अजयमेरु प्रेस क्लब में डॉ कैलाश चन्द्र शर्मा के ग़ज़ल संग्रहों का विमोचन
० आशा पटेल ०
जयपुर : मशहूर शायर पद्मश्री शीन क़ाफ़ निज़ाम ने कहा है कि शब्द वो पनाहगाह हैं जिसमें सन्नाटा सो रहा है। हम अनेक बार सिर्फ "हम्म्म्म" बोल कर अपने भाव व्यक्त करते हैं। लेकिन निर्भर करता है कि हम "हम्म्म्म" किस तरह कह रहे हैं। अलग-अलग भाव में "हम्म्म्म" कह देने भर से भी उस "हम्म्म्म" के अलग अर्थ निकलते हैं। वह अजयमेरु प्रेस क्लब के सभागार में एमडीएस विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा के दो ग़ज़ल संग्रहों "बर्ग-ओ-गुल" व "ज़हर आब-ए-हयात है" के लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि तकरीर कर रहे थे।
उन्होंने महाभारत का ज़िक्र करते हुए कहा कि वेद व्यास ने लिखा है "इस धरती पर धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष से ज्यादा कोई जीवन नहीं। सब कुछ इन्हीं चारों में निहित है। आगे कालखण्डों में जो कविताएं लिखी जाएंगी, वे सभी इस ग्रंथ के इन चार तथ्यों पर ही आधारित होंगी।" और शायरी व गज़लें भी इन्हीं के इर्दगिर्द हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री डॉ चंद्र प्रकाश देवल ने कहा कि शायरी अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। भावनाओं को प्रकट करने के लिए बुने गए शब्दों का एक पद्यात्मक संकलन शायरी है। उन्होंने कहा कि एक चिंतक-विचारक एकांत में सोचता है और अपनी बात किसी न किसी रूप/विधा में लिख लेता है। मगर लोगों तक उसे पहुंचाने के लिए उसे पुस्तक का स्वरूप देकर आम जन को समर्पित कर देता। उद्देश्य यही है कि भाव समाज तक पहुंच जाएं।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ रमेश अग्रवाल ने कहा कि गज़लों के लिए तकनीकी तथ्य "रदीफ़, काफिया, मीटर" जरूर बहुत महत्व रखते हैं, मगर उससे बढ़ कर जरूरी है "भाव, जज़्बात और खयाल"। यदि एक मजबूत पुख्ता दर्शन किसी रचनाकार के दिमाग में जन्म ही नहीं लेगा तो वो रदीफ़-काफिये में बांधेगा क्या?
डॉ कैलाशचंद्र शर्मा ने गज़ल कहने की अपनी शुरुआत और प्रेरणास्रोत का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे विज्ञान पढ़ कर लेक्चरार, प्रोफेसर व विश्विद्यालय के कुलपति तक का सफर तय किया। धर्मपत्नी मशहूर चिकित्सक रहीं स्वर्गीय डॉ रेणु शर्मा को याद करते हुए वे भावुक हुए। उन्होंने बताया कि जीवन संघर्षपूर्ण रहा और वहीं से गज़लों के ख़याल आये, मगर लेखन का समय सेवानिवृत्त होने के बाद ही मिला।
क्लब अध्यक्ष राजेंद्र गुंजल ने क्लब की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने डॉ कैलाशचंद्र शर्मा सहित मुख्य अतिथि शीन क़ाफ़ निज़ाम का जीवन परिचय दिया। मंचासीन सभी अतिथियों ने डॉ शर्मा के दोनों ग़ज़ल संग्रहों की "किताबी शक्ल" पर चढ़े आवरण को हटा कर गज़लों को "लोकार्पित" किया। इस मौके पर गुंजल ने सुनीता जैन के पति प्रभातचंद्र जैन को विशेष रूप से मंच पर आमंत्रित कर सभा को बताया कि इन गज़ल- संग्रहों के लिए ऐसे आयोजन की प्रेरणा के स्रोत जैन ही हैं।
जयपुर : मशहूर शायर पद्मश्री शीन क़ाफ़ निज़ाम ने कहा है कि शब्द वो पनाहगाह हैं जिसमें सन्नाटा सो रहा है। हम अनेक बार सिर्फ "हम्म्म्म" बोल कर अपने भाव व्यक्त करते हैं। लेकिन निर्भर करता है कि हम "हम्म्म्म" किस तरह कह रहे हैं। अलग-अलग भाव में "हम्म्म्म" कह देने भर से भी उस "हम्म्म्म" के अलग अर्थ निकलते हैं। वह अजयमेरु प्रेस क्लब के सभागार में एमडीएस विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा के दो ग़ज़ल संग्रहों "बर्ग-ओ-गुल" व "ज़हर आब-ए-हयात है" के लोकार्पण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि तकरीर कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जानने की प्रक्रिया में रहना ही जानना है। जिसने यह सोच लिया कि उसने सब जान लिया तो उसकी स्थिति "जाना था जापान पहुंच गए चीन वाली होती है"। ग़ज़ल व शायरी भी जानने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें शायर कुछ जानने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया सदैव दूसरों के बारे में बात करती है, मगर शायर जब शायरी या ग़ज़ल कहता है तो उसमें वो सिर्फ अपने बारे में बात करता है। जो उसने देखा, भोगा या अनुभव किया; वही उसने तुकबंदी कर लिखा।
उन्होंने बात कहने के ढंग में भी अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी चीज "ये" नहीं होती, बल्कि "यूँ" होती है। उन्होंने "ये" और "यूँ" के उपयोग के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि हम यह नहीं कह सकते कि सृष्टि "ये" है, बल्कि हम कहते हैं कि सृष्टि कैसी है, "सृष्टि यूँ है" कहा जायेगा। ग़ज़ल के हवाले से उन्होंने स्पष्ट किया कि एक शायर भी अपनी बात रखने के लिए कहता है "शेर कुछ यूँ कहा है..."।
उन्होंने महाभारत का ज़िक्र करते हुए कहा कि वेद व्यास ने लिखा है "इस धरती पर धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष से ज्यादा कोई जीवन नहीं। सब कुछ इन्हीं चारों में निहित है। आगे कालखण्डों में जो कविताएं लिखी जाएंगी, वे सभी इस ग्रंथ के इन चार तथ्यों पर ही आधारित होंगी।" और शायरी व गज़लें भी इन्हीं के इर्दगिर्द हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री डॉ चंद्र प्रकाश देवल ने कहा कि शायरी अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। भावनाओं को प्रकट करने के लिए बुने गए शब्दों का एक पद्यात्मक संकलन शायरी है। उन्होंने कहा कि एक चिंतक-विचारक एकांत में सोचता है और अपनी बात किसी न किसी रूप/विधा में लिख लेता है। मगर लोगों तक उसे पहुंचाने के लिए उसे पुस्तक का स्वरूप देकर आम जन को समर्पित कर देता। उद्देश्य यही है कि भाव समाज तक पहुंच जाएं।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ रमेश अग्रवाल ने कहा कि गज़लों के लिए तकनीकी तथ्य "रदीफ़, काफिया, मीटर" जरूर बहुत महत्व रखते हैं, मगर उससे बढ़ कर जरूरी है "भाव, जज़्बात और खयाल"। यदि एक मजबूत पुख्ता दर्शन किसी रचनाकार के दिमाग में जन्म ही नहीं लेगा तो वो रदीफ़-काफिये में बांधेगा क्या?
डॉ कैलाशचंद्र शर्मा ने गज़ल कहने की अपनी शुरुआत और प्रेरणास्रोत का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे विज्ञान पढ़ कर लेक्चरार, प्रोफेसर व विश्विद्यालय के कुलपति तक का सफर तय किया। धर्मपत्नी मशहूर चिकित्सक रहीं स्वर्गीय डॉ रेणु शर्मा को याद करते हुए वे भावुक हुए। उन्होंने बताया कि जीवन संघर्षपूर्ण रहा और वहीं से गज़लों के ख़याल आये, मगर लेखन का समय सेवानिवृत्त होने के बाद ही मिला।
क्लब अध्यक्ष राजेंद्र गुंजल ने क्लब की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने डॉ कैलाशचंद्र शर्मा सहित मुख्य अतिथि शीन क़ाफ़ निज़ाम का जीवन परिचय दिया। मंचासीन सभी अतिथियों ने डॉ शर्मा के दोनों ग़ज़ल संग्रहों की "किताबी शक्ल" पर चढ़े आवरण को हटा कर गज़लों को "लोकार्पित" किया। इस मौके पर गुंजल ने सुनीता जैन के पति प्रभातचंद्र जैन को विशेष रूप से मंच पर आमंत्रित कर सभा को बताया कि इन गज़ल- संग्रहों के लिए ऐसे आयोजन की प्रेरणा के स्रोत जैन ही हैं।
सभी अतिथियों ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पुष्प अर्पण किये। पायल गुप्ता ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि शीन क़ाफ़ निज़ाम का माल्यार्पण क्लब अध्यक्ष राजेंद्र गुंजल ने किया और सुनीता जैन "रूपम" ने उन्हें शॉल ओढ़ाया। कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ.चंद्र प्रकाश देवल को क्लब महासचिव अरविंद मोहन शर्मा ने माला पहनाई व उपाध्यक्ष डॉ.जगदीश मूलचंदानी ने शॉल पहनाया; वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ रमेश अग्रवाल का माल्यार्पण कोषाध्क्ष सत्यनारायण जाला ने किया और शॉल पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह सनकत ने पहनाया।
मंच संचालन करते हुए अमित टंडन ने डॉ शर्मा के एक ग़ज़ल संग्रह "बर्ग-ओ-गुल" का परिचय दिया और बताया कि ग़ज़ल के करीब दो सौ वर्षों के सफर के दौरान आये बदलावों को अब 21वीं सदी के विद्वानों ने भी स्वीकार कर लिया है। बंदिशों में कुछ छूट मिलने से गज़लों में नए प्रयोग होने लगे हैं, जिसका लाभ लेते हुए डॉ. शर्मा ने भी कुछ नया आज़माया है। उन्होंने अपने रदीफ़-काफिये अंग्रेजी के शब्दों से मिला कर भी बातें कहीं हैं। वहीं वनस्पति विज्ञान के प्रोफेसर होने के नाते पुस्तक का शीर्षक भी बहुत सोच समझ कर "बॉटनिकल" सा रखा है।
एक अन्य पुस्तक "ज़हर आब-ए-हयात है" का परिचय पायल गुप्ता ने दिया और कुछ शेरों के हवाले से गज़लों के भाव बताए। दोनों ही पुस्तकों में से एक की सारगर्भित विस्तृत समीक्षा सुनीता जैन ने तथा दूसरी पुस्तक की भावपूर्ण समीक्षा शिक्षाविद एवं सरवाड़ कॉलेज में प्रिंसिपल डॉ शमा खान ने पढ़ी। इस मौके पर कार्यक्रम में सहयोग के लिए पायल गुप्ता "पहल" व शमा खान को स्मृति चिह्न प्रदान किया गया
क्लब के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह सनकत ने आभार ज्ञापन के दौरान अजयमेरु प्रेस क्लब में स्थापित एथिक्स-वैल्यू के बारे में श्रोताओं को विस्तार से बताया। साउंड सिस्टम का संचालन फरहाद सागर ने किया । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्ध नागिरक, शिक्षाविद, साहित्यकार व कला-प्रेमी उपस्थित थे।
अजयमेरु प्रेस क्लब सदैव प्रत्येक क्षेत्र से जुड़ी ख्यातनाम हस्तियों को उनका पूर्ण सम्मान देने को तत्पर रहता है।
क्लब के पूर्व अध्यक्ष प्रताप सिंह सनकत ने आभार ज्ञापन के दौरान अजयमेरु प्रेस क्लब में स्थापित एथिक्स-वैल्यू के बारे में श्रोताओं को विस्तार से बताया। साउंड सिस्टम का संचालन फरहाद सागर ने किया । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्ध नागिरक, शिक्षाविद, साहित्यकार व कला-प्रेमी उपस्थित थे।
अजयमेरु प्रेस क्लब सदैव प्रत्येक क्षेत्र से जुड़ी ख्यातनाम हस्तियों को उनका पूर्ण सम्मान देने को तत्पर रहता है।
इसके लिए क्लब का मान बढ़ाने के लिए उन हस्तियों को विशिष्ट सदस्यता प्रदान कर गौरवांवित महसूस करता है। इसी कड़ी में मशहूर शायर पद्मश्री शीन क़ाफ़ निज़ाम को क्लब के "मानद सदस्य" की उपाधि प्रदान कर उनका सम्मान किया गया। क्लब अध्यक्ष राजेंद्र गुंजल व महासचिव अरविंद मोहन शर्मा ने मानद सदस्यता की 'प्रतीक-शील्ड' प्रदान कर शीन क़ाफ़ निज़ाम को प्रेस क्लब परिवार का सदस्य बनाया।
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