राजस्थान आज सभी क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है : कांग्रेस
० संवाददाता द्वारा ०
जयपुर। आज से ठीक दो वर्ष पूर्व राजस्थान में एक ड्रामा हुआ था जिसमें पर्ची से मुख्यमंत्री का जन्म हुआ था यह खेल पूरे राजस्थान ने देखा और आज फिर दिल्ली से आयी हुई पर्ची को पढ़ कर एक ड्रामा हुआ है, मुख्यमंत्री को अपने दो वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों को बताना चाहिए था, जनता से दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री व भाजपा ने चुनावों में जो वादे जनता से किए थे कितने पूरे हुए इस बारें में जानकारी देनी चाहिए थी। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री राजस्थान द्वारा विधायक दल का नेता चुने जाने के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में की गई प्रेस वार्ता पर पलटवार करते हुए व्यक्त किए।
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान आज सभी क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है। चिकित्सा की बात करें तो तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासन में मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत् जो ईलाज 25 लाख मिल रहा था वो 5 लाख का हो गया है, दुर्घटना बीमा 10 लाख रुपये मिलता था जिसे घटाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। निःशुल्क दवा योजना में मिलने वाली दवाईयों की संख्या घट गई है, सीएचसी, पीएचसी अस्पतालों में निःशुल्क दवाईयां अनुपलब्ध है जो मिल रही है उनमें से नकली भी पायी जा रही है,
यमुना जल समझौते को लेकर मुख्यमंत्री बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। उन्होंने राजस्थान विधानसभा में कहा था कि 4 माह में शेखावाटी के लिए यमुना जल लाने की योजना की डीपीआर बन जाएगी किन्तु 24 माह होने को आये डीपीआर अभी तक नहीं बनी है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने भाषण में कहा कि डीपीआर बन चुकी है और अब कह रहे हैं कि डीपीआर बनाने का काम जारी है।
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल को चुनौती देते हुए कहा कि वे जयपुर के अल्बर्ट हॉल पर अपनी सरकार की उपलब्धियों को लेकर खुली चर्चा जनता के सामने उनसे कर ले। कोई भी पांच विभाग जो जन सरोकार से संबंधित है उन्हीं की बात कर ले कांग्रेस शासन में जो कल्याणकारी कार्य हुए उसकी जानकारी मुख्यमंत्री को मिल जाएगी।
जयपुर। आज से ठीक दो वर्ष पूर्व राजस्थान में एक ड्रामा हुआ था जिसमें पर्ची से मुख्यमंत्री का जन्म हुआ था यह खेल पूरे राजस्थान ने देखा और आज फिर दिल्ली से आयी हुई पर्ची को पढ़ कर एक ड्रामा हुआ है, मुख्यमंत्री को अपने दो वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों को बताना चाहिए था, जनता से दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री व भाजपा ने चुनावों में जो वादे जनता से किए थे कितने पूरे हुए इस बारें में जानकारी देनी चाहिए थी। उक्त विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री राजस्थान द्वारा विधायक दल का नेता चुने जाने के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में की गई प्रेस वार्ता पर पलटवार करते हुए व्यक्त किए।
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान आज सभी क्षेत्रों में पिछड़ा हुआ है। चिकित्सा की बात करें तो तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासन में मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत् जो ईलाज 25 लाख मिल रहा था वो 5 लाख का हो गया है, दुर्घटना बीमा 10 लाख रुपये मिलता था जिसे घटाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। निःशुल्क दवा योजना में मिलने वाली दवाईयों की संख्या घट गई है, सीएचसी, पीएचसी अस्पतालों में निःशुल्क दवाईयां अनुपलब्ध है जो मिल रही है उनमें से नकली भी पायी जा रही है,
आरजीएचएस योजना दम तोड़ रही है 400 से अधिक अस्पताल इस योजना से बाहर हो गए है। सांचौर में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाया जा रहा मेडिकल कॉलेज इस सरकार ने निरस्त कर दिया है। किसान को खाद नहीं मिल रही, लाठी खानी पड़ रही है। लोगों को लाईन में लगते हुए पूरे देश ने नोटबंदी के अवसर पर देखा था किन्तु अब राजस्थान में खाद के लिए
आधार कार्ड की लाईन लग रही है क्योंकि खाद कब मिलेगी उसमें कितना समय लग जाए इसका किसी को पता नहीं, समय की कोई सीमा नहीं है, कई-कई दिन लग रहे है। किसानों पर लाठियां बरस रही है, चुनावों में जो गेहूं पर बोनस देने की घोषणा की थी वो नहीं दिया जा रहा है, गेहूं की 2700 रुपये पर खरीद नहीं हो रही है। किसान सम्मान निधि 12 हजार रुपये देने का वादा किया था वो भी अभी तक नहीं दिया गया है। मंत्री उर्रवक कम्पनियों पर छापे मार रहे हैं लेकिन किसानों का खाद नहीं दिलवा पा रहे है।
आधार कार्ड की लाईन लग रही है क्योंकि खाद कब मिलेगी उसमें कितना समय लग जाए इसका किसी को पता नहीं, समय की कोई सीमा नहीं है, कई-कई दिन लग रहे है। किसानों पर लाठियां बरस रही है, चुनावों में जो गेहूं पर बोनस देने की घोषणा की थी वो नहीं दिया जा रहा है, गेहूं की 2700 रुपये पर खरीद नहीं हो रही है। किसान सम्मान निधि 12 हजार रुपये देने का वादा किया था वो भी अभी तक नहीं दिया गया है। मंत्री उर्रवक कम्पनियों पर छापे मार रहे हैं लेकिन किसानों का खाद नहीं दिलवा पा रहे है।
मंत्री जब देर सवेर खाद बीज के प्रतिष्ठानों पर छापे मारने के लिए जा सकते है तो मंत्री और मुख्यमंत्री राजस्थान के टिब्बी में जाकर किसानों के हाल क्यों नहीं पूछ रहे हैं जबकि कृषि मंत्री स्वयं कह रहे है कि किसानों की समस्या वाजिब है उन्हें हल किया जाएगा, प्रशासन ने अब तक इन मांगों को पहुंचाया नही था, कृषि मंत्री मुख्यमंत्री से समस्याओं के समाधान करने की बात कह रहे है। शिक्षा मंत्री बाबरी मस्जिद ढहाने को लेकर शौर्य दिवस मनाने का आदेश निकालते है और आधे घण्टे में ही यू-टर्न लेकर आदेश वापस ले लेते है लेकिन शिक्षक भर्ती पर नहीं बोलते जबकि प्रदेश में सवा लाख शिक्षकों की कमी है।
शिक्षा विभाग में स्थानान्तरणों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहे है। चलती अर्द्धवार्षिक परीक्षा में 6-6 हजार प्रिंसिपलों के स्थानान्तरण किए जा रहे है लेकिन 7 माह पूर्व वाईस प्रिंसिपल से प्रिंसिपल पद पर पदौन्नतों को पोस्टिंग नहीं दी जा रही है, 3500 से अधिक स्कूलों में दो प्रिंसिपल कार्यरत है। महिलाओं के आरक्षण की बात भाजपा नेतृत्व के लोग करते है लेकिन शिक्षकों के एल-1 और एल-2 की भर्ती में जहां केवल 7 हजार पद है और एक पद पर 900 लोगों के आवेदन है वहां वादा करने के बावजूद महिला आरक्षण की कोई बात नहीं कर रहे, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय 60 हजार की भर्ती हुई थी।
सफाई कर्मचारियों के 75 हजार पदों पर भर्ती को लेकर कोई निर्णय सरकार नहीं कर पायी जबकि पूर्व में भाजपा नेता बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे, बेरोजगार परेशान है। इंदिरा रसोई योजना से प्रदेश के गरीब व्यक्ति को दो वक्त का भोजन सस्ते में मिलता था इस योजना का नाम भी बदल दिया और रसोईयों की संख्या कम कर दी और थालियों की संख्या भी घटा दी है। फसल बीमा योजना में लोगों को बीमा राशि नहीं मिल रही है। कांग्रेस सरकार के शासन में गरीब को फूड पैकेट दिए जा रहे थे वो योजना भी बंद कर दी गई।
कांग्रेस शासन में निःशुल्क पशुधन बीमा किया जाता था जिसमें पशु की मौत होने पर 40 हजार रुपये की राशि मिलती थी, यह योजना भी अब बंद कर दी गई है। बिजली के नए कनेक्शन लेने पर 150 यूनिट निःशुल्क नहीं मिल रही है और किसानों को 12 हजार रुपये प्रतिवर्ष की रियायत भी नए कृषि कनेक्शन पर नहीं दी जा रही है। ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने की थी इस योजना का नाम बदल दिया लेकिन आज तक एक फूटी कौड़ी इस योजना के तहत् केन्द्र से राजस्थान को नहीं मिली है।
मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि आज तक ईआरसीपी को केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय परियोजना क्यों नहीं घोषित किया है और केन्द्र सरकार ने इस योजना हेतु कितनी राशि अब तक राजस्थान को दी है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय 14 हजार करोड़ रुपये के काम करवाये गए थे, वित्तीय स्वीकृति देकर कार्यादेश निकालने पर जहां 80 प्रतिशत तक कार्य पूर्ण हो गया था उस कार्य का निरीक्षण मुख्यमंत्री ने किया लेकिन आगे की स्वीकृतियां जो ईआरसीपी का कार्य शेष था वो केवल और केवल केन्द्रीय नेतृत्व के मित्र उद्योगपति अडानी को देने का कार्य किया क्योंकि यही पर्ची दिल्ली से आयी थी।
यमुना जल समझौते को लेकर मुख्यमंत्री बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। उन्होंने राजस्थान विधानसभा में कहा था कि 4 माह में शेखावाटी के लिए यमुना जल लाने की योजना की डीपीआर बन जाएगी किन्तु 24 माह होने को आये डीपीआर अभी तक नहीं बनी है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने भाषण में कहा कि डीपीआर बन चुकी है और अब कह रहे हैं कि डीपीआर बनाने का काम जारी है।
डोटासरा ने कहा कि वे दावे के साथ कह सकते हैं कि इन मुख्यमंत्री के कार्यकाल में शेखावाटी के लिए यमुना का जल नहीं आ सकता है। आज भारतीय जनता पार्टी में जबरदस्त अर्न्तकलह है, मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों को संतुष्ट नहीं कर पा रहे है दिल्ली के 40 दौरे मुख्यमंत्री ने कर लिए है लेकिन एक नया पैसा राजस्थान के लिए लेकर नहीं आये।
जितने दुपट्टे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पहनाए, सरकारी हवाई जहाज का ईंधन पर खर्च किया उतना पैसा भी केन्द्र सरकार से बजट के रूप में ले आते तो बात समझ में आती। राईजिंग राजस्थान को लेकर खूब पीठ थपथपाते है लेकिन भाजपा नेता केवल प्रदेश की जमीनों की बंदरबाट कर रहे है और अफसर मजे लूट रहे है। मंत्रियों की नौकरशाही सुन नहीं रही, कलेक्टर फोन नहीं उठा रहे है, मुख्यमंत्री सार्वजनिक मीटिंग में अपने मंत्रियों को लताड़ रहे है। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा तो सरकार के बारे में क्या-क्या कहते है सर्वविदित है।
अब तो रिटायर होने की बात कह रहे है लेकिन पांच साल के लिए चुनी हुई सरकार को जनता के हितों के लिए कार्य करने चाहिए ना कि ड्रामाबाजी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के शासन में 1100 से अधिक शिक्षकों को अच्छे कार्य के लिए पारितोषिक दिया जाता था इस संख्या को घटाकर 100 कर दिया और चयन भी अब आरएसएस की सिफारिश पर सारे नियम कायदे ताक पर रख कर किए जा रहे है। प्रदेश में भ्रष्टाचार आम हो गया है, बच्चों को पढ़ाई के लिए लैब नहीं मिल रहे है क्योंकि टेण्डर में मंत्री की इच्छा अलग है और अधिकारियों की मंशा अलग है, सीएमओ तीसरे में ही रूचि दिखा रहा
टिब्बी में किसान अपनी जायज मांग को लेकर आंदोलन कर रहे है और मंत्री अर्नगल बयान दे रहे है कि कांग्रेस शासन के समय एनओसी मिली थी। किसी भी उद्योग के लिए जमीन के कनवर्जन करवाना गलत नहीं होता लेकिन आज भाजपा की सरकार ने उस उद्योग के लिए जो इंदिरा गांधी नहर की मुख्य नहर के तल से पानी देने का निर्णय लिया है वो पानी जिसकी खपत लाखों लीटर होगी यह किसान के हक को मारने का निर्णय है, इसीलिए किसान चिंतित है।
सूरतगढ़ में भी कांग्रेस शासन में एथेनॉल का प्लान्ट लगा था लेकिन उसका पानी ट्यूबवैल से पानी लेकर फैक्ट्री चलायी जा रही है उस पर किसानों को आपत्ति नहीं है क्योंकि सिंचाई वाले नहर का पानी फैक्ट्री को नहीं जा रहा है लेकिन टिब्बी में किसान के हक का पानी फैक्ट्री को दिया जा रहा है लेकिन सरकार किसानों की वाजिब समस्या को सुनकर समाधान नहीं कर रही है। यदि समय पर किसानों की बात सुन ली जाती तो इतनी बड़ी घटना टिब्बी में नहीं होती किंतु आज किसानों की सुनवाई करने की बजाए प्रदेश सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर मुकदमें दर्ज करवाये जा रहे है।
एसएमएस अस्पताल के आईसीयू में आग लग गई लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता, 25 लोग अजमेर रोड़ पर अवैध रोड़ कट के कारण टैंकर जलने की दुर्घटना में मारे गए लेकिन सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ा। जल जीवन मिशन पर बात करने वाले भाजपा नेता दो साल से क्यों सोए हुए थे आज अधिकारियों को पकड़ने की बात कह रहे है वो भी चुन-चुन कर गिरफ्तार करने की बात की जा रही है
क्योंकि अपने लोगों को चुन कर बचा लेंगे जिनसे सांठगांठ हो गई उन्हें बचा लेंगे अन्यथा राजनैतिक द्वेष के कारण पूर्व मंत्री डॉ. महेश जोशी को गिरफ्तार तो कर लिया लेकिन अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी, क्या भाजपा की सरकार यह बताना चाहती है कि सारे अधिकारी ईमानदार थे। सरकार का कोई विजन नहीं है कोई योजना नहीं है, बजट पेश किया जाता है, जयपुर में एलीवेटेड रोड़ की बात होती है और फिर सरकार का ही वित्त विभाग इसे गैरजरूरी बता देता है इस प्रकार की हास्यास्पद स्थिति इस सरकार के कार्यकाल में देखने को मिली है।
मुख्यमंत्री सड़क बनाने की बात पर पीठ थपथपा रहे है जबकि जो सड़कें कांग्रेस सरकार के शासन में स्वीकृत हुई थी उनका भुगतान भी इस सरकार में हुआ नहीं है और प्रदेशभर में सड़कें बदहाल है। हर क्षेत्र में यह सरकार विफल है, कांग्रेस शासन में उच्च शिक्षा के लिए विदेश में पढ़ाई करने के लिए स्कॉलरशिप योजना लागू की थी उसे भी इस सरकार ने ठप्प कर दिया और आज विदेश में पढ़ रहे बच्चें पाई-पाई को मोहताज हो रहे है और मुश्किल से अपनी पढ़ाई को पूरा करने का प्रयास कर रहे है।
सारी योजनाएं ठप्प की जा रही है, स्कलें बंद की जा रही है, कांग्रेस शासन में सरकारी स्कूल में 98 लाख से ऊपर का नामांकन था जो आज घट कर 67 लाख से कम हो गया है। इसके लिए यह सरकार और मंत्री जिम्मेदार है क्योंकि पहले प्रवेश की आयु 6 वर्ष कर दी और फिर उसे घटाकर 5 वर्ष किया क्योंकि यह सरकार सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना ही नहीं चाहती बल्कि आरएसएस के आदर्श विद्या मंदिर में पढ़ने के लिए बाध्य करना चाहती है।
झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई लेकिन वहां आज तक भी स्कूल का नया भवन नहीं बना है, माननीय न्यायालय द्वारा स्कूलों की दशा सुधारने के लिए सरकार को लताड़ लगायी गयी है लेकिन सरकार के पास बजट नहीं है। शिक्षा मंत्री विधायकों को चिठ्ठी लिख रहे है कि स्कूलों की मरम्मत हेतु विधायक कोष से पैसा दिया जाए यह बात जायज नहीं है क्योंकि विधायक अपने क्षेत्र के विकास के लिए विधायक कोटे का पैसा काम में लेता है
हालांकि सभी विधायक व वे स्वयं भी अपने क्षेत्र की स्कूलों की मरम्मत के लिए पहले ही राशि स्वीकृत कर चुके है। श्री डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में अपराध चरम पर है, रंगदारी के नाम पर हत्याएं हो रही है। उद्योगपतियों को रंगदारी के लिए धमकियां मिल रही है लेकिन सरकार सोयी हुई है, मुख्यमंत्री जो प्रदेश के गृह मंत्री भी है उनको प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा कर उचित कदम उठाने चाहिए।
डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल को चुनौती देते हुए कहा कि वे जयपुर के अल्बर्ट हॉल पर अपनी सरकार की उपलब्धियों को लेकर खुली चर्चा जनता के सामने उनसे कर ले। कोई भी पांच विभाग जो जन सरोकार से संबंधित है उन्हीं की बात कर ले कांग्रेस शासन में जो कल्याणकारी कार्य हुए उसकी जानकारी मुख्यमंत्री को मिल जाएगी।
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