नारायणा हॉस्पिटल ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाओं से बढ़ाया कैंसर देखभाल का दायरा
० आशा पटेल ०
जयपुर। नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर ने महिला रोगी का पहला सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने की घोषणा की। यह मरीजों के लिए उन्नत और जीवनरक्षक कैंसर उपचार को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ट्रांसप्लांट 56 वर्षीय महिला मरीज़ का किया गया, जो हाई-रिस्क मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित थीं । यह एक प्रकार का रक्त कैंसर है जो बोन मैरो में पाए जाने वाले प्लाज़्मा सेल्स को प्रभावित करता है।
इस अवसर पर डॉ. रोहित स्वामी (सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी), डॉ. प्रशांत कुम्भज (सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी), डॉ. तृप्ति बारोट (ब्लड ट्रांसफ्यूजन स्पेशलिस्ट), डॉ. प्रदीप कुमार गोयल, क्लिनिकल डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी - एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर, और बलविंदर सिंह वालिया, फैसिलिटी डायरेक्टर उपस्थित रहे। क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप कुमार गोयल ने कहा, “यह सफलता केवल चिकित्सा दृष्टि से ही नहीं, बल्कि हमारी टीम वर्क और क्रिटिकल केयर की उत्कृष्ट क्षमता का प्रमाण है।
फैसिलिटी डायरेक्टर बलविंदर सिंह वालिया ने कहा, “हमने विशेष आइसोलेशन रूम, स्टेम सेल लैब और प्रशिक्षित चिकित्सा टीमों में निवेश किया है ताकि मरीजों को विश्वस्तरीय कैंसर उपचार यहीं जयपुर में मिल सके। इससे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से राहत मिलेगी। नारायणा हॉस्पिटल अब अपने बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम को और विस्तार देने की दिशा में काम कर रहा है ।
जयपुर। नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर ने महिला रोगी का पहला सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने की घोषणा की। यह मरीजों के लिए उन्नत और जीवनरक्षक कैंसर उपचार को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ट्रांसप्लांट 56 वर्षीय महिला मरीज़ का किया गया, जो हाई-रिस्क मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित थीं । यह एक प्रकार का रक्त कैंसर है जो बोन मैरो में पाए जाने वाले प्लाज़्मा सेल्स को प्रभावित करता है।
पिछले एक वर्ष से विभिन्न उपचारों के बावजूद स्थिति नियंत्रित नहीं हो पा रही थी। नारायणा हॉस्पिटल में मरीज को टार्गेटेड थेरेपी देने के बाद ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें मरीज के अपने स्वस्थ स्टेम सेल्स का उपयोग किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में मरीज को तेजी से स्वास्थ्य में सुधर मिला और ट्रांसप्लांट के 20 दिन बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. प्रीति अग्रवाल, का कहना है,
“यह उपलब्धि कई वर्षों की तैयारी और निवेश का परिणाम है। ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसे रक्त कैंसर के मरीजों में रिकवरी और रिमिशन की दर को बेहतर बनाता है। चूंकि इसमें मरीज के अपने स्टेम सेल्स का उपयोग होता है, इसलिए जटिलताओं की संभावना कम होती है और इम्यून सिस्टम जल्दी मजबूत होता है।”
इस अवसर पर डॉ. रोहित स्वामी (सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी), डॉ. प्रशांत कुम्भज (सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल ऑन्कोलॉजी), डॉ. तृप्ति बारोट (ब्लड ट्रांसफ्यूजन स्पेशलिस्ट), डॉ. प्रदीप कुमार गोयल, क्लिनिकल डायरेक्टर, सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी - एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर, और बलविंदर सिंह वालिया, फैसिलिटी डायरेक्टर उपस्थित रहे। क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप कुमार गोयल ने कहा, “यह सफलता केवल चिकित्सा दृष्टि से ही नहीं, बल्कि हमारी टीम वर्क और क्रिटिकल केयर की उत्कृष्ट क्षमता का प्रमाण है।
फैसिलिटी डायरेक्टर बलविंदर सिंह वालिया ने कहा, “हमने विशेष आइसोलेशन रूम, स्टेम सेल लैब और प्रशिक्षित चिकित्सा टीमों में निवेश किया है ताकि मरीजों को विश्वस्तरीय कैंसर उपचार यहीं जयपुर में मिल सके। इससे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से राहत मिलेगी। नारायणा हॉस्पिटल अब अपने बोन मैरो ट्रांसप्लांट कार्यक्रम को और विस्तार देने की दिशा में काम कर रहा है ।
टिप्पणियाँ