मरीज़ों के चेहरे पर मुस्कान लाने की "मुहिम" में लगी है सिया गुप्ता
० आशा पटेल ०
जयपुर | मरीज़ों को किसी भी तरह की कोई तकलीफ महसूस न हो, इसके लिए मिस सिया गुप्ता उनकी हर संभव मदद करती हैं। समय-समय पर उन्हें ज़रूरत का सामान भी मुहैया करवाती हैं।जी हाँ ! सिया जीवन के अंतिम छोर पर पहुँचे लोगों के बीच मुस्कान बांटने का प्रयास कर रही हैं जयपुर की सिया गुप्ता।
महज़ 16 वर्षीय मिस सिया गुप्ता इन दिनों जयपुर के जयश्री पेडीवाल इंटरनेशनल स्कूल में 12 वीं कक्षा की विद्यार्थी है | सिया गुप्ता इन दिनों ऐसे 440 मरीज़ों की सेवा में जुटी हैं, जिनके जीवन का अंत करीब नज़र आ रहा है। उन्होंने 2023 में एक संस्था 'मुहिम' शुरू की थी ।
ये परिजनों को भी संबल देती है | मिस सिया कहती हैं कि मेरा मकसद लोगों को जागरूक करना है कि मरीज़ किसी भी स्थिति में पहुंचा हो, अपनों को उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए। वह कहती हैं कि मरीज़ों के लिए सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं और बेहतर सुविधाएं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाना मेरा लक्ष्य है। इसके लिए कई तरह के कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं। मिस सिया ही समय-समय पर डॉक्टर्स की टीम के साथ ऐसे मरीज़ों के घर पर भी विजिट करती है और उन्हें आत्म संबल देती है।
जयपुर | मरीज़ों को किसी भी तरह की कोई तकलीफ महसूस न हो, इसके लिए मिस सिया गुप्ता उनकी हर संभव मदद करती हैं। समय-समय पर उन्हें ज़रूरत का सामान भी मुहैया करवाती हैं।जी हाँ ! सिया जीवन के अंतिम छोर पर पहुँचे लोगों के बीच मुस्कान बांटने का प्रयास कर रही हैं जयपुर की सिया गुप्ता।
महज़ 16 वर्षीय मिस सिया गुप्ता इन दिनों जयपुर के जयश्री पेडीवाल इंटरनेशनल स्कूल में 12 वीं कक्षा की विद्यार्थी है | सिया गुप्ता इन दिनों ऐसे 440 मरीज़ों की सेवा में जुटी हैं, जिनके जीवन का अंत करीब नज़र आ रहा है। उन्होंने 2023 में एक संस्था 'मुहिम' शुरू की थी ।
जिसके माध्यम से मरीज़ों को जीवन के इस कठिन सफर के दौरान क्वालिटी लाइफ़ उपलब्ध करवाना है। मिस सिया और उनकी टीम द्वारा घर और अस्पतालों में एडवांस्ड कैंसर और पुरानी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों के लिए अब तक 200 चिकित्सा उपकरण वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें व्हीलचेयर, गतिशीलता सहायक (mobility aids), ऑक्सीजन सपोर्ट और बीपी मॉनिटर शामिल हैं।
सिया गुप्ता को शुरूआती दिनों में एक मरीज़ को देख रोना आ गया था | सिया कहती हैं कि हम परिज़नों को समझाते हैं कि किस तरह से मरीज़ों के अंतिम समय पर दर्द को कम करने में उनकी मदद करें। मिस सिया कहती हैं कि एक दिन मैं एक मरीज़ से मिली, उसकी हालत देख मुझे रोना आ गया। उससे बात की तो पता चला कि वह एक ऐसी बीमारी से पीड़ित है, जिसमें इलाज संभव नहीं है। डॉक्टर्स से जानकारी मिली कि इस मरीज़ के पास जीने के लिए बहुत कम समय है।
ये परिजनों को भी संबल देती है | मिस सिया कहती हैं कि मेरा मकसद लोगों को जागरूक करना है कि मरीज़ किसी भी स्थिति में पहुंचा हो, अपनों को उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए। वह कहती हैं कि मरीज़ों के लिए सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं और बेहतर सुविधाएं की जानकारी भी लोगों तक पहुंचाना मेरा लक्ष्य है। इसके लिए कई तरह के कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं। मिस सिया ही समय-समय पर डॉक्टर्स की टीम के साथ ऐसे मरीज़ों के घर पर भी विजिट करती है और उन्हें आत्म संबल देती है।
वह बताती हैं कि उन्हें ‘संवेदना’ संस्था का कार्य भी बहुत प्रभावित करने वाला लगा, जो इन मरीज़ों के लिए सिर्फ शारीरिक आराम से परे जाकर काम करती है; वे मानसिक स्वास्थ्य को ऊपर उठाने के लिए छात्रों द्वारा संगीत जैसे कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं। मरीज़ नहीं बल्कि ऐसे न जाने कितने लोग होंगे, जो बीमारी की इस स्टेज पर पहुंच गए हैं, जिसमें उन्हें अपना अंत नजदीक नज़र आ रहा है और उनके परिजनों को हिम्मत देती है। इस संबंध में मिस सिया ने अपने पेरेंट्स से बात कर मरीज़ों की सेवा के लिए 'मुहिम' शुरू की।
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