राजस्थान ने जल–सुरक्षा एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए ₹115 करोड़ का समझौता किया

० आशा पटेल ० 
जयपुर,राजस्थान सरकार ने “वॉटर-सेक्योर राजस्थान के लिए पब्लिक–प्राइवेट–पीपल पार्टनरशिप निर्माण” विषयक बैठक में CSR साझेदारों के साथ ₹115 करोड़ का समझौता किया। यह परामर्श UNICEF, राजस्थान सरकार तथा कार्यान्वयन भागीदार अरावली के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के विभिन्न विभागों, CSR संगठनों और सिविल सोसाइटी भागीदारों ने राज्य के जल-सुरक्षा एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए भागीदारी की।
यह MoU पिरामल फाउंडेशन, PHD चैंबर्स, अर्पण सेवा, HPCL और ITC के साथ हस्ताक्षरित किया गया, जो मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (MJSA 2.0) के अगले चरण को ग्रामीण अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, जल संरक्षण के नवाचारों और पंचायत स्तर पर क्षमता निर्माण के माध्यम से समर्थन देगा। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा:
"CSR भागीदारों के साथ ₹115 करोड़ का यह MoU साइन करके हम वॉटर-सेक्योर राजस्थान के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा रहे हैं। MJSA 2.0 के माध्यम से यह सहयोग ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत करेगा, जल संरक्षण में नवाचार को बढ़ावा देगा और पंचायतों को प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण के माध्यम से सशक्त करेगा। समुदाय की सक्रिय भागीदारी के साथ हमें विश्वास है कि टिकाऊ समाधान विकसित होंगे और हमारे गांव आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होंगे।
दिलावर ने MJSA के अंतर्गत सामुदायिक आधारित हस्तक्षेपों में CSR की अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग समुदाय की भागीदारी को मजबूत करते हैं और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करते हैं। यह सहयोग जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाएगा, टिकाऊ समाधान विकसित करेगा और राजस्थान के गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के हमारे प्रयासों को नई दिशा और गति देगा।

 प्रतिभागियों ने जल-सुरक्षित राजस्थान के लिए सरकारी विभागों, कॉर्पोरेट क्षेत्र और सिविल सोसाइटी संगठनों के बीच सहयोगात्मक साझेदारी के महत्व को रेखांकित किया। चर्चाएँ CSR संसाधनों के बेहतर उपयोग, साझेदारियों के औपचारिककरण, सफल फील्ड हस्तक्षेपों के प्रदर्शन और वाटरशेड विकास में राज्य की प्रगति की समीक्षा पर केंद्रित थीं। राजस्थान सरकार के जलागम विकास एवं मृदा संरक्षण निदेशक मुहम्मद जुनैद ने MJSA और PMKSY जैसी पहलों की प्रगति पर प्रस्तुति देते हुए कहा:

"MJSA का पहला चरण सफल रहा है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इन परामर्शों में CSOs और CSR भागीदारों के सफल हस्तक्षेपों और नवाचारों को प्रदर्शित करना भविष्य की रणनीतियाँ तय करने और दीर्घकालिक कार्य योजनाएँ बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।  
उद्योग और CSR, वित्त (बजट) तथा पंचायती राज विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों तथा कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव ने संबोधित किया। UNICEF के विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक जल-सुरक्षा के लिए जलवायु लचीलेपन की अनिवार्यता पर बल दिया। UNICEF इंडिया कंट्री ऑफिस के WASH प्रमुख पॉलोस वर्कनेह ने पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति UNICEF की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा :

"UNICEF के लिए जलवायु लचीलापन और पर्यावरणीय स्थिरता हमारे मिशन के केंद्र में हैं। हमारा कार्य सतत विकास लक्ष्यों विशेषकर लक्ष्य 6 (सुरक्षित जल और स्वच्छता) तथा लक्ष्य 13 (जलवायु कार्रवाई) द्वारा निर्देशित है। 2023 से हम राज्य विभागों के साथ मिलकर स्थानीय स्तर पर जल स्रोत स्थिरता और जल सुरक्षा के लिए कार्यक्रमों का अभिसरण कर रहे हैं। सरकार के मजबूत नेतृत्व और सहयोग के साथ ऐसे प्रयास विकसित राजस्थान के लक्ष्यों को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

UNICEF जयपुर के WASH विशेषज्ञ और इन-चार्ज प्रमुख रुशभ हेमाणी ने कहा "2047 तक राजस्थान को जल-सुरक्षित बनाने की राज्य सरकार की विज़न डॉक्यूमेंट के अनुरूप यह सहयोग एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। UNICEF राजस्थान ने हस्तक्षेप को 2030, 2035 और 2047 के तीन चरणों में विभाजित किया है। UNICEF सभी हितधारकों के साथ साझेदारी को और सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। सामूहिक प्रयास और साझा जिम्मेदारी के माध्यम से हम आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-सुरक्षित और जलवायु-लचीला राजस्थान सुनिश्चित कर सकते हैं।

परामर्श के दौरान AIWC मारवी, अर्पण संस्थान, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट, सेंटर फॉर माइक्रो फाइनेंस, अंबुजा फाउंडेशन, जमनालाल कनिराम बजाज फाउंडेशन, ITC, PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स, धरमपाल सत्थापाल ग्रुप और श्री सीमेंट फाउंडेशन जैसी संस्थाओं ने अपने अनुभव साझा किए। UNICEF ने फील्ड अंतर्दृष्टियाँ प्रस्तुत कीं और कार्ययोजना निर्माण के लिए चर्चा को सुगम बनाया। 

 विचार-विमर्श में सरकारी योजनाओं और CSR निवेशों के अभिसरण, जल-सुरक्षा को ग्रामीण आजीविका, किसानों की आय दोगुनी करने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने जैसे व्यापक विकास लक्ष्यों से जोड़ने पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने भविष्य के सहयोग के लिए अवसंरचना निर्माण, तकनीकी नवाचार, क्षमता निर्माण तथा स्केलेबल जल संरक्षण मॉडलों जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी।

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