महात्मा गाँधी हॉस्पिटल को ड्रोन से मिलेगी कैडेवर अंग,लैब सैंपल,आपदा मीटिंग में राहत

० आशा पटेल ० 
जयपुर : आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में ड्रोन तकनीक एक गेम-चेंजर के रूप में तेजी से उभर रही है। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी , जयपुर द्वारा ड्रोन-आधारित चिकित्सा एवं सुरक्षा सेवाओं को अपनाने की दिशा में एक पहल की जा रही है। इस के तहत चिकित्सा आपूर्ति, कैडेवर अंगों का त्वरित परिवहन, प्रयोगशाला सैंपलों की शीघ्र डिलीवरी, सुरक्षा निगरानी और आपदा राहत कार्यों को सुरक्षित और समयबद्ध बनाया जाएगा।
महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सुकांत दास एवं मार्केटिंग निदेशक वीरेंद्र पारीक ने बताया कि विशेष रूप से कैडेवर अंगों के त्वरित परिवहन में ड्रोन तकनीक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि ब्रेन डेथ के बाद प्राप्त अंगों का प्रत्यारोपण एक निर्धारित समय सीमा में ही संभव होता है। अब तक इसके लिए एंबुलेंस और प्रशासन द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर का उपयोग किया जाता था, लेकिन ड्रोन तकनीक के माध्यम से ट्रैफिक, दूरी और समय की बाधाओं को समाप्त कर अंगों को बहुत कम समय में एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जा सकेगा। इससे अंग प्रत्यारोपण की सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इसी प्रकार, लैब एवं डायग्नोस्टिक सैंपलों के परिवहन में भी ड्रोन तकनीक क्रांतिकारी साबित होगी। तापमान-नियंत्रित ड्रोन बॉक्स के माध्यम से रक्त, बायोप्सी और अन्य संवेदनशील सैंपल तेज़ी से जांच केंद्रों तक पहुँचाए जा सकेंगे। इससे सैंपलों की गुणवत्ता बनी रहेगी और रिपोर्ट समय पर उपलब्ध होने से उपचार में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी। ड्रोन तकनीक का उपयोग अस्पताल सुरक्षा निगरानी और पेट्रोलिंग के लिए भी किया जाएगा। अस्पताल परिसर, मेडिकल कॉलेज और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से 24 घंटे निगरानी, भीड़ प्रबंधन और आपात स्थितियों पर त्वरित नजर रखी जा सकेगी। इससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा किसी भी अप्रिय स्थिति पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

उन्होंने बताया कि यह ड्रोन तकनीक पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली), सुरक्षित और अत्यंत सटीक है। बाढ़, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपदाग्रस्त क्षेत्रों में ब्लड, जीवन रक्षक दवाइयाँ और आवश्यक मेडिकल उपकरण पहुँचाने में यह तकनीक अत्यंत सहायक सिद्ध होगी, जहाँ पारंपरिक परिवहन साधनों की पहुँच सीमित हो जाती है।

 इस के लिए राजस्थान की ड्रोन निर्माता कंपनी मैजिक मायना के साथ अनुबंध किया जा रहा है। कंपनी के संचालक सुनील सोमन नायर एवं राजस्थान प्रतिनिधि घनश्याम ने बताया कि ड्रोन तकनीक का सफल उपयोग पहले से ही रक्षा सेवाओं में किया जा रहा है और इसके लिए सरकार से आवश्यक अनुमतियाँ ली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान में महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी के साथ यह पहला प्रयास है।

 महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी में मैजिक मायना के सहयोग से ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित एक “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने की भी योजना है। यह केंद्र चिकित्सा क्षेत्र में ड्रोन के नवाचार, प्रशिक्षण, अनुसंधान और भविष्य की उन्नत सेवाओं के विकास का प्रमुख केंद्र बनेगा। ड्रोन-आधारित चिकित्सा सेवाएँ न केवल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाएंगी, बल्कि दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। 

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