28वें शहीद किसान स्मृति सम्मेलन में सांप्रदायिकता के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प

० आशा पटेल ० 
मिलतापी। किसान संघर्ष समिति द्वारा 12 जनवरी 1998 को मुलताई किसान आंदोलन पर हुए गोली चालन के 24 शहीद किसानों की 28वीं बरसी पर मंडल शहीद स्मारक और बस स्टैंड स्थित किसान स्तंभ पर किसान नेताओं ने 24 शहीद किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शहीद किसान स्मृति सम्मेलन का आयोजन मुलतापी में किया गया।
सम्मेलन में महात्मा गांधी के प्रपौत्र एवं 'हम भारत के लोग' के राष्ट्रीय संयोजक तुषार गांधी, मुम्बई हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी जी कोलसे पाटील, हिंद किसान मजदूर पंचायत के राष्ट्रीय महासचिव असीम रॉय के मुख्य आतिथ्य में, किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
सम्मेलन के दौरान तुषार गांधी द्वारा शहीद किसानों के परिजनों का सम्मान किया गया तथा शहीद किसानों की स्मृति में, 
डॉ सुनीलम के माताजी, पिताजी और जीजाजी की स्मृति में 30 प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। सम्मेलन में छिंदवाड़ा की 15 छात्राओं को पुरस्कृत किया गया जिन्होंने माचागोरा बांध प्रभावितों के सर्वे का कार्य किया है। तुषार गांधी ने कहा कि मुलतापी संघर्ष का तीर्थ है । यह देश के जन आंदोलनों की प्रेरणा स्थली है। उन्होंने कहा कि चंपारण के किसानों ने गांधी जी को महात्मा की उपाधि दी थी । वर्तमान सरकार किसानों और मजदूरों का हक छीनकर अडानी और अंबानी की संपत्ति बढ़ाने में लगी हुई है ।
पूर्व न्यायाधीश बी जी कोलसे पाटिल ने कहा कि यह सरकार लोगों को जीते जी मार रही है । आज सांप्रदायिकता से एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आर एस एस का लक्ष्य हिन्दू राष्ट्र बनाना है जिसमें पसीना बहाने वाले बहुजनों का कोई स्थान नहीं होगा। सम्मेलन के अन्य अतिथि महावीर समता संदेश के संपादक हिम्मत सेठ, पर्यावरणविद् सौम्य दत्ता, सपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव, जन स्वास्थ्य अभियान, (इंडिया) के संयोजक अमूल्य निधि, सामाजिक कार्यकर्ता गुड्डी, वरिष्ठ पत्रकार डॉ सलीम खान, सामाजिक कार्यकर्ता नवनीत सिंह गांधी, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन की विपाशा कौल, तेजस्विता ,
हरियाणा के भारतीय किसान यूनियन (परिवर्तनवादी) के चौधरी के पी सिंह, छत्तीसगढ़ के कृषि विशेषज्ञ महेश शर्मा, महाराष्ट्र से आए ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रभारी अजय , भारतीय किसान एवं मजदूर सेना के प्रदेश अध्यक्ष बबलू जाधव, किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एड शिव सिंह, राष्ट्रीय सचिव शशि भूषण चौहान, प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, दिनेश पांडे प्रदेश महासचिव सपा,मालवा निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री, प्रदेश सचिव दिनेश कुशवाह, श्रीराम सेन, सज्जे चंद्रवंशी, एड पुष्पेंद्र सिंह,
संत कुमार पटेल, प्रदेश सचिव रामकुमार सनोडिया, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सतीश जैन,शत्रुघन यादव, गोर सिंह भटेरा, मऊगंज जिला अध्यक्ष अजय पटेल, झाबुआ जिला अध्यक्ष कलसिंह मचार, सिवनी जिला अध्यक्ष पवन सनोडिया, इलाहाबाद जिला अध्यक्ष सुधीर क्रांतिकारी, अमरोहा से सुहेल कादरी, इलाहाबाद से प्रियांशु विद्रोही, मऊगंज जिला सचिव राजेश सिंह, सिंगरौली से सोनमती खैरवार, अखिलेश शाह, राजपाल सिंह, अर्जुन सिंह, रामदयाल सिंह, सोमारू सिंह, सिंगरौली, नर्मदापुरम से संतोष अग्निहोत्री , प्रभारी भगवत परिहार सहित देश भर के 10 राज्यों के 1000 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आभार बैतूल जिला अध्यक्ष जगदीश दोड़के ने व्यक्त किया।

 सम्मेलन में मुलतापी घोषणा पत्र 2026 जारी किया गया। घोषणा पत्र में सिंगरौली सहित पूरे देश भर में जल-जंगल-जमीन बचाने एवं जल – जंगल- जमीने बचाने की लड़ाई में शामिल नेताओं / किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमें वापस लेने की मांग की गई। कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने, अधिग्रहण हेतु ग्राम सभा की सहमति एवं सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय प्रभाव के परीक्षण कराने तथा इन मांगों के पूरा होने तक भूमि अधिग्रहण 2013 के कानून को अक्षरशः लागू करने की मांग की गई।

सम्मेलन में हर किसान परिवार को 10 हजार रुपए प्रधानमंत्री सम्मान निधि दिलाने, सभी राज्य सरकारों से केरल की तरह 13 सब्जियों की एमएसपी पर खरीद की व्यवस्था करने की मांग की गई तथा सभी किसान, मजदूर, आदिवासी, युवा एवं महिला संगठनों, मानव अधिकार संगठनों, राजनीतिक दलों से अपील करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के समर्थन में संघर्ष के लिए सड़कों पर उतरें की अपील की गई और कहा गया कि आजादी के आंदोलन के मूल्यों और समाजवादी आंदोलन के मूल्यों को लगातार धराशाई किया जा रहा है। लोकतंत्र और संविधान खतरे में है ।

 उग्र धर्मांधता तथा जातिवादी राजनीति के चलते बहुविधता पर आधारित सांस्कृतिक ताना - बाना ध्वस्त किया जा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में उभरी हुई जाति - धर्मनिरपेक्ष, सांस्कृतिक विविधता में एकता वाली भारत की संकल्पना पर आघात हो रहा है। हमारे पंचशील पर आधारित, सभी देशों से सौहार्द के संबंध रखने वाले, युद्धखोरी में मध्यस्थ की भूमिका अदा करने वाले पर राष्ट्रीय संबंध आज दुर्बल हो गए हैं। हमारे देश की संप्रभुता और निष्पक्षता के कारण विश्व भर में भारत का जो सम्मानजनक स्थान था वह अब नहीं रहा। हमारे पड़ोसियों के साथ हमारे संबंध दोस्ती के नहीं रहे।

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