली-भाषा (गढ़वाली, कुमाऊनी, जौनसारी) की ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का समापन समारोह श्री नारायण भवन, शास्त्री पार्क एक्सटेंशन, बुराड़ी में संपन्न हुआ।
विनोद बछेती ने सभी केंद्र प्रमुखों, शिक्षकों-शिक्षिकाओं एवं सहयोगकर्ताओं का सम्मान करते हुए निकट भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग जारी रखने की अपील की। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने, लोक भाषा व संस्कृति को मजबूत करने तथा उत्तराखंडी भाषाओं को संविधान की आठवीं सूची में शामिल कराने हेतु गंभीर प्रयास करने का आश्वासन दिया। दिल्ली-एनसीआर व अन्य राज्यों में संचालित 52 केंद्रों की सराहना की।
समारोह में तीनों आर.डब्ल्यू.ए. प्रधान सर्वेश ठाकुर, महेंद्र सिंह नेगी एवं कपिल देव मिश्रा की भागीदारी इसके अलावा ६ केंद्रों के समापन में ४ केंद्र प्रमुखों प्रेम सिंह नेगी, ठाकुर सिंह रौथाण, चंदन सिंह नेगी, नंदन सिंह कंडारी, राकेश रावत एवं गिरीश सत्यवली ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कौस्तुवानंद बुलोदी (पूर्व निगम पार्षद, कमल विहार) मंगेश त्यागी (विधायक प्रत्याशी, कांग्रेस), नारायण दत्त सनवाल (अध्यक्ष आर.डब्ल्यू.ए. फेडरेशन), भागवत कथा वाचक हरीश शास्त्री, एवं हरीश रौतेला (अध्यक्ष, रेडियंट पब्लिक स्कूल) उपस्थित रहे।
नई दिल्ली। उत्तराखंड संस्कृतिक मंच बुराड़ी,उत्तराखंड प्रवासी संगठन लोनी,रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन शास्त्री पार्क एक्सटेंशन ए-ब्लॉक, डी-ब्लॉक एवं उत्तराखंड पार्ट-2 के संयुक्त संयोजन से तथा उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच व डी.पी.एम.आई. के तत्वाधान में संचालित उत्तराखंडी बोली-भाषा (गढ़वाली, कुमाऊनी, जौनसारी) की ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का समापन समारोह श्री नारायण भवन, शास्त्री पार्क एक्सटेंशन, बुराड़ी में संपन्न हुआ।
बच्चों ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक दिखाई पारंपरिक लोकगीत-नृत्य, रंग-बिरंगे पहनावे, पहाड़ी व्यंजनों का परिचय, देवस्थलों व पवित्र नदियों की झांकी और स्वच्छ समाज के संदेशों ने दर्शकों को उत्तराखंड की असली पहचान से रूबरू कराया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डी.पी.एम.आई. के प्रबंध निदेशक विनोद बछेती रहे, वहीं लोक भाषा साहित्य मंच के संयोजक दयाल सिंह नेगी ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष बनाया।
विनोद बछेती ने सभी केंद्र प्रमुखों, शिक्षकों-शिक्षिकाओं एवं सहयोगकर्ताओं का सम्मान करते हुए निकट भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग जारी रखने की अपील की। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने, लोक भाषा व संस्कृति को मजबूत करने तथा उत्तराखंडी भाषाओं को संविधान की आठवीं सूची में शामिल कराने हेतु गंभीर प्रयास करने का आश्वासन दिया। दिल्ली-एनसीआर व अन्य राज्यों में संचालित 52 केंद्रों की सराहना की।
समारोह में तीनों आर.डब्ल्यू.ए. प्रधान सर्वेश ठाकुर, महेंद्र सिंह नेगी एवं कपिल देव मिश्रा की भागीदारी इसके अलावा ६ केंद्रों के समापन में ४ केंद्र प्रमुखों प्रेम सिंह नेगी, ठाकुर सिंह रौथाण, चंदन सिंह नेगी, नंदन सिंह कंडारी, राकेश रावत एवं गिरीश सत्यवली ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कौस्तुवानंद बुलोदी (पूर्व निगम पार्षद, कमल विहार) मंगेश त्यागी (विधायक प्रत्याशी, कांग्रेस), नारायण दत्त सनवाल (अध्यक्ष आर.डब्ल्यू.ए. फेडरेशन), भागवत कथा वाचक हरीश शास्त्री, एवं हरीश रौतेला (अध्यक्ष, रेडियंट पब्लिक स्कूल) उपस्थित रहे।
टिप्पणियाँ