गुरु जंभेश्वर के 29 नियमों में ही है पर्यावरण समस्याओं का संपूर्ण हल _ प्रो अग्रवाल
खेजड़ली, जोधपुर। खेजड़ली में अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सेमिनार का खेजड़ली में शुभारंभ हुआ। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय की गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोधपीठ, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान एवं खेजड़ली शहीदी राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान खेजड़ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सेमिनार का खेजड़ली में शुभारंभ मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद एवं महंत शिवदास शास्त्री के सानिध्य में हुआ।
खेजड़ली शहीदी राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान के अध्यक्ष मलखान सिंह बिश्नोई ने कहा कि जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने वाले सभी पर्यावरण विद् इस सेमिनार में जो भी पर्यावरण की समस्याओं के निराकरण के लिए चिंतन मंथन करेंगे उनका सारांश तैयार करके सरकारों को भिजवाया जाएगा ताकि पर्यावरण की रक्षा के लिए नए नियम कानून बनाए जा सके इसके साथ-साथ आम जन से क्या मदद ली जा सकती है विशेष रूप से बिश्नोई समाज हमेशा पर्यावरणविदों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रकृति की रक्षा के लिए काम करेगा।
गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोधपीठ के निदेशक डॉ ओ पी बिश्नोई ने गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोध पीठ की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कला, शिक्षा एवं समाज विज्ञान संकाय के डीन एवं सेमिनार के कन्वीनर डॉ मंगलाराम ने सेमिनार को सफल बनाने के लिए योगदान करने वाले सभी पर्यावरण विदों का आभार जताया एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ हितेंद्र गोयल,डॉ भंवरलाल उमरलाई,डॉ चंद्रभान, एवं श्याम बाबल द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो अविनाश कुमार अग्रवाल ने बताया कि गुरु जंभेश्वर के 29 नियमों का पालन कर लिया जाए तो पर्यावरण की अधिकतम समस्याओं का निराकरण स्वत: हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों के साथ हमें जीवन जीना सीखना चाहिए तभी हम प्रकृति की वास्तविक रक्षा कर पाएंगे। उनके साथ जीवन जीना अद्भुत एवं अलौकिक है, प्राकृतिक है।
म स्वयं जहां भी रहते हैं काम करते हैं उस जगह पर पर्यावरण की रक्षा के लिए अधिक से अधिक क्या योगदान कर सकते हैं?वही उदाहरण जगत के सामने जब प्रस्तुत होता है तो प्रेरणा मिलती है। उनके द्वारा आईआईटी जोधपुर में किए गए नवाचारों का विवरण प्रस्तुत किया गया। विशिष्ट अतिथि के ही रूप में बोलते हुए मारवाड़ मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो महेंद्र आसेरी ने पर्यावरण संरक्षण के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर व्याख्यान दिया।
गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय हिसार हरियाणा के कुलपति प्रोफेसर नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार द्वारा पर्यावरण के क्षेत्र में अनेक नवाचार किए गए हैं। 65000 से अधिक पौधे वृक्ष का रूप लेने जा रहे हैं तथा पर्यावरण के लिए गुरु जंभेश्वर के आदर्शों को विश्व के कौने-कौने में प्रचारित प्रसारित करके विश्व मानवता को जीव रक्षा और पर्यावरण सुरक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सारस्वत वक्ता के रूप में प्रो अनिल छंगाणी ने पीपीटी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुक करते हुए प्रभावी उद्बोधन दिया।
खेजड़ली शहीदी राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान के अध्यक्ष मलखान सिंह बिश्नोई ने कहा कि जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने वाले सभी पर्यावरण विद् इस सेमिनार में जो भी पर्यावरण की समस्याओं के निराकरण के लिए चिंतन मंथन करेंगे उनका सारांश तैयार करके सरकारों को भिजवाया जाएगा ताकि पर्यावरण की रक्षा के लिए नए नियम कानून बनाए जा सके इसके साथ-साथ आम जन से क्या मदद ली जा सकती है विशेष रूप से बिश्नोई समाज हमेशा पर्यावरणविदों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रकृति की रक्षा के लिए काम करेगा।
विद्या भारती उच्च शिक्षण संस्थान राजस्थान के अध्यक्ष संजय शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण को हमारे भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए अपना निष्कर्ष प्रस्तुत किया।राजस्थान उच्च न्यायालय के अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर बिश्नोई ने पर्यावरण के कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डाला। जांभाणी साहित्य अकादमी की अध्यक्ष इंद्रा बिश्नोई ने कहा कि अकादमी गुरु जंभेश्वर के पर्यावरणीय मूल्यों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करते हुए निरंतर आमजन में पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है
विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं पर्यावरणविदों के साथ किए जाने वाले चिंतन मंथन को प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है ताकि पर्यावरण की रक्षा की जा सके। पूर्व विधायक महेंद्र बिश्नोई, रमेश गोदारा आईएफएस, श्यामसुंदर जानी, कर्नल बलदेव चौधरी, प्रो प्रदीप शर्मा, शिवराज जाखड़, डीआर गोपेश पवार, डॉ कृष्ण लाल, डॉ स्मृति, डॉ ममता शर्मा, सहित विभिन्न पर्यावरण वेदों एवं शोधार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए ।
गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोधपीठ के निदेशक डॉ ओ पी बिश्नोई ने गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण शोध पीठ की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कला, शिक्षा एवं समाज विज्ञान संकाय के डीन एवं सेमिनार के कन्वीनर डॉ मंगलाराम ने सेमिनार को सफल बनाने के लिए योगदान करने वाले सभी पर्यावरण विदों का आभार जताया एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ हितेंद्र गोयल,डॉ भंवरलाल उमरलाई,डॉ चंद्रभान, एवं श्याम बाबल द्वारा किया गया।
उद्घाटन सत्र के दौरान ही सेमिनार की स्मारिका का विमोचन किया गया। गुरु जंभेश्वर शोध पीठ द्वारा घोषित तीन पुरस्कार गुरु जंभेश्वर पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल को, अमृता देवी वृक्ष मित्र पुरस्कार राधेश्याम पैमाणी को (मरणोपरांत), प्रो जेताराम विश्नोई स्मृति पुरस्कार पीराराम धायल को को प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान संतलाल दास, संगीता लूंकड डीन,जोधपुर डेयरी के पूर्व अध्यक्ष रामलाल बिश्नोई,
पूर्व जिला उप प्रमुख गोपाराम बुढ़िया, प्रोफेसर के आर पटेल, डॉ दिनेश गहलोत, प्रो प्रवीण गहलोत, मोहन लाल बीडीओ, डॉ सुरेंद्र खीचड़, अमरचंद दिलोईया,मान महेंद्र साहू, देवाराम पवार, रामनिवास बुध नगर, सागर बाबल पूर्व सरपंच, बाबूलाल बाबल, मोहनलाल खिलेरी,बाबूलाल खीचड़, ओम लोल, शिवलाल भादू, भगवान राम मांजू सेवानिवृत्ति अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खेताराम बाबूलाल गोदारा, पंचायत समिति सदस्य महीराम सारण, भागीरथ बिश्रोई सुरेंद्र विश्नोई जगदीश विश्नोई, राकेश डउकिया, डॉ मनीष रोशन खीचड़ जगदीश गोदारा राणाराम नैण ,शंकर सिंह खोखर,
सुभाष बावरला, सुभाष पवार, सुभाष खीचड़, किशन लाल कड़वासरा, सवाई सिंह, काशीराम विश्नोई, भोपाल राम जाट सहित सेकड़ो पर्यावरणविद् , जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के शिक्षाविद्, अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने वाले शोधार्थी एवं गणमान्य पर्यावरण प्रेमी उपस्थित थे। सम्मेलन के उपरांत चिंतन का निष्कर्ष तैयार कर सरकार एवं पर्यावरण के लिए काम करने वाले संस्थानों को अग्रेषित किया जाएगा। ताकि गुरु जंभेश्वर के पर्यावरणीय जीवन मूल्यों को विश्व मानवता की रक्षा के लिए विश्व के कोने-कोने में प्रचारित प्रसारित किया जा सके तथा हमारी आने वाली पीढ़ियों के हरित अधिकार सुरक्षित रखे जा सके।
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