केवीआईसी ने आरआईसी में की खादी और ग्रामोद्योग में कार्यशाला

० आशा पटेल ० 
 जयपुर | केवीआईसी अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि “प्रधानमंत्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को सशक्त करने की दिशा में यह कार्यशाला एक ठोस कदम है।”
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में “खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र में लागत एवं गुणवत्ता प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि” विषय पर हितधारकों से चर्चा-परिचर्चा हेतु एक कार्यशाला का आयोजन किया था ।
इस कार्यशाला की अध्यक्षता केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने की। कार्यक्रम में केवीआईसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री रूपराशि, वरिष्ठ अधिकारियों सहित प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, डिजाइन संस्थानों, खादी संगठनों और उद्यमियों के प्रतिनिधियों तथा कारीगरों ने भाग लिया। अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि यह कार्यशाला प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
इस विचार-विमर्श से नीति निर्माण, प्रशिक्षण, परीक्षण अवसंरचना और ब्रांड प्रमोशन की भविष्य की रणनीतियों में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज खादी का हर ताना-बाना राष्ट्रनिर्माण की भावना का नेतृत्व में संवाहक है। यह वह धागा है जो बापू के स्वप्न के संकल्प को जोड़ता है। खादी अब केवल एक परिधान नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा बन चुकी है। केवीआईसी अध्यक्ष ने कहा कि यह कार्यशाला गुणवत्ता ,डिजाइन , लागत प्रतिस्पर्धात्मकता ,मार्केटिंग और नीति निर्माण जैसे विषयों पर उपयोगी विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच है।
कार्यशाला के चार तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने क्रमशः गुणवत्ता और डिजाइन मानकों , लागत प्रतिस्पर्धात्मकता एवं वित्तीय सहयोग , मार्केटिंग,ब्रांडिंग और निर्यात, संवर्धन तथा नीतिगत ढांचे और मानकीकरण जैसे विषयों पर चर्चा की। कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने ऐतिहासिक प्रगति की है। वर्ष 2013-14 में खादी का उत्पादन जहां करीब 27,000 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 1,16,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

 इसी अवधि में बिक्री लगभग 33,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,70,000 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची है। इस दौरान लगभग दो करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से 10 लाख से अधिक इकाइयों की स्थापना हुई है, जिनसे लगभग 90 लाख लोगों को रोजगार का अवसर मिला है। ग्रामोद्योग विकास योजना के तहत करीब तीन लाख मशीनें और टूलकिट वितरित किए गए हैं तथा खादी कारीगरों के पारिश्रमिक में लगभग चार गुना वृद्धि की गई है।

इस कार्यक्रम में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर खादी (सीओईके), राजस्थान विवि, बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-मेसरा, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रॉफ्ट एंड डिजाइन, मनिपाल विवि जयपुर, एमएनआईटी, एमिटी, आईआईएस, महर्षि अरविंद विवि, विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, हरदेव जोशी यूनिवर्सिटी ऑफ जर्नलिज्म, विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी, पोद्दार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों ने कार्यशाला में भाग लेकर पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर अपने विचार साझा किए।

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