रूवा स्वर्ण जयंती पर हुई अंतर-महाविद्यालय स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता
० आशा पटेल ०
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय महिला संघ (रूवा), जयपुर ने अपने स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में “अंतर-महाविद्यालय स्वरचित हिन्दी कविता पाठ प्रतियोगिता “ का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता में 10 महाविद्यालयों से लगभग 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया और अपनी कविताओं के माध्यम से समाज, संवेदना तथा सृजनशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। रूवा की अध्यक्ष प्रो. अमला बत्रा ने स्वागत भाषण देते हुए रूवा की स्वर्णिम यात्रा का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया।
निर्णायकों द्वारा मूल्यांकन के पश्चात प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा 10 सांत्वना पुरस्कार घोषित किए गए।
विजेताओं को मुख्य अतिथि एवं रूवा पदाधिकारियों द्वारा प्रमाणपत्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। रूवा अध्यक्ष प्रो. अमला बत्रा ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की सृजनात्मकता को निखारते हैं और साहित्य, कला एवं समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता जगाते हैं। अन्त में कार्यक्रम की कनवीनर और रूवा मैग्जीन एडिटर नीलिमा टिक्कू ने कहा कि यह आयोजन न केवल साहित्यिक प्रतिभा का मंच बना, बल्कि नारी सशक्तिकरण, सामाजिक चेतना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रेरक उदाहरण भी सिद्ध हुआ।
जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय महिला संघ (रूवा), जयपुर ने अपने स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में “अंतर-महाविद्यालय स्वरचित हिन्दी कविता पाठ प्रतियोगिता “ का आयोजन किया। इस प्रतियोगिता में 10 महाविद्यालयों से लगभग 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया और अपनी कविताओं के माध्यम से समाज, संवेदना तथा सृजनशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। रूवा की अध्यक्ष प्रो. अमला बत्रा ने स्वागत भाषण देते हुए रूवा की स्वर्णिम यात्रा का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया।
मुख्य अतिथि के रूप में रेशमा ख़ान उपस्थित रहीं, जबकि निर्णायक मंडल में आभा सिंह, डॉ.सुशीला शील एवं रिया मनोज शामिल थीं। पूर्व अध्यक्ष प्रो. शशिलता पुरी ने रूवा के पचास वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए महिला शिक्षा, संस्कृति और सशक्तिकरण में संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रतिभागियों ने अपनी स्वरचित कविताओं में बाल श्रम, कॉलेज जीवन, ऑपरेशन सिंदूर, प्रेम, मानवीय संबंधों, नारी की शक्ति और संघर्ष, ‘हार नहीं मानूँगी’, ‘मैं गलत राह पर क्यों मुड़ा’, तथा ‘कलम को अपना श्रृंगार बनाना’ जैसे विषयों को सशक्त शब्दों में अभिव्यक्त किया।
मुख्य अतिथि रेशमा ख़ान ने प्रतिभागियों की सृजनशीलता और अभिव्यक्ति की सराहना करते हुए कहा कि युवा विद्यार्थियों की कविताएँ आज की पीढ़ी की सोच, संघर्ष और संवेदनशीलता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि “बाल श्रम की वेदना, कॉलेज जीवन की उमंगें, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का साहस, और नारी की आत्मशक्ति सब कुछ इन कविताओं में जीवंत रूप से झलका।
निर्णायकों द्वारा मूल्यांकन के पश्चात प्रथम, द्वितीय, तृतीय तथा 10 सांत्वना पुरस्कार घोषित किए गए।
विजेताओं को मुख्य अतिथि एवं रूवा पदाधिकारियों द्वारा प्रमाणपत्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। रूवा अध्यक्ष प्रो. अमला बत्रा ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की सृजनात्मकता को निखारते हैं और साहित्य, कला एवं समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता जगाते हैं। अन्त में कार्यक्रम की कनवीनर और रूवा मैग्जीन एडिटर नीलिमा टिक्कू ने कहा कि यह आयोजन न केवल साहित्यिक प्रतिभा का मंच बना, बल्कि नारी सशक्तिकरण, सामाजिक चेतना और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रेरक उदाहरण भी सिद्ध हुआ।
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