गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित कराने हेतु दिल्ली के जंतर मंतर पर होगा धरना प्रदर्शन
० योगेश भट्ट ०
नई दिल्ली, उत्तराखंड की अस्मिता और जनभावनाओं को स्थायी राजधानी गैरसैंण की दिशा में संगठित करने हेतु प्रवासी एवं स्थानीय उत्तराखंडी समाज ने नई दिल्ली में ऐतिहासिक पहल की। उत्तराखंड सदन में 33 प्रवासी उत्तराखंडियों की उपस्थिति में “स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति” का औपचारिक गठन किया गया। “I for Uttarakhand” नामक व्हाट्सएप समूह संवाद और विचार-विमर्श का माध्यम बना। इसी समूह से जुड़े दिल्ली के सोशल मीडिया कार्यकर्ता जगदीश पुरोहित ने प्रवासी उत्तराखंडियों को संगठित कर आंदोलन को दिशा दी।
बैठक में पत्रकार देवेन एस. खत्री ने समिति के गठन का प्रस्ताव रखते हुए नाम “स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति”, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली। समिति की कार्यकारिणी घोषित की गई • श्रीमती हेमलता रतूड़ी संयोजक • देवेन एस. खत्री सह संयोजक खत्री ने समिति की दृष्टि (Vision), मिशन तथा ध्येय वाक्य तैयार किए और अभियान को सशक्त स्वरूप देने हेतु लोगो, लेटरहेड एवं प्रचार सामग्री प्रस्तुत की।
नई दिल्ली, उत्तराखंड की अस्मिता और जनभावनाओं को स्थायी राजधानी गैरसैंण की दिशा में संगठित करने हेतु प्रवासी एवं स्थानीय उत्तराखंडी समाज ने नई दिल्ली में ऐतिहासिक पहल की। उत्तराखंड सदन में 33 प्रवासी उत्तराखंडियों की उपस्थिति में “स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति” का औपचारिक गठन किया गया। “I for Uttarakhand” नामक व्हाट्सएप समूह संवाद और विचार-विमर्श का माध्यम बना। इसी समूह से जुड़े दिल्ली के सोशल मीडिया कार्यकर्ता जगदीश पुरोहित ने प्रवासी उत्तराखंडियों को संगठित कर आंदोलन को दिशा दी।
बैठक में पत्रकार देवेन एस. खत्री ने समिति के गठन का प्रस्ताव रखते हुए नाम “स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति”, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली। समिति की कार्यकारिणी घोषित की गई • श्रीमती हेमलता रतूड़ी संयोजक • देवेन एस. खत्री सह संयोजक खत्री ने समिति की दृष्टि (Vision), मिशन तथा ध्येय वाक्य तैयार किए और अभियान को सशक्त स्वरूप देने हेतु लोगो, लेटरहेड एवं प्रचार सामग्री प्रस्तुत की।
21 सितम्बर को जंतर मंतर, नई दिल्ली में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। सोशल मीडिया प्रचार-प्रसार की ज़िम्मेदारी जगदीश पुरोहित संभालेंगे। समिति का उद्देश्य उत्तराखंड राज्य की जनभावनाओं को एकजुट कर गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित कराने हेतु लोकतांत्रिक और अहिंसात्मक आंदोलन को गति देना।
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