सरकार देश भर में मिलावटी तेल बिकवा रही है Delhi Taxi & Tourist Transporters Association
0 Yogesh Bhatt 0
NEW DELHI : दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ने वायु प्रदूषण के नाम पर टैक्सी, बस एवं टूरिस्ट वाहन मालिकों तथा आम जनता को हो रही समस्याओं और उनके समाधान को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस Press Club of India में आयोजित की गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय समाट ने कहा कि वायु प्रदूषण के नाम पर वाहन उद्योग में जबरन नए वाहन बिकवाने का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद डीजल टैक्सी-बसें बंद की गईं, लेकिन 2001 में दिल्ली सरकार ने BS-II और 2011 में BS-IV मानक के वाहनों को स्वयं पंजीकृत किया। यदि ये वाहन प्रदूषणकारी थे, तो इन्हें दिल्ली/एनसीआर में पंजीकरण की अनुमति क्यों दी गई ?
संजय समाट ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले ही भारी आर्थिक नुकसान झेल चुका है और अब बिना किसी मुआवजे या लिखित गारंटी के BS-VI वाहन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो लगभग 30% तक महंगे हैं। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि BS-IV वाहन सरकार की अनुमति से कानूनी रूप से खरीदे गए थे, बीच में प्रतिबंध अन्यायपूर्ण है। RC, फिटनेस, बीमा और PUC वैध होने के बावजूद वाहन अवैध घोषित किए जा रहे हैं।
एसोसिएशन ने Commission for Air Quality Management, केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अपील की कि वे व्यावहारिक, वैज्ञानिक और मानवीय नीति अपनाएं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ लाखों परिवारों का रोजगार भी सुरक्षित रहे। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय समाट ने वायु प्रदूषण के नाम पर वाहन उद्योग में नए वाहन बिकवाने के माहौल पर चिंता व्यक्त की है।
NEW DELHI : दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ने वायु प्रदूषण के नाम पर टैक्सी, बस एवं टूरिस्ट वाहन मालिकों तथा आम जनता को हो रही समस्याओं और उनके समाधान को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस Press Club of India में आयोजित की गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय समाट ने कहा कि वायु प्रदूषण के नाम पर वाहन उद्योग में जबरन नए वाहन बिकवाने का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद डीजल टैक्सी-बसें बंद की गईं, लेकिन 2001 में दिल्ली सरकार ने BS-II और 2011 में BS-IV मानक के वाहनों को स्वयं पंजीकृत किया। यदि ये वाहन प्रदूषणकारी थे, तो इन्हें दिल्ली/एनसीआर में पंजीकरण की अनुमति क्यों दी गई ?
संजय समाट ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले ही भारी आर्थिक नुकसान झेल चुका है और अब बिना किसी मुआवजे या लिखित गारंटी के BS-VI वाहन खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो लगभग 30% तक महंगे हैं। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि BS-IV वाहन सरकार की अनुमति से कानूनी रूप से खरीदे गए थे, बीच में प्रतिबंध अन्यायपूर्ण है। RC, फिटनेस, बीमा और PUC वैध होने के बावजूद वाहन अवैध घोषित किए जा रहे हैं।
PUC प्रमाणपत्र सरकार जारी करती है, फिर उसे वाहन को प्रदूषणकारी बताना विरोधाभासी है। परिवहन क्षेत्र को ही निशाना बनाया जा रहा है, जबकि निर्माण-धूल, पेड़ कटाई जैसे बड़े प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण नहीं है। छोटे ट्रांसपोर्टर, मिडिल क्लास ऑपरेटर और पर्यटन उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ी मांग है कि BS-IV वाहनों को उनकी RC की पूरी वैध अवधि तक चलने दिया जाए। सरकार द्वारा जारी PUC प्रमाणपत्र का सम्मान किया जाए। यदि प्रतिबंध लगाया जाता है तो उचित मुआवजा / सब्सिडी / बाय-बैक नीति लागू की जाए। BS-IV और BS-VI वाहनों को RC समाप्त तक चलने की लिखित गारंटी दी जाए। निर्माण-धूल और पेड़ कटाई पर सख्त नियंत्रण किया जाए। किसी भी निर्णय से पहले ट्रांसपोर्ट संगठनों से परामर्श किया जाए।
दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ी मांग है कि BS-IV वाहनों को उनकी RC की पूरी वैध अवधि तक चलने दिया जाए। सरकार द्वारा जारी PUC प्रमाणपत्र का सम्मान किया जाए। यदि प्रतिबंध लगाया जाता है तो उचित मुआवजा / सब्सिडी / बाय-बैक नीति लागू की जाए। BS-IV और BS-VI वाहनों को RC समाप्त तक चलने की लिखित गारंटी दी जाए। निर्माण-धूल और पेड़ कटाई पर सख्त नियंत्रण किया जाए। किसी भी निर्णय से पहले ट्रांसपोर्ट संगठनों से परामर्श किया जाए।
एसोसिएशन ने Commission for Air Quality Management, केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अपील की कि वे व्यावहारिक, वैज्ञानिक और मानवीय नीति अपनाएं, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ लाखों परिवारों का रोजगार भी सुरक्षित रहे। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय समाट ने वायु प्रदूषण के नाम पर वाहन उद्योग में नए वाहन बिकवाने के माहौल पर चिंता व्यक्त की है।
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