मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, के उन्नीसवें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री ने दी डिग्रियां
जयपुर । एमएनआईटी जयपुर परिसर स्थित ओएटी ग्राउंड में दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया।राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने दीक्षांत संबोधन दिया। प्रो. नारायण प्रसाद पाढ़ी, निदेशक, एमएनआईटी जयपुर ने संस्थान की अकादमिक गतिविधियों और उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस दीक्षांत समारोह में सत्र 2024-25 के छात्रों को बी.टेक., बी.आर्क., एम.टेक., एम.प्लान., एम.बी.ए., एम.एससी. और पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्रदान की गईं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्थान सरकार ने लगभग 91,000 सरकारी नियुक्तियाँ पूरी कर ली हैं, जबकि लगभग 1,54,000 पदों को भरने की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में चल रही है। उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान ₹35 लाख करोड़ के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिनमें से ₹7 लाख करोड़ के समझौतों पर कार्य आरंभ हो चुका है, जिससे निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।
एमएनआईटी जयपुर की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस संस्थान ने नवाचार, उद्यमिता और विश्वस्तरीय अनुसंधान के माध्यम से राजस्थान की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है और यह आवश्यक है कि भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक भी बने। प्रो. एन. पी. पाढ़ी, निदेशक, एमएनआईटी जयपुर ने उपस्थित जनों को संस्थान की उत्कृष्ट उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एमएनआईटी जयपुर ने इस वर्ष एनआईआरएफ रैंकिंग में सुधार करते हुए उत्तर भारत का नंबर एक एनआईटी बनने का गौरव प्राप्त किया है।
इस वर्ष एमएनआईटी जयपुर के शिक्षकों को कुल 32 शोध परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं जिनकी कुल राशि लगभग ₹21 करोड़ है। इसके अतिरिक्त शिक्षकों ने ₹13.67 करोड़ मूल्य की 249 परामर्श परियोजनाएँ पूरी कीं और 13 पेटेंट प्राप्त किए। प्रोफेसर पाढ़ी ने अपने संबोधन में कहा कि एमएनआईटी जयपुर में छात्रों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है और उनके मानसिक एवं शारीरिक कल्याण के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संस्थान में वेलनेस कैंप, परामर्श सत्र और छात्र-शिक्षक संवाद आयोजित किए जाते हैं ताकि छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि उपाधि प्राप्त करना जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है, जिसे समाज की सेवा और मानवता के कल्याण को समर्पित करना चाहिए। वर्ष 2024-25 में कुल 769 बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी, 59 बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर, 228 मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी और 16 मास्टर ऑफ प्लानिंग की उपाधियाँ प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त 105 छात्रों को भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित में एम.एससी. की डिग्रियाँ और 55 छात्रों को एम.बी.ए. की उपाधियाँ दी गईं।
मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर के 19वें दीक्षांत समारोह में पहली बार संस्थान के इतिहास में मुख्य अतिथि भजनलाल शर्मा और निदेशक प्रो. एन.पी. पाधी द्वारा राजभाषा हिन्दी में एक तकनीकी पत्रिका का शुभारंभ किया गया। इस पत्रिका में संस्थान में किए जा रहे नवीनतम अनुसंधान और नवाचार से संबंधित जानकारी सम्मिलित होगी, जो न केवल संस्थान के लिए बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए भी एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।
सत्र 2024-25 के बी.टेक., बी.आर्क., एम.टेक., एम.प्लान., एम.बी.ए. और एम.एससी. पाठ्यक्रमों के 20 सर्वोच्च विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। सत्र 2024-25 के आठ स्नातक और ग्यारह स्नातकोत्तर छात्रों को अपने-अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक दिए गए। निदेशक का उत्कृष्ट स्वर्ण पदक पुरस्कार मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय के बी.टेक. छात्र श्री विदित अवस्थी को शैक्षणिक उत्कृष्टता, सह-पाठ्यक्रमिक गतिविधियों और खेल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किया गया।
इस वर्ष स्नातक स्तर पर दिए गए आधे स्वर्ण पदक छात्राओं ने प्राप्त किए, जो उनके उल्लेखनीय शैक्षणिक प्रदर्शन का प्रतीक है। एमएनआईटी के इतिहास में पहली बार 77 अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने विभिन्न कार्यक्रमों में नामांकन कराया है, जो संस्थान की बढ़ती वैश्विक उपस्थिति और शैक्षणिक प्रतिष्ठा को दर्शाता है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने एमएनआईटी जयपुर के 19वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। उन्होंने एमएनआईटी की भूमिका को शैक्षणिक उत्कृष्टता और नवाचार का केंद्र बताते हुए कहा कि यह संस्थान ऐसे स्नातक तैयार कर रहा है
जो राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने के लिए तत्पर हैं। प्रधान ने कहा कि “एमएनआईटी जयपुर जैसी संस्थाएँ परिवर्तन की मौन प्रेरक शक्ति हैं, जो प्रतिभा का संवर्धन करती हैं, नवाचार को प्रोत्साहित करती हैं और आत्मनिर्भर भारत के चरित्र का निर्माण करती हैं,” यह सब माननी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में संभव हो रहा है। उन्होंने स्नातक छात्रों की जिम्मेदारी पर बल देते हुए कहा, “सन 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब यही पीढ़ी यह तय करेगी कि हमारे लिए ‘विकसित भारत’ का वास्तविक अर्थ क्या होगा।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे “स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और सेवा” की भावना को अपनाएँ और अपने जीवन की दिशा “ज्ञान, साहस और करुणा” से निर्धारित करें। कहा कि “युवा शक्ति ही विकसित भारत की प्रेरक शक्ति है,” और भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री शर्मा मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर के 19वें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि थे, कहा कि यह उत्तर भारत का नंबर एक एनआईटी है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि इस समारोह में 150 से अधिक छात्रों को पीएच.डी. की उपाधि प्रदान की गई,
30 से अधिक दिव्यांग छात्रों ने अपनी डिग्रियाँ प्राप्त कीं और 77 अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने संस्थान के विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में प्रवेश लिया। देश के सभी एनआईटी में एमएनआईटी जयपुर का छात्र-छात्रा अनुपात सर्वाधिक है, जो महिला सशक्तिकरण के प्रति इसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। संस्थान ने नई शिक्षा नीति 2020 को अपने पाठ्यक्रम में लागू किया है, जिससे छात्रों को नीति के दृष्टिकोण के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि एमएनआईटी के छात्र देश के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाशाली युवाओं में से हैं और वे ऐसे समय में आगे बढ़ रहे हैं जब भारत नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अब तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले दशकों में जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष मनाएगा और विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में सम्मिलित होगा,
तब देश की युवा शक्ति, कौशल और तकनीकी क्षमताएँ नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेंगी। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन के केंद्र में एमएनआईटी जयपुर जैसे संस्थान और यहाँ के छात्र रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य के हथियार तलवार और ढाल नहीं होंगे, बल्कि सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, नवीकरणीय ऊर्जा और सृजनात्मक उद्यमिता होंगे। उन्होंने राजस्थान सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्टार्टअप नीति ने युवाओं में नवाचार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाए हैं।
उन्होंने कहा कि एवीजीसी-एक्सआर नीति को इस क्षेत्र में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय के छात्रों में उद्यमिता और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए आई-स्टार्ट कार्यक्रम का विस्तार किया गया है, जिसके अंतर्गत 66 आई-स्टार्ट लॉन्चपैड नेस्ट स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान स्टार्टअप कार्यक्रम के तहत वर्ष 2024-25 में कुल 2028 स्टार्टअप पंजीकृत हुए और सरकार ने आई-स्टार्ट फंड से लगभग 11 करोड़ रुपये की राशि 300 स्टार्टअप को प्रदान की।
“लर्न, अर्न एंड प्रोग्रेस (लीप)” कार्यक्रम के अंतर्गत स्टार्टअप्स को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही “अर्ली करियर प्रोग्राम (टेकबी)” के माध्यम से 12वीं कक्षा के तुरंत बाद राज्य के युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरआईपीएस 2024 के अंतर्गत आईटी और आईटीईएस परियोजनाओं को परिसंपत्ति सृजन प्रोत्साहन के तीन विकल्प दिए गए हैं — सात वर्षों तक एसजीएसटी का 75 प्रतिशत पुनर्भुगतान, 20 प्रतिशत पूंजी अनुदान, या 1.4 प्रतिशत टर्नओवर आधारित प्रोत्साहन, जिनमें से किसी एक विकल्प का चयन किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्थान सरकार ने लगभग 91,000 सरकारी नियुक्तियाँ पूरी कर ली हैं, जबकि लगभग 1,54,000 पदों को भरने की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में चल रही है। उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान ₹35 लाख करोड़ के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिनमें से ₹7 लाख करोड़ के समझौतों पर कार्य आरंभ हो चुका है, जिससे निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।
एमएनआईटी जयपुर की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस संस्थान ने नवाचार, उद्यमिता और विश्वस्तरीय अनुसंधान के माध्यम से राजस्थान की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है और यह आवश्यक है कि भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक भी बने। प्रो. एन. पी. पाढ़ी, निदेशक, एमएनआईटी जयपुर ने उपस्थित जनों को संस्थान की उत्कृष्ट उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एमएनआईटी जयपुर ने इस वर्ष एनआईआरएफ रैंकिंग में सुधार करते हुए उत्तर भारत का नंबर एक एनआईटी बनने का गौरव प्राप्त किया है।
संस्थान ने इस वर्ष पहली बार एनआईआरएफ अनुसंधान संस्थानों की श्रेणी में भाग लिया और सभी एनआईटी में तीसरा तथा देश के सभी इंजीनियरिंग संस्थानों में 42वाँ स्थान प्राप्त किया। प्रो. पाढ़ी ने बताया कि जुलाई 2025 में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने संस्थान परिसर में 320-बिस्तर वाले चंद्रशेखर छात्रावास का उद्घाटन किया और एमएनआईटी जयपुर ने 600-बिस्तर वाले नीलांचल छात्रावास का निर्माण कार्य आरंभ किया है, जिसमें दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सुविधाएँ होंगी।
शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के दौरान 240 से अधिक कंपनियाँ एमएनआईटी आईं और स्नातक तथा परास्नातक छात्रों को कुल 852 नियुक्तियाँ प्रदान कीं। स्नातक छात्रों के लिए अधिकतम पैकेज ₹64.00 लाख प्रतिवर्ष और परास्नातक छात्रों के लिए ₹46.38 लाख प्रतिवर्ष रहा। उल्लेखनीय है कि 132 छात्रों को प्री-प्लेसमेंट ऑफर (पीपीओ) प्राप्त हुए। स्नातक छात्रों का औसत पैकेज ₹12.43 लाख प्रतिवर्ष और परास्नातक छात्रों का ₹10.11 लाख प्रतिवर्ष रहा।
प्रमुख भर्तीकर्ताओं में एडोबी, अमेज़ॉन, एप्पल, आर्सेसियम, बीईएल, बीपीसीएल, डेलॉयट, डी.ई. शॉ, डॉयचे बैंक, एक्सपीडिया, गोल्डमैन सैक्स, हीरो मोटो कॉर्प, एचपीसीएल, और जे.पी. मॉर्गन जैसे नाम शामिल रहे। सबसे संतोषजनक बात यह रही कि कोर सेक्टर और शाखाओं में नौकरी के अवसरों में वृद्धि हुई है, जिससे एनआईटी की भूमिका और सिद्धांत की पुष्टि होती है। एमएनआईटी के छात्रों ने गेट 2025 में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र मानवेंद्र सिंह ने अखिल भारतीय रैंक 2 प्राप्त की, जबकि अमितोज सिंह छाबड़ा ने अखिल भारतीय रैंक 21 प्राप्त की।
इस वर्ष एमएनआईटी जयपुर के शिक्षकों को कुल 32 शोध परियोजनाएँ स्वीकृत हुईं जिनकी कुल राशि लगभग ₹21 करोड़ है। इसके अतिरिक्त शिक्षकों ने ₹13.67 करोड़ मूल्य की 249 परामर्श परियोजनाएँ पूरी कीं और 13 पेटेंट प्राप्त किए। प्रोफेसर पाढ़ी ने अपने संबोधन में कहा कि एमएनआईटी जयपुर में छात्रों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है और उनके मानसिक एवं शारीरिक कल्याण के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संस्थान में वेलनेस कैंप, परामर्श सत्र और छात्र-शिक्षक संवाद आयोजित किए जाते हैं ताकि छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि उपाधि प्राप्त करना जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है, जिसे समाज की सेवा और मानवता के कल्याण को समर्पित करना चाहिए। वर्ष 2024-25 में कुल 769 बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी, 59 बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर, 228 मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी और 16 मास्टर ऑफ प्लानिंग की उपाधियाँ प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त 105 छात्रों को भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित में एम.एससी. की डिग्रियाँ और 55 छात्रों को एम.बी.ए. की उपाधियाँ दी गईं।
रिकॉर्ड संख्या में 154 शोधार्थियों को पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्रदान की गईं। कुल मिलाकर संस्थान ने 1385 उपाधियाँ प्रदान कीं जिनमें 828 स्नातक, 404 परास्नातक और 154 डॉक्टरेट डिग्रियाँ सम्मिलित हैं। कुल उपाधि प्राप्तकर्ताओं में 27 प्रतिशत छात्राएँ थीं, जो लैंगिक समावेशी शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एमएनआईटी जयपुर ने निरंतर प्रगति करते हुए अनेक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं और यह देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है। अत्याधुनिक शिक्षा और व्यापक प्रशिक्षण के माध्यम से यह संस्थान दक्ष अभियंता, वैज्ञानिक और पेशेवर तैयार कर रहा है जो राष्ट्र के भावी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर के 19वें दीक्षांत समारोह में पहली बार संस्थान के इतिहास में मुख्य अतिथि भजनलाल शर्मा और निदेशक प्रो. एन.पी. पाधी द्वारा राजभाषा हिन्दी में एक तकनीकी पत्रिका का शुभारंभ किया गया। इस पत्रिका में संस्थान में किए जा रहे नवीनतम अनुसंधान और नवाचार से संबंधित जानकारी सम्मिलित होगी, जो न केवल संस्थान के लिए बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए भी एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।
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