मै तो लीनो गोविन्दो मोल ......सुमन की गायकी ने किया मंत्रमुग्ध
० संवाददाता द्वारा ०
जयपुर : सोल कनेक्ट सीरीज़ के तहत मंदिर श्री माधो बिहारी में प्रातः राग सेवा सभा आयोजित की गयी जिसका संयोजन विख्यात लोक कला मर्मज्ञ विनोद जोशी द्वारा किया गया | प्रोफेसर सुमन यादव ने भक्तिरस की इस कड़ी में मीरा बाई के कुछ मशहूर भजन श्री माधो बिहारी के चरणों में अपनी सधी हुई एवं मख़मली आवाज में पिरोकर बखूबी पेश किया | कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने दादू दयाल के प्रसिद्ध भजन 'राम रस मीठा रे' को अपने बेहद पुरकशिश अंदाज़ में गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करके की |
जयपुर : सोल कनेक्ट सीरीज़ के तहत मंदिर श्री माधो बिहारी में प्रातः राग सेवा सभा आयोजित की गयी जिसका संयोजन विख्यात लोक कला मर्मज्ञ विनोद जोशी द्वारा किया गया | प्रोफेसर सुमन यादव ने भक्तिरस की इस कड़ी में मीरा बाई के कुछ मशहूर भजन श्री माधो बिहारी के चरणों में अपनी सधी हुई एवं मख़मली आवाज में पिरोकर बखूबी पेश किया | कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने दादू दयाल के प्रसिद्ध भजन 'राम रस मीठा रे' को अपने बेहद पुरकशिश अंदाज़ में गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करके की |
विभिन्न रागों - जोग, भैरव, पीलू, पूरियाँ धनाशरी, मॉंड, पहाड़ी, तिलंग आदि रागों में निबद्ध चन्द्रसखी और मीरा बाई इत्यादि की एक से बढ़कर एक भक्ति रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को बॉंध लिया । इस भावपूर्ण और प्रभावशाली गायकी में 'मथुरा में हरी जनम लियो', 'चाकर राखो जी', 'म्हारा जूना जोशी', 'तेरो कोई नहीं रोकणहार', 'पायो जी मैंने राम रतन धन पायो' आदि भजन शामिल हैं |
कार्यक्रम के अंत में मीरा बाई का सुप्रसिद्ध भजन 'मै तो लीनो गोविन्दो मोल' को गाकर सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया और साथ में एक संकीर्तन भी किया, जिसमे सभी श्रोताओं ने तन्मय होकर सहभागिता की और ऐसा प्रतीत हुआ मानो सकल नाद ब्रह्म अपने विराट रूप में साकार हो उठा हो | सुमन यादव ने इस भजन कार्यक्रम में अनूठे प्रयोग भी किये जिससे सभी श्रोता भाव विभोर हो उठे |
उन्होंने श्लोक, भजन, कजरी, मांड एवं संकीर्तन सभी को सहजता से सम्मिलित करते हुए, भजन गायकी को एक नया आयाम दिया जिससे यह कार्यक्रम एक नए अंदाज़ में पेश हो सका | इनके साथ सह गान यशवर्धन सिंह यादव ने किया | हारमोनियम हबीब खान, तबले पर फ़तेह वारसी
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