आठवीं अनुसूची में हो भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर जंतर मंतर पर किया धरना प्रदर्शन

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : देशभर से आए सैकड़ों हो समुदाय के सदस्यों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमेटी (AIHLAC) के बैनर तले धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।
इस धरना में झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से आए करीब 500 लोगों ने भाग लिया। छात्रों, बुद्धिजीवियों और समुदाय के नेताओं ने “हो लैंग्वेज हमारा अधिकार है”, “हमारा डिमांड लेंगल डिमांड”, “हो लैंग्वेज इन्क्लूड करो” और “सेंट्रल सरकार हाय हाय” जैसे नारे लगाकर अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराया।
संविधान की आठवीं अनुसूची में हो भाषा को शामिल किया जाए और हो भाषा बोलने वाले समुदाय की समृद्ध भाषाई, साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण व संवर्धन के लिए इसे संवैधानिक दर्जा दिया जाए। पृष्ठभूमि: हो भाषा, जो ऑस्ट्रोएशियाटिक मुंडा भाषा परिवार से संबंधित है, पूरे भारत में 40 लाख से अधिक लोगों की मातृभाषा है। इसके अलावा लगभग 10 लाख गैर-आदिवासी लोग भी इसे दैनिक जीवन में प्रयोग करते हैं। हालांकि यह भाषा 1961 से भारत की जनगणना में सूचीबद्ध है, फिर भी अब तक इसे संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं हुई है।
ओडिशा और झारखंड सरकारों ने पहले ही हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की औपचारिक सिफारिश की है। इसके साथ ही प्रख्यात विद्वान सिताकांत महापात्र और प्रो. (डा.) ए. बी. ओटा की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समितियों ने भी इसके पक्ष में अपनी सकारात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। संसद में भी कई सांसदों ने बार-बार यह मुद्दा उठाया है और केंद्र सरकार से इस लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने का आग्रह किया है।
ऑल इंडिया हो लैंग्वेज एक्शन कमेटी ने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री से आग्रह किया है कि वे तत्काल कदम उठाकर हो भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करें। प्रदर्शन में बोलते हुए AIHLAC के प्रतिनिधियों ने कहा, “यह केवल एक भाषा का मुद्दा नहीं है, बल्कि हमारी पहचान, गर्व और न्याय से जुड़ा हुआ प्रश्न है। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हम देशभर में अपना आंदोलन और तेज करेंगे।

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