भारत का पहला दिव्यांगजन रोजगार टूलकिट मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में,गोदरेज और एटिपिकल एडवांटेज ने जारी किया

० संवाददाता द्वारा ० 
मुंबई : गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने दिव्यांगजन आजीविका प्लेटफॉर्म एटिपिकल एडवांटेज के साथ मिलकर मुंबई में एम्प्लॉयएबिलिटी इन मैन्युफैक्चरिंग समिट 2025 का आयोजन किया। यह देश का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है। भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में दिव्यांगजन की भागीदारी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस शिखर सम्मेलन में उद्योग जगत के शीर्ष नेताओं, नीति-निर्माताओं और समावेश के प्रबल समर्थकों ने हिस्सा लिया।

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 3 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं, फिर भी समावेशन की भारी कमी बनी हुई है। निजी क्षेत्र में दिव्यांग जन (PwD) की कार्यबल भागीदारी मात्र 36 प्रतिशत है, जबकि गैर-दिव्यांग व्यक्तियों के लिए यह लगभग 60 प्रतिशत है। ऐसे में समिट का लक्ष्य यह था कि चर्चा “समावेशन क्यों जरूरी है” से आगे बढ़कर “कंपनियां इसे व्यावहारिक रूप से कैसे लागू कर सकती हैं” पर केंद्रित हो।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘वर्क दैट इंक्लूड्स’- भारत का पहला एम्प्लॉयबिलिटी टूलकिट था, जिसे मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में दिव्यांग समावेशन को व्यवहारिक रूप से लागू करने के लिए तैयार किया गया है। इसे आईएएस अधिकारी और दिव्यांगजन अधिकारों की राष्ट्रीय प्रतीक इरा सिंघल तथा विभिन्न उद्योग विशेषज्ञों की उपस्थिति में लॉन्च किया गया। यह टूलकिट जॉब मैपिंग, एक्सेसिबिलिटी चेकलिस्ट, वर्कफ़्लो री-डिज़ाइन, भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) शब्दावली और वास्तविक केस स्टडीज़ जैसी चरणबद्ध मार्गदर्शन प्रदान करता है। इंटीग्रेटिव सॉल्यूशंस द्वारा शोधित यह टूलकिट एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर सहित कई क्षेत्रों से मिली सीखों पर आधारित है और फैक्ट्री संचालन में PwD के समावेश के लिए एक व्यापक मार्ग प्रस्तुत करता है।

विनीत सरैवाला, एटिपिकल एडवांटेज के संस्थापक ने कहा, “नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2.21% की विकलांगता दर वास्तविक स्थिति को कमतर दिखाती है। प्रदर्शन को बढ़ाने में समावेशन सहायक है, फिर भी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र ने ऐतिहासिक कारणों और पुरानी मान्यताओं के कारण इसे अपनाने में सबसे धीमी गति दिखाई है।

उन्होंने कहा जीसीएपीएल जैसी कॉरपोरेट कंपनियां यह सिद्ध करती हैं कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में समावेशी भर्ती, यदि सुविचारित तरीके से की जाए, तो यह न केवल व्यावहारिक है बल्कि मूल्यवान भी है। जीसीएपीएल ने व्यापक स्तर पर तैयारी में निवेश किया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दिव्यांग व्यक्तियों को काम पर रखने की पहल परिचालन और संगठनात्मक संस्कृति, दोनों ही मोर्चों पर सफल रहे। सही प्रणालियों और दृष्टिकोण के साथ, समावेशन केवल संभव ही नहीं है, यह कंपनियों, समुदायों और देश के लिए भी अत्यंत लाभकारी होता है।

पिछले पाँच वर्षों में एटिपिकल एडवांटेज ने जीसीएपीएल, नेस्ले, माइक्रोन, टाटा मोटर्स, अरबिल सॉल्यूशंस और निवेया जैसी अग्रणी कंपनियों में PwD भर्ती को सक्षम किया है, जिससे उत्पादकता, रिटेंशन और शॉप-फ्लोर अनुशासन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए गए हैं। जीसीएपीएल की मध्य प्रदेश के मलानपुर और तमिलनाडु के चेंगलपट्टू स्थित मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों ने सुलभ, समावेशी और उच्च-प्रदर्शन वाले फैक्ट्री मॉडल विकसित कर राष्ट्रीय मानक स्थापित किए हैं। 

वैभव राम, ग्लोबल हेड - एचआर, गोदरेज कंज़्यूमर प्रॉडक्ट्स (जीसीपीएल) ने कहा, “ऐसे समय में जब भारत में दिव्यांगजन का रोजगार अपनी वास्तविक क्षमता से बहुत कम है, जीसीएपीएल सार्थक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी फैक्ट्रियों में हम 20 से अधिक दिव्यांगजन को रोजगार दे चुके हैं और इसे और अधिक भूमिकाओं व स्थानों तक विस्तार देने की योजना है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि दिव्यांग समावेशन कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। ‘वर्क दैट इंक्लूड्स’ टूलकिट इसी वास्तविकता को दर्शाता है और कंपनियों को उनकी समावेशन यात्रा शुरू करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।”

 उन्होंने कहा, “हमारी फैक्ट्रियां साबित करती हैं कि उत्पादकता और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं। सुलभ कार्यस्थल मजबूत और अधिक सक्षम टीमें बनाते हैं। हम दीर्घकालिक क्षमता निर्माण में दिव्यांग-जागरूकता और भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) मॉड्यूल को अपनी लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) में शामिल कर रहे हैं, ताकि समावेशी संचार और नेतृत्व हमारे मूल प्रशिक्षण का हिस्सा बन सके।”

‘वर्क दैट इंक्लूड्स’ टूलकिट यह स्पष्ट करता है कि समावेशी मैन्युफैक्चरिंग सीएसआर पहल नहीं, बल्कि एक रणनीतिक व्यावसायिक लाभ है। जैसे-जैसे भारत का मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र विस्तार कर रहा है, दिव्यांग समावेशन सामाजिक दायित्व के साथ एक बड़ी आर्थिक संभावना के रूप में उभर रहा है 

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