NFYM ने सीजेआई गवई पर हमले की निंदा की, कहा यह संविधान और लोकतंत्र पर हमला
० आशा पटेल ०
नई दिल्ली | नेशनल फेडरेशन ऑफ यूथ मूवमेंट (NFYM) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति गवई पर हुए हालिया हमले की कड़ी निंदा की है। NFYM के अध्यक्ष मसीहुज़्ज़मा अंसारी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि संविधान, न्यायपालिका और भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा आघात है।
उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि कुछ दक्षिणपंथी मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और संबद्ध संगठन इस घटना का जश्न मना रहे हैं और आरोपी वकील का बचाव कर रहे हैं। यह आचरण न केवल न्यायिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और विधि के शासन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। एनएफवाईएम इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेता है और मांग करता है कि संबंधित विभाग उन सभी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करें जो इस प्रकार की हिंसक घटनाओं का मज़ाक उड़ाने, औचित्य साबित करने या उकसाने का प्रयास कर रहे हैं।
NFYM न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, और जन एवं मीडिया विमर्श में जिम्मेदार आचरण को बढ़ावा देने के अपने संकल्प के प्रति प्रतिबद्ध है। ऐसी घटनाओं पर संज्ञान लेने से भविष्य में व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा इस प्रकार के आचरण की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
नई दिल्ली | नेशनल फेडरेशन ऑफ यूथ मूवमेंट (NFYM) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति गवई पर हुए हालिया हमले की कड़ी निंदा की है। NFYM के अध्यक्ष मसीहुज़्ज़मा अंसारी ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल किसी व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि संविधान, न्यायपालिका और भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा आघात है।
उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि कुछ दक्षिणपंथी मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और संबद्ध संगठन इस घटना का जश्न मना रहे हैं और आरोपी वकील का बचाव कर रहे हैं। यह आचरण न केवल न्यायिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और विधि के शासन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करता है। एनएफवाईएम इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेता है और मांग करता है कि संबंधित विभाग उन सभी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करें जो इस प्रकार की हिंसक घटनाओं का मज़ाक उड़ाने, औचित्य साबित करने या उकसाने का प्रयास कर रहे हैं।
साथ ही NFYM, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और अन्य मीडिया नियामक निकायों से आग्रह करता है कि वे उन समाचार एजेंसियों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करें जो लगातार आरोपी वकील के साक्षात्कार प्रसारित कर रहे हैं, जो मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर उनकी छवि धूमिल कर रहे हैं। इस प्रकार की सामग्री का प्रसारण न केवल पत्रकारीय नैतिकता का उल्लंघन है, बल्कि यह न्यायपालिका के प्रति जनविश्वास को भी कमजोर करता है।
NFYM न्यायपालिका की गरिमा की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, और जन एवं मीडिया विमर्श में जिम्मेदार आचरण को बढ़ावा देने के अपने संकल्प के प्रति प्रतिबद्ध है। ऐसी घटनाओं पर संज्ञान लेने से भविष्य में व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा इस प्रकार के आचरण की पुनरावृत्ति नहीं होगी।
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