अरावली राजस्थान के लिये ना सिर्फ आस्था का केन्द्र है बल्कि जीवन रेखा है

० संवाददारा द्वारा ० 
जयपुर। जब से केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी है, संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग करना, स्वायत्तशासी संस्थाओं का खत्म करना और विभिन्न तरह के माफियाओं को लाभ पहुॅंचाने की नीति भाजपा की रही है। देश में आज संगठित रूप से देश की सम्पदाओं को लूटने का कार्य किया जा रहा है। नये मामले में अरावली पर्वतमाला को लूटने का षडय़ंत्र भाजपा ने पूरा कर लिया है जो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार ने दबाव में दिलवाई है उसके पश्चात् स्पष्ट हो गया है कि राजस्थान की जीवन रेखा अरावली पर्वतमाला के 90 प्रतिशत हिस्सा जो ना सिर्फ रेगिस्तान के विस्तार को रोकने में सहायक है,
धूल भरी आंधियों से बचाव करती है, पर्यावरण संतुलन बनाये रखने में सहायक है और प्रदेशवासियों के लिये आस्था का केन्द्र है, इसे नष्ट करने का कार्य भाजपा की सरकार ने किया है। उच्चत्तम न्यायालय द्वारा 20/11/2025 को दिये गये निर्णय के पश्चात् 90 प्रतिशत हिस्सा अरावली का नष्ट हो जायेगा, क्योंकि यह अरावली पवर्तमाला खनन् माफिया के हवाले कर दी जायेगी। उक्त विचार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष  गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर पर व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा इस प्रकार के प्रयास लम्बे समय से किये जा रहे थे, लेकिन अब सोची-समझी साजिश के तहत् केन्द्र में अलवर से जीते हुये सांसद भूपेन्द्र यादव को मंत्री बनाया गया, अलवर के ही संजय शर्मा को इसी मंत्रालय का प्रदेश में मंत्री बनाया गया और प्रदेश में अनुभवहीन व्यक्ति को सत्ता भाजपा ने इसलिये सौंपी कि वह अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं कर सके, जो केन्द्र चाहे उस मनमानी में सहयोग करे। तकलीफ का विषय है कि राजस्थान में माईनिंग मिनिस्टर भी मुख्यमंत्री ही हैं, 

गृह मंत्री भी मुख्यमंत्री स्वयं हैं, वन पर्यावरण मंत्री केन्द्र के राजस्थान से ही हैं, इन सभी ने मिलकर षडय़ंत्र रचा और पूरी अरावली पर्वतमाला जो राजस्थान के लिये ना सिर्फ आस्था का केन्द्र है बल्कि जीवन रेखा है उसे खत्म करने की दिशा में भाजपा के नेता आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा नेताओं के द्वारा कहा गया कि 0.191 में ही खनन् किया जा सकता है लेकिन यह नहीं बता रहे कि यह 68000 एकड़ का विशाल क्षेत्र है जिसे खनन् माफियाओं के हवाले करने की तैयारी कर ली है। भाजपा नेताओं की तरफ से जो जवाब आ रहा है वह खनिज मंत्री की ओर से नहीं आकर अरूण चतुर्वेदी व राजेन्द्र राठौड़ द्वारा दिया जा रहा है।

 अरूण चतुर्वेदी राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष हैं, यह एक स्वायत्तशासी संस्था है, इसमें राजनीतिक का हस्तक्षेप ना तो कभी रहा है और ना ही कभी रहना चाहिये, लेकिन जबसे अरूण चतुर्वेदी इस आयोग के अध्यक्ष बने हैं राजनैतिक पार्टी के प्रवक्ता के रूप में बयानबाजी कर रहे हैं। संवैधानिक प्रावधान है कि वित्त आयोग स्वायत्तशासी संवैधानिक संस्था है, इस संस्था के अध्यक्ष पंचायती राज और नगर निकाय के लिये वित्तीय व्यवस्था की सिफारिश राज्य सरकार के लिये करते हैं। जब यही राजनीति करने लग जायेंगे तो इनके नीचे की संस्थायें कैसे पारदर्शिता के साथ कार्य करेंगी, उन्हें न्याय कैसे मिलेगा, यह सोचनीय विषय है।

 भाजपा नेता राजेन्द्र राठौड़ जनता में अपना विश्वास नहीं बना पाये और अब भाजपा सरकार के प्रवक्ता के रूप में भाजपा सरकार की गैरकानूनी, जनविरोधी नीति, योजना व कार्यों को न्यायोचित ठहराने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिये कि 68000 एकड़ जैसे विशाल भू-भाग को नष्ट करने के कार्य को कैसे न्यायोचित ठहरा सकते हैं। भाजपा के संकल्प पत्र में वादा किया गया था कि केन्द्र के साथ मिलकर अरावली को सुरक्षित रखने के लिये ग्रीन कोरिडोर बनाया जायेगा, यह वादा भाजपा ने प्रदेशवासियों से किया था। 

आज भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकार ने मिलकर अरावली को अवैध खनन् कोरिडोर बना दिया। खनन् माफियाओं से मिलकर चंदा लेना जिस प्रकार इलेक्ट्रोल बॉन्ड मामले में ईडी व इनकम टैक्स का दुरूपयोग कर कम्पनियों से चंदा लिया था, वैसे ही अब माफियाओं से चंदा लेकर अवैध माईनिंग करवाने का कार्य होगा या फिर माईनिंग करने वाले उद्योगपतियों को पट्टे दिये जायेंगे।

 वर्तमान में राजस्थान प्रदेश में पूरे देश के मुकाबले सबसे अधिक खनन् पट्टे जारी है उसके बावजूद ऐसी क्या परिस्थिति बन गई कि केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने प्रयास किया कि सरिस्का वन क्षेत्र में जो सीटीएस क्षेत्र है उसे बदल दें लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रयास को सफल नहीं होने दिया, साजिश पर करारा तमाचा लगा और अब यह षडय़ंत्र चल रहा है।

 डोटासरा ने कहा कि भाजपा के नेता सनातन् की बात करते हैं, लेकिन अरावली पवर्तमाला जहॉं खनन् की इजाजत देंगे वहॉं पर ऐतिहासिक देव स्थल बने हुये हैं, प्रमुख रूप से परशुराम महादेव पाली, हर्षनाथ सीकर, पाण्डुपोल हनुमान, नीलकंठ महादेव अलवर, सरिस्का, गलता, खोले के हनुमान जी जयपुर, एकलिंग जी ऋषभदेव, उदयपुर लोहारगल झुन्झुनूं, देलवाड़ा, अचलगढ़, कुम्भलगढ़ इन सभी का भूगोल मिटाने पर भाजपा के लोग लगे हुये हैं और सनातन् की बात कर वोट मांगते हैं। हमारे आस्था के केन्द्र ये सारे मंदिर जहॉं भगवान बिराजते हैं, हमारे पूजा के स्थल हैं,

 इन सभी को समाप्त करने की दिशा में केवल पैसे के लिये यह कदम उठाया गया है क्योंकि पैसे के बल पर भाजपा सरकारें गिराती है और सत्ता लूटती है। सीईसी सेन्ट्रल एम्पावरमेंट कमेटी स्वतंत्र संस्था थी, इसे भी भाजपा की सरकार ने कठपूतली बनाने का काम किया है। भीलवाड़ा, भरतपुर, झुन्झुनूं, अलवर में माफिया बैखोफ होकर अवैध खनन् कर रहे हैं और सरकार कान बंद करके बैठी है, अवैध खनन् भाजपा सरकार से रूक नहीं रहा है लेकिन अवैध खनन् को वैद्य खनन् करने के लिये,

 खनन् माफिया को प्रश्रय देने के लिये भाजपा सरकार ने यह कार्य किया है जिसके विरोध में प्रदेश की पूरी जनता विशेषकर नौजवानों जैनजी में बेहद आक्रोश है। जनता पूछ रही है कि सरकार करना क्या चाहती है, अरावली को इस प्रकार समाप्त कैसे किया जा सकता है, समझने योग्य बात यह है कि एक 100 मीटर ऊंची पहाड़ी और दूसरी पहाड़ी के मध्य 501 मीटर की दूरी हो गई तो बीच का सारा स्थान खनन् कर समाप्त कर दिया जायेगा। दोनों पहाड़ों के बीच का हिस्सा खनन् माफिया समाप्त कर देगा और टापू के रूप में दूर-दूर कुछ पहाड़ रह जायेंगे लेकिन संशय यह है कि खनन् माफिया इन पहाड़ों को भी छोड़ेगा क्या?

 आश्चर्य का विषय यह है कि भाजपा नेताओं को ऐसी क्या भूख लगी है कि प्रदेश के आस्था केन्द्र जीवनदायनी अरावली पर्वत जो पहाड़ नहीं है, भगवान के रूप में प्रदेश में पूजा जाता है उसे भी भाजपा के लोग नहीं छोड़ रहे हैं। देशभर में जबरदस्त प्रदूषण है, दिल्ली एनसीआर में लोगों का रहना दूभर हो गया है, वहॉं तंदूर जलाने पर रोक है, निर्माण कार्य रोक दिये गये लेकिन राजस्थान में ऐसा क्या हो गया कि अरावली पर्वतमाला को खत्म करने का षडय़ंत्र रचा जा रहा है।

 सिलिकोसिस बीमारी का ईलाज आज तक किसी को नहीं मिला, लोग कम उमर में मर रहे हैं, बहनें विधवा हो गई है, फिर भी खनन् रोकने की बजाए उसे बढ़ावा भाजपा की सरकार दे रही है। यह राजस्थान के प्रति अन्याय है और भाजपा नेताओं की घटिया मानसिकता का परिचायक है। यदि भाजपा नेताओं की मंशा ठीक होती तो जिस प्रकार चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के समय जब सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में सीजेआई की भूमिका तय की थी, 

तो भाजपा की केन्द्र सरकार ने कानून बनाकर इसे बदला, लेकिन यदि आज मंशा ठीक है तो उच्चत्तम न्यायालय के फैसले की दुहाई देने वाले अरावली बचाने के लिये कानून नहीं ला सकते। शिक्षा को बर्बाद करने के लिये नई शिक्षा नीति ले आये, काम के अधिकार जो यूपीए सरकार ने दिया था, उस मनरेगा को खत्म करने के लिये एक नया कानून ले आये, खाद्य सुरक्षा अधिनियम जो यूपीए सरकार ने लागू किया था उसमें लाभार्थियों के नाम काट सकते हैं, नोटबंदी कर सकते हैं तो क्या केन्द्र सरकार अरावली बचाने के लिये कानून नहीं ला सकती, लेकिन भाजपा नेताओं केमन में जो लालच है वह अरावली पर्वतमाला के लिये खतरा बन गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के 19 जिलों में अरावली पर्वतमाला के मुद्दे पर जबरदस्त आक्रोश है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निर्णय लिया है कि अरावली पर्वतमाला को खत्म करने की साजिश सफल नहीं होने दी जायेगी, जनता के समक्ष कांग्रेस पार्टी जनजागरण करेगी और भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकार के विरूद्ध आन्दोलन किया जायेगा। कांग्रेस पार्टी समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर अरावली पर्वतमाला की रक्षा का अभियान चलायेगी। 

आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी की सभी जिला कांग्रेस कमेटियां, मण्डल, बूथ और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों में कांग्रेस कार्यकर्ता जनजागरण अभियान अपने-अपने क्षेत्रों में चलायेंगे, अरावली को समाप्त करने के षडय़ंत्र के विरोध में प्रदर्शन करेंगे और उसके पश्चात् प्रदेश कांग्रेस कोर्डिनेशन कमेटी की बैठक कर कांग्रसे के सभी वरिष्ठ नेताओं से सलाह मशविरा किया जाकर अरावली बचाने हेतु एक वृहद अभियान की कार्य योजना तैयार की जायेगी। 

अरावली पर्वतमाला को खनन् माफिया के हवाले करने के षडय़ंत्र बना है इस पर जवाब भाजपा की सरकार को देना होगा और प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा देश के प्रधानमंत्री जब तक इस मुद्दे पर संतोषजनक जवाब नहीं देंगे, इस निर्णय को बदलने के लिये कदम नहीं उठायें जायेंगे तब तक कांग्रेस पार्टी सबको साथ लेकर जन आन्दोलन चलायेगी। अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिये कांग्रेस पार्टी दृढ संकल्प है और भाजपा के नेता जो सनातन् के नाम पर केवल वोट मांगन का काम करते हैं उन्हें जनता के समक्ष पूरी तरह से एक्सपोज करने का कार्य कांग्रेस कार्यकर्ता करेंगे।

 नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा का मुद्दा बहुत गंभीर हो गया है, कल मुख्यमंत्री महोदय कह रहे थे कि अरावली पर्वतमाला का मैं कुछ नहीं बिगडऩे दूंगा, तो उनसे प्रश्र है कि क्या यह बोलने से पहले अपने आलाकमान से ईजाजत ली थी या नहीं ? मुख्यमंत्री को बताना चाहिये कि अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिये उनकी क्या कार्य योजना है ? क्या भारत सरकार से उन्होंने ऐसी कोई मांग की है?

 इसके लिये क्या प्रधानमंत्री से बात करेंगे अथवा केन्द्र सरकार से नया कानून बनवायेंगे? यह बात मुख्यमंत्री को प्रदेशवासियों को बतानी चाहिये। मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर स्वयं तो कोई जवाब नहीं दे रहे हैं, केवल वित्त आयोग के अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी अथवा पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ को ही आगे कर रहे हैं। अब मुख्यमंत्री को आम जनता के समक्ष यह स्पष्ट करना चाहिये कि कल जो अरावली पर्वतमाला को बचाने के संदर्भ में उन्होंने जो बात अपने भाषण में कही है वह किस प्रकार से रोक लगायेंगे यह बात राजस्थान की जनता जानना चाहती है।

 केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव जो अलवर का प्रतिनिधित्व करते हैं उन्होंने सरिस्का में 50 से अधिक माईन्स सरिस्का के सीटीएच के कारण बंद पड़ी हैं उनको खोलने के लिये सरिस्का सीटीएच एरिया ही बदलवा दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगी और निर्णय वापस लेना पड़ा, इसलिये भाजपा नेताओं की मंशा पहले दिन से ही स्पष्ट हो गई थी कि भाजपा के नेता राजस्थान की सम्पदा को अपने मित्रों को सौंपना चाहते हैं। भाजपा नेताओं को जवाब देना चाहिये कि क्यों वे राजस्थान की सम्पदा को लुटाना चाहते हैं, राजस्थान की सम्पदा अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिये कांग्रेस पार्टी हर संघर्ष करने के लिये तैयार है।

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