राजस्थान महिला प्रकोष्ठ द्वारा अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 1897 का दीपावली मिलन समारोह
० आशा पटेल ०
जयपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 1897 (महिला प्रकोष्ठ, राजस्थान) की ओर से जयपुर में दीपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं इन्दु तोमर, राष्ट्रीय अध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ, ABKM 1897), प्रसिद्ध काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट तथा ‘सृजन’ संस्था की संस्थापक।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में दीपा नाथावत (राज्य सचिव, भाजपा महिला मोर्चा), मनीषा सिंह (मीडिया प्रभारी, भाजपा), तथा शोभल सिंह (संस्थापक, सूर्यदय फाउंडेशन एवं पूर्व अध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ – ABKM 1897) और एडवोकेट ओमनी राणा, राष्ट्रीय सचिव महिला प्रकोष्ठ उपस्थित रहीं।
सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका सरिता राठौर ने अपने संबोधन में दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन की आवश्यकता पर बल दिया। एडवोकेट ओमनी राणा ने कार्यक्रम की सफल आयोजन की बधाई देते हुए सभी को क्षत्रिय समाज की बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रसिद्ध कवयित्री सीमा राठौर ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति से कार्यक्रम को भावनात्मक और साहित्यिक स्पर्श दिया। कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज की युवा बालिकाओं ने तलवारबाज़ी का प्रदर्शन कर सबका मन मोह लिया। समारोह का संचालन राज्य उपाध्यक्ष रतन खंगारोट एवं राज्य सचिव सुशीला कंवर ने किया।
जयपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 1897 (महिला प्रकोष्ठ, राजस्थान) की ओर से जयपुर में दीपावली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं इन्दु तोमर, राष्ट्रीय अध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ, ABKM 1897), प्रसिद्ध काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट तथा ‘सृजन’ संस्था की संस्थापक।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में दीपा नाथावत (राज्य सचिव, भाजपा महिला मोर्चा), मनीषा सिंह (मीडिया प्रभारी, भाजपा), तथा शोभल सिंह (संस्थापक, सूर्यदय फाउंडेशन एवं पूर्व अध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ – ABKM 1897) और एडवोकेट ओमनी राणा, राष्ट्रीय सचिव महिला प्रकोष्ठ उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि इन्दु तोमर ने राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राजा मानवेन्द्र सिंह के आशीर्वाद वचनों को सभी तक पहुँचाहते हुए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 1897 के एजेंडा पॉइंट्स सभी के बीच रखे और कहा कि महिलाएँ समाज की संस्कृति और परंपराओं की वास्तविक संवाहक होती हैं। उन्होंने कहा “हमें अपने बच्चों को हमारी संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना चाहिए। उन्हें ऐतिहासिक स्थलों की सैर करानी चाहिए ताकि उनमें अपने समाज और राष्ट्र के प्रति गर्व की भावना जागृत हो।”
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को वास्तविक प्रेरणा अपने माता-पिता के आचरण से मिलती है। “बच्चों का सम्पूर्ण विकास तभी संभव है जब उन्हें परिवारिक वातावरण में संस्कार, स्नेह और संवाद के माध्यम से सीखने के अवसर मिलें। ऐसे बड़े त्यौहारों और परंपराओं का महत्व समझना और अनुभव करना उनके भावनात्मक व मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है,”
एक काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट के रूप में उन्होंने यह भी जोड़ा कि आधुनिक जीवनशैली में माता-पिता को ध्यान (मेडिटेशन) और आत्म-चिंतन जैसी सकारात्मक आदतें अपनाकर युवाओं को भी उसका उदाहरण देना चाहिए, ताकि वे सोशल मीडिया की नकारात्मकता से मुक्त होकर संतुलित, जागरूक और शांत जीवन जी सकें। दीपा नाथावत ने क्षत्रिय समाज में एकता के महत्व पर बल देते हुए कहा,“यदि समाज एकजुट रहेगा तो कोई भी हमारी ओर आंख उठाकर नहीं देख सकेगा।
मनीषा सिंह ने कहा कि आज की बेटियों को शिक्षित होने के साथ-साथ आत्मरक्षा के गुर भी सीखने चाहिए ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बन सकें। शोभल सिंह ने कहा कि महिलाएँ एक-दूसरे की शक्ति बन सकती हैं। उन्होंने कहा,“हमें एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए और समाज में सकारात्मकता और प्रोत्साहन का वातावरण बनाना चाहिए। राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष उर्वशी देव रावल ने क्षत्रिय समाज की महिलाओं से अपने “कम्फर्ट ज़ोन” से बाहर निकलने का आह्वान करते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए ताकि वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें।
सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका सरिता राठौर ने अपने संबोधन में दहेज जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन की आवश्यकता पर बल दिया। एडवोकेट ओमनी राणा ने कार्यक्रम की सफल आयोजन की बधाई देते हुए सभी को क्षत्रिय समाज की बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। प्रसिद्ध कवयित्री सीमा राठौर ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति से कार्यक्रम को भावनात्मक और साहित्यिक स्पर्श दिया। कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज की युवा बालिकाओं ने तलवारबाज़ी का प्रदर्शन कर सबका मन मोह लिया। समारोह का संचालन राज्य उपाध्यक्ष रतन खंगारोट एवं राज्य सचिव सुशीला कंवर ने किया।
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