स्पंदन की महिला काव्य गोष्ठी में कवयित्रियों ने ग़ज़ल,गीतों से बांधा समा
जयपुर। स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान जयपुर द्वारा आयोजित “ काव्य गोष्ठी में 50 से अधिक कवयित्रियों ने अपनी कविताओं,ग़ज़ल गीत, मुक्तक से समा बाँधा। कार्यक्रम की शुरुआत मीनाक्षी माथुर की सुमधुर सरस्वती वंदना से हुई स्पंदन अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने अपनी कविता “वो बिंदास लड़की “सुनाई कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. सुषमा सिंघवी ने बेटियों पर कविता सुनाई
विशिष्ट अतिथि शारदा कृष्ण ने ग़ज़ल “और भी कुछ बात है” “चलेगा क्या?” सुनायी प्रो. अमला बत्रा ने “स्मृतियों के झरोखे से.. महारानी कॉलेज “कविता सुना कर पुरानी यादें ताज़ा कीं ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. लाड कुमारी जैन ने कहा कि स्पंदन संस्थान की काव्य गोष्ठियां बहुत सुकूनदायक मन को प्रफुल्लित करती हैं।
यहाँ कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर शिक्षाविद, साहित्यकारों का अनूठा संगम देखने को मिलता है।अलग अलग विषयों को लेकर सुनायी गई कविता, ग़ज़ल गीत मन को सच में स्पंदित कर जाते हैं और एक नई ऊर्जा लेकर हम सब यहाँ से जाते हैं । कार्यक्रम में प्रो.रूपा मंगलानी ने “मां “, डॉ. कविता माथुर ने “स्त्री”,सुशीला शील ने “तुमको चाहा पर कह ना सके” सीमा हिंगोनिया ने “अनन्त में मिलना है हमें”, पूजा उपाध्याय ने “उषा किरण “,शिखा मनमोहन शर्मा ने “जीवन साथी”,
मनोरमा माथुर ने “मेरी ख़ुशियाँ “,डॉ. नेहा पारीक ने “आँखें” जीनस कंवर ने “मन के रंग हज़ार “,अनुपमा तिवारी ने “स्त्री का चित्र”, शिवानी जयपुर ने “कही अनकही सी”, उमा शर्मा ने “सीप का मोती”, कुसुम शर्मा ने “सतरंगी किरणें “,डॉ. सुशीला शील ने मुक्तक,डॉ.कंचना सक्सेना ने”संघर्षरत जीवन”,विनीता किरण ने “इंतज़ार “, तारावती सैनी ने “समाधि के बाद”, राज चतुर्वेदी ने “आज की शाम तुम्हारे नाम”, सुनीता विश्नोलिया ने “बहुत याद आती है माँ “,पल्लवी माथुर ने “मायका”,रेनू शब्द मुखर ने”गुलाबी डायरी “,पवनेश्वरी वर्मा,विदाई “,डॉ. रेखा गुप्ता ने”भोर के उजास सी”,
उषा नांगिया ने “ज़िंदगी “,रचना सिद्धा ने “ कल बाल दिवस था”,मीनाक्षी माथुर ने”क्या तुमने बारिश को चलते देखा है”,ज्योत्सना सक्सेना ने “ढलता सूरज”,वीना करमचंदानी ने “विरोध”,प्रीति जैन ने “रिश्तों की धौंकनी “, इति शर्मा ने “रंगमंच के हम किरदार “,रितु सिंह वर्मा ने “बसंत की प्रतीक्षा “,शिखा मनमोहन शर्मा ने”जीवन साथी”,डॉ. आशा शर्मा ने “सच्चा जीवन”,डॉ. अनिता श्रीवास्तव ने ग़ज़ल,रश्मि पारीक ने”मैं एक सशक्त नारी हूँ “,मंजु महिमा ने हाइकु सुनाएं । नीलिमा ने अतिथियों का आभार प्रकट किया ।कार्यक्रम में “साहित्य समर्था “पत्रिका के साहित्यकार ज्योति जैन पर केन्द्रित विशेषांक का लोकार्पण किया गया। डॉ. नेहा पारीक को वार्षिक संचालन सम्मान से सम्मानित किया गया।
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