ईपीसीएच द्वारा गिफ्ट्स एंड लाइफस्टाइल मिडिल ईस्ट 2025, यूएई में हस्तशिल्प पर आयोजन

० आशा पटेल ० 
नई दिल्ली | दुबई में आयोजित गिफ्ट्स एंड लाइफस्टाइल मिडिल ईस्ट 2025, ईपीसीएच ने “भारत – हस्तशिल्प के लिए एक लाभदायक सोर्सिंग गंतव्य” विषय पर एक इंटरैक्टिव का आयोजन किया। इसका उद्देश्य वैश्विक खरीदारों, सोर्सिंग पेशेवरों और भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों को एक साथ लाकर नए व्यावसायिक अवसरों की खोज करना, उभरते बाजार रुझानों पर चर्चा करना और वैश्विक हस्तशिल्प मूल्य श्रृंखला में एक पसंदीदा और विश्वसनीय सोर्सिंग भागीदार के रूप में भारत की बढ़ती स्थिति को उजागर करना था।
 ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ.नीरज खन्ना और ईपीसीएच के मुख्य संयोजक अवधेश अग्रवाल ने भाग लेने वाले अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों और व्यापार आगंतुकों के साथ बातचीत की। ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने भारत के हस्तशिल्प क्षेत्र की खूबियों के बारे में जानकारी साझा की, जो पारंपरिक शिल्प कौशल पर आधारित है और आधुनिक बाजार की माँगों के अनुरूप ढल रहा है। वैश्विक हस्तशिल्प क्षेत्र में भारत की उभरती पहचान पर जोर दिया, 
जिसका उद्देश्य इसकी छवि को “भारत - आपूर्तिकर्ता” से “भारत - निर्माता” में बदलना है। उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी हस्तशिल्प प्रदर्शनियों में से एक आईएचजीएफ दिल्ली मेला जो वैश्विक आयातकों, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला की खोज के लिए एक सोर्सिंग प्लेटफ़ॉर्म है के आगामी आईएचजीएफ दिल्ली मेला स्प्रिंग 2026, जो 14 से 18 फ़रवरी 2026 दिल्ली में आयोजित होगा, सभी व्यापारिक आगंतुकों को विशेष निमंत्रण दिया।

ईपीसीएच के मुख्य संयोजक अवधेश अग्रवाल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारतीय कारीगरों में रचनात्मकता और कार्यक्षमता का अद्भुत मिश्रण है, जिससे भारतीय शिल्प वैश्विक बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के इंटरैक्टिव सत्र निर्यातकों को खरीदारों की प्राथमिकताओं को समझने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अनुकूलित समाधान प्रदान करने में मदद करते हैं।

सत्र उभरते डिज़ाइन रुझानों, टिकाऊ उत्पादन प्रथाओं और हस्तशिल्प उद्योग के भविष्य के विकास को गति देने में सहयोग की भूमिका पर एक आकर्षक चर्चा के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने भारतीय निर्यातकों और वैश्विक खरीदारों के बीच सार्थक बातचीत और व्यापार संबंधों को सुगम बनाने वाले एक मंच के निर्माण में ईपीसीएच के प्रयासों की सराहना की।

हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों और सेवाओं के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में विदेशों में भारत की छवि और होम,लाइफस्टाइल,टेक्स्टाइल,फर्नीचर और फैशन जूलरी ऐंड एक्सेसरीज प्रॉडक्ट के उत्पादन में लगे क्राफ्ट क्लस्टर के लाखों कारीगरों और शिल्पकारों के प्रतिभाशाली हाथों के जादू की ब्रांड इमेज बनाने के लिए जिम्मेदार एक नोडल संस्थान है।

 इस अवसर पर ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आर के वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,123 करोड़ रुपये (3,918 मिलियन डॉलर) रहा। वहीं यूएई को वित्तीय वर्ष 2024-45 के दौरान में होने हस्तशिल्प का कुल निर्यात 2544.92 करोड़ (300.90 मिलियन डॉलर) रुपए रहा। इस अवधि में रुपए के हिसाब से 24 प्रतिशत वृद्धि और डॉलर के हिसाब से 18 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गयी।

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