दसवाँ रशीद सैदपुरी सैफ़ी अवार्ड समारोह

० शादाब सैफी ०
 नई दिल्ली, हिन्दी उर्दू के मशहूर शायर,समाजसेवी मरहूम रशीद सैदपुरी सैफ़ी की 10 पुण्य तिथि के मौक़े पर उर्दू अकादमी दिल्ली एवं सीरत एजुकेशनल एंड वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त तत्वधान में रशीद सैदपुरी सैफ़ी की स्मृति में मुशायरा एवं दसवाँ पुरस्कार समारोह का आयोजन द्वारका के डाबड़ी मोड़ पर किया गया। समारोह की सदारत साहित्यकार मुमताज़ सादिक ने की। सरपरस्ती सैफी रत्न मास्टर अली शेर सैफ़ी ने की।
चीफ़ गेस्ट के रूप में हाजी रियासुद्दीन उर्फ़ रजनीश सैफ़ी मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि दमनेश कुमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार,लेखक एवं पत्रकार डॉ. हबीब सैफी ने किया। मुशायरा एवं समारोह के कन्वीनर इरफ़ान राही ने इस्तक़बालिया तक़रीर की और तमाम मेहमानों,शायरों का  परिचय कराया।
सीरत एजुकेशनल एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मो इक़बाल सैफी ने अतिथियों को फूलों का गुलदस्ते पेश किए। इस अवसर पर सरपरस्त मास्टर अली शेर महासचिव सेवा रजिस्टर्ड एवं इक़बाल अहमद सैफी सदर सेवा ने उर्दू अकादमी दिल्ली और दिल्ली सरकार का आभार व्यक्त किया, जिनके आर्थिक सहयोग से यह कार्यक्रम संभव हो सका।
मरहूम रशीद सैदपुरी सैफ़ी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर रौशनी डालते हुए शायर असलम जावेद ने बेहतरीन नज़्म पेश की इनके अलावा बेस्ट सैफी डे कमेटी के अध्यक्ष प्रधान कल्लू ख़ान सैफी ने रशीद सैदपुरी, अय्यूब ख़ान एवं रियाज़ सैफी , हनीफ अहमद, हाजी केके नफीस आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

सरपरस्त मास्टर अली शेर ने कहा कि ज्ञान , मन की खिड़कियाँ खोलता है, जबकि अज्ञानता समाज में फितना पैदा करती है। रशीद सैदपुरी सैफ़ी साहब ने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया। रशीद सैदपुरी सैफ़ी न केवल एक सक्रिय समाजसेवी थे, बल्कि एक सशक्त साहित्यकार एवं कवि भी थे। उनकी कविताएँ और लेख विभिन्न समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। उनकी पुस्तक “सच का आईना” हिन्दी अकादमी दिल्ली के सहयोग से प्रकाशित हुई।

‘सैफ़ी’ उपनाम के प्रचार-प्रसार में भी उनकी लगभग आधी सदी की संघर्षपूर्ण भूमिका उल्लेखनीय रही। रशीद सैदपुरी सैफ़ी की दसवीं पुण्यतिथि के अवसर पर रशीद सैदपुरी सैफ़ी अवार्ड से वरिष्ठ साहित्यकार मुमताज़ सादिक, दमनेश कुमार, हाजी रजनीश सैफ़ी, डॉ. हबीब सैफ़ी, एवं डॉ. इसहाक़ अली संदर को सम्मानित किया गया। एक अवार्ड डॉक्टर यूनुस सलीम सैफी को उनके उमराह कर के लौटने पर उन्हें दिया जाएगा।

मुशायरे में मुमताज़ सादिक-
माँ कहती थी रिश्तों का दिल मत तोड़ो,
घर के भेदी लंका ढाया करते हैं।

डॉ. हबीब सैफ़ी
जिनका मक़सद हर पल जी-हुज़ूरी है,
उनसे बचकर रहना भी मजबूरी है।

हामिद अली अख़्तर
हज़ारों सितम सहकर ज़िंदा है अब तक,
ये उर्दू ज़बाँ है, ये उर्दू ज़बाँ है।

डॉ. इसहाक़ अली संदर
बिखरा मेरा वजूद मेरे घर में इस तरह,
मक़्तल में जैसे ख़ून बिखेरे है ज़िंदगी।

क़ासिम शम्सी
मर नहीं सकता वो कभी क़ासिम,
जिसकी शख़्सियत किताबी हो।

असलम जावेद -
मंजिल को आसान बनाओ सुन लो ये फ़रियाद,
फिरकों की बंदिश से निकलो हो जाओ आज़ाद,\

नज़ाकत अमरोहवी
आजकल वो निकलता है मुँह फेर कर,
अपनी सूरत भी मुझको भी दिखाता नहीं।

इरफ़ान राही
सच का आईना दिखाया आपने
हर क़दम जीना सिखाया आपने
इनके अलावा ज़रीफ़ अहमद, आसिम सैफी, असलम जावेद, फिरोज़ सैफी, दमनेश कुमार जी और आरिफ देहलवी ने भी अपना कलाम पेश किया। कार्यक्रम में हाजी के के नफीस सैफी,रजनीश झा, कलीम शाह,रियाज़ अंसारी, हनीफ अहमद सलीम मलिक, मुईद भाई, डॉ. शमशीर, मोहम्मद तकी सैफ़ी, असगर सैफ़ी, अहमद अली अंसारी, मज़हर सैफी, सैफी काउंट के नायब सदर मोहम्मद उमर सैफी, शमशाद सैफी, रियासत अली, नवाब अली,आहिल ,

 अब्दुल समद,उर्दू ख़्वांदगी मर्कज़ नसीरपुर द्वारका के छात्र-छात्राएँ तथा मरहूम रशीद सैदपुरी सैफ़ी के परिजन उपस्थित रहे। आख़िर में कन्वीनर इरफ़ान राही ने उर्दू अकादमी दिल्ली, शायरों, मेहमानों, मीडिया पार्टनर, एम वाई पी हाल, बच्चों, और सेवा संस्था का शुक्रिया अदा किया।\

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