सृजन फाउंडेशन का मानसिक स्वास्थ्य अभियान "डिजिटल भ्रम से भावनात्मक संतुलन की ओर”
० आशा पटेल ०
कलवाड \ जयपुर | सृजन फाउंडेशन द्वारा कृष्णा सी.से स्कूल, कलवाड़, जयपुर में Mission De-Clutter -डिजिटल भ्रम से भावनात्मक संतुलन पर मानसिक स्वास्थ्य वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को सोशल मीडिया की लत, मन में जमा अव्यवस्था, भावनात्मक दबाव और भीतर की उलझनों को समझने तथा उनसे उभरने के सरल और जागरूक बनाना था।
कलवाड \ जयपुर | सृजन फाउंडेशन द्वारा कृष्णा सी.से स्कूल, कलवाड़, जयपुर में Mission De-Clutter -डिजिटल भ्रम से भावनात्मक संतुलन पर मानसिक स्वास्थ्य वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को सोशल मीडिया की लत, मन में जमा अव्यवस्था, भावनात्मक दबाव और भीतर की उलझनों को समझने तथा उनसे उभरने के सरल और जागरूक बनाना था।
फाउंडेशन की संस्थापक एवं अध्यक्ष, साइकोलोजिस्ट एडवोकेट इंदु तोमर ने कहा:“मन में जमा डिजिटल और भावनात्मक अव्यवस्था को पहचानना और उससे मुक्त होना आज के युवाओं की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी के साथ ‘Back to Roots’ परिवार के साथ समय बिताना, स्वयं को गहराई से समझना, अपने ट्रिगर्स को पहचानना और समय रहते उन्हें किसी विशेषज्ञ से साझा करना ,डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेष आकर्षण साईंको ड्रामा रहा, जिसमें बच्चों ने अभिनय के माध्यम से सोशल मीडिया दबाव, तुलना, अकेलापन, गुस्सा, असुरक्षा और अपने भीतर की परेशानियों को व्यक्त किया। इस गतिविधि ने बच्चों को अपनी भावनाओं को पहचानने और समझने का सुरक्षित अवसर प्रदान किया। गाइडेड मेडिटेशन ने बच्चों को स्वयं से जुड़ने, मन को शांत करने और भावनाओं को महसूस करने में मदद की। कई बच्चों की आँखें नम थीं, जो उनकी भीतर की राहत और भावनात्मक अभिव्यक्ति का संकेत था।
फाउंडेशन की सचिव उर्वशी देव रावल ने स्व-अनुशासन, जिम्मेदारी और सकारात्मक दिनचर्या पर विद्यार्थियों के साथ चर्चा की। बच्चों ने देश के वीर सैनिकों के लिए स्नेह और कृतज्ञता से भरे पोस्टकार्ड लिखे। इस गतिविधि ने उनमें राष्ट्रप्रेम, संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को मजबूत किया।
विशेष आकर्षण साईंको ड्रामा रहा, जिसमें बच्चों ने अभिनय के माध्यम से सोशल मीडिया दबाव, तुलना, अकेलापन, गुस्सा, असुरक्षा और अपने भीतर की परेशानियों को व्यक्त किया। इस गतिविधि ने बच्चों को अपनी भावनाओं को पहचानने और समझने का सुरक्षित अवसर प्रदान किया। गाइडेड मेडिटेशन ने बच्चों को स्वयं से जुड़ने, मन को शांत करने और भावनाओं को महसूस करने में मदद की। कई बच्चों की आँखें नम थीं, जो उनकी भीतर की राहत और भावनात्मक अभिव्यक्ति का संकेत था।
फाउंडेशन की सचिव उर्वशी देव रावल ने स्व-अनुशासन, जिम्मेदारी और सकारात्मक दिनचर्या पर विद्यार्थियों के साथ चर्चा की। बच्चों ने देश के वीर सैनिकों के लिए स्नेह और कृतज्ञता से भरे पोस्टकार्ड लिखे। इस गतिविधि ने उनमें राष्ट्रप्रेम, संवेदनशीलता और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को मजबूत किया।
आयोजन में राघव, गरिमा और दिक्षित ने सभी गतिविधियों में विशेष योगदान दिया। स्कूल के निदेशक रामचंद्र चौधरी ने कहा कि “बच्चों के मानसिक संतुलन, भावनात्मक समझ और सकारात्मक व्यवहार के लिए इस प्रकार के संवाद अत्यंत आवश्यक हैं। स्कूल में इन सीख को आगे भी नियमित रूप से याद दिलाया जाएगा।
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