दमन प्रतिरोधी प्रतिनिधिमंडल ने चौमूं में दमन के शिकार इलाकों का किया दोरा
० आशा पटेल ०
जयपुर | दमन प्रतिरोधी आंदोलन,राजस्थान के तीन प्रतिनिधिमंडलों ने चौमूं का दौरा किया। दमन प्रतिरोधी आंदोलन, राजस्थान की बैठक में प्रतिनिधिमंडलों की रिपोर्ट के आधार पर सामने आई जानकारी चोमूं में अल्पसंख्यकों के मौहल्लों में उच्चाधिकारियों की शह पर पुलिसकर्मियों ने जमकर तांडव किया । साथ ही पुलिस कर्मियों द्वारा अमानवीय दमन, लूट-पाट और तोड़-फोड़ की गई। घरों में घुसकर औरतों और बच्चों के साथ भी की बदसलूकी और मारपीट।
बिना न्यायालय की विधिवत अनुमति लिये स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा कुछ चुनिंदा लोगों के साथ मिलकर मस्जिद की यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया। जिसके तहत मस्जिद के बाहर लगे हुये पत्थरों को हटाकर रेलिंग लगाने की बात स्थानीय चौमूं थानाधिकारी ने कही और स्वत: ही अल्पसंख्यकों के कुछ चुनिंदा लोगों को साथ लेकर पुलिस की मौजूदगी में पत्थरों को हटाकर वहां लोहे की रैलिंग लगा भी दी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उस दौरान आम जनता ने तीन बार पुलिस पर पथराव किया और कई पुलिस कर्मी घायल हो गए जो कि कम विश्वसनीय लगती है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा आम जनता से मिलकर, घटनास्थल का दौरा करके, पीड़ितों-घायलों से मिलकर और वहां के तमाम हालात देखकर साफ़ जाहिर हो रहा था कि तनाव,अफ़रा-तफ़री व झड़प के दौरान ही पथराव हुआ होगा। परंतु उस पथराव की आड़ में सुबह होते होते स्थानीय और बाहरी पुलिसकर्मियों के द्वारा कुछ बावर्दी और बाकी बिना वर्दी के लोगों द्वारा मौहल्लों में, गलियों में, घरों में अंदर तक घुसघुस कर भयानक तोड़फोड़ और गुंडागर्दी का तांडव मचाया गया।
महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों , मरीजों को भी पीटते हुये घसीट कर घरों से बाहर निकाला गया और पुलिस थाने में लेकर जाने के बाद भी बुरी तरह मार-पीट की गई। इस दौरान गंभीर रूप से बीमारों , बुजुर्ग महिलाओं और एक मंदबुद्धि युवक को भी अत्यंत अमानवीय तरीके से मारा-पीटा गया। दर्जनों महिलाओं और पुरुषों को गिरफ्तार करके थाने में ले जाकर बंद कर दिया गया। सीकर सांसद का.अमराराम, स्थानीय विधायक शिखा मील और अन्य प्रबुद्ध लोगों द्वारा किये गये हस्तक्षेप के बाद देर शाम और रात तक महिलाओं और कुछ बच्चों को छोड़ दिया गया परन्तु बाकी अभी भी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 19 लोग गिरफ्तार हैं और डीसीपी पुलिस ने और भी लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया। प्रतिनिधिमंडल को पीड़ित महिलाओं ने बताया कि पुलिस बल के साथ केवल एक दो महिला पुलिसकर्मी ही थीं और बड़ी संख्या में बिना वर्दी के पुरुषों के द्वारा महिलाओं के साथ मारपीट की गई, घरों के दरवाज़े , अलमारियां, घरों में सामान, एसी तोड़ दिये, घरों में घुस कर बाथरूमों के दरवाजे तक तोड़ दिये। महिलाओं के साथ बदतमीजी और भद्दी गाली गलौच भी की गई। पुलिस कर्मियों ने लोगों के वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया, घरों के बाहर खड़ी मोटरसाइकिलों के साथ तोड़-फोड़ की।
जब कुछ महिलाओं ने वीडियो बनाने का प्रयास किया तो उनके मोबाइल भी छीन कर जब्त कर लिये।
पुलिस डीसीपी ने दावा किया कि पुलिस ने बहुत ही शांति से माहौल को संभाला और पुलिस का दबदबा बना रहे उसको ध्यान में रखते हुए कार्यवाही की। उन्होंने मस्ज़िद को लेकर किसी भी पहलकदमी को सिरे से नकारते हुये सारा दोष अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर डालते हुए उन पर अवैध अतिक्रमण करने का आरोप भी लगाया।पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है परंतु चौमूं में अत्यंत तनाव और दहशत का माहौल है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों मे भय और आक्रोश का माहौल है।
दहशत और आशंका की वज़ह से अधिकांश पुरुष और नौजवान घरों से बाहर हैं। घरों में केवल महिलायें, बच्चे और बुजुर्ग हैं। अल्पसंख्यकों की दुकानें, व्यावसाय और काम-धंधे बंद पड़े हुये हैं जिससे कि परिवारों के आर्थिक हालात भी ख़राब हो रहे हैं। लोगों में ज्यादा दुःख और आक्रोश इस बात का है कि हम पीढ़ियों से चौमूं के मूल निवासी हैं उसके बावजूद उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया गया जैसे कि हम आतंकवादी हैं।उनके अनुसार उनके घरों में की गई इस अनुचित और अमानवीय कार्यवाही में बड़ी संख्या में बाहरी लोग शामिल थे जिन्होंने महिलाओं व बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया।
जयपुर | दमन प्रतिरोधी आंदोलन,राजस्थान के तीन प्रतिनिधिमंडलों ने चौमूं का दौरा किया। दमन प्रतिरोधी आंदोलन, राजस्थान की बैठक में प्रतिनिधिमंडलों की रिपोर्ट के आधार पर सामने आई जानकारी चोमूं में अल्पसंख्यकों के मौहल्लों में उच्चाधिकारियों की शह पर पुलिसकर्मियों ने जमकर तांडव किया । साथ ही पुलिस कर्मियों द्वारा अमानवीय दमन, लूट-पाट और तोड़-फोड़ की गई। घरों में घुसकर औरतों और बच्चों के साथ भी की बदसलूकी और मारपीट।
बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों और मानसिक विक्षिप्त को भी नहीं बख्शा। स्थानीय प्रशासन, थानाधिकारी और उच्चाधिकारियों की भूमिका संदिग्ध और गैरजिम्मेदाराना थी । प्रतिनिधिमंडल ने घायलों को उपचार और पीड़ितों को नुक्सान का मुआवजा देने की मांग की है । दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्यवाही की मांग भी की है । प्रतिनिधिमंडलों ने चौमूं के पुलिस दमन का शिकार हुये पठानों का मौहल्ला, कुम्हारों का मौहल्ला, लुहारों का मौहल्ला और अन्य प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
प्रतिनिधिमंडल में सीपीआई(एम) के पोलित ब्यूरो सदस्य और सीकर सांसद का.अमराराम, सीपीआई(एम) जयपुर जिला सचिव डॉ.संजय "माधव", राज्य सचिव मंडल सदस्य कॉ.सुमित्रा चोपड़ा, सवाई सिंह (प्रेसिडेंट, FDCA राजस्थान), टी.सी. राहुल (सेवानिवृत्त न्यायाधीश एवं प्रेसिडेंट, राजस्थान बौद्ध महासभा), एडवोकेट सैयद सआदत अली (प्रेसिडेंट APCR ), मुज़म्मिल रिज़वी (सेक्रेटरी, APCR राजस्थान), एडवोकेट नईम आकिल जयपुर हाईकोर्ट (CPI Sec.), पीयूसीएल से ममता जेटली और राजेश जैन,भारत की जनवादी नौजवान सभा के जयपुर जिला अध्यक्ष मोहसिन पठान, जिला सचिव ऋतांश आजाद, जिला उपाध्यक्ष मनीष कुमार, किसान सभा से हरिशंकर मांडिया आदि शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने चौमूं प्रभावित इलाकों का दौरा कर पुलिस दमन के शिकार पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें ढ़ाढस बंधाया और दोषियों को दंडित करने के लिये हरसंभव कदम उठाने का यकीन दिलाया।प्रतिनिधिमंडल ने निर्दोष आमजनों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा किये गए अमानवीय व्यवहार व बर्बरता की कड़े शब्दो मे निंदा की है और राज्य सरकार से दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने की मांग की है|साथ ही पुलिस दमन के शिकार हुये घायलों की निःशुल्क चिकित्सा और समुचित इलाज की मांग की है । इसके साथ ही पुलिसकर्मियों द्वारा की गई भारी तोड़फोड़ और नुकसान की भरपाई के लिये मुआवजा देने की भी मांग की है।
दमन प्रतिरोध आन्दोलन, राजस्थान ने सरकार को आगाह किया है कि राज्य के अल्पसंख्यकों और वंचित तबकों को डराने-धमकाने की कोशिशों से बाज़ आये। राजस्थान के तमाम धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और संविधान में विश्वास रखने वाले लोग राज्य के अल्पसंख्यकों के साथ हैं। किसी को भी और किसी भी सूरत में राज्य के साम्प्रदायिक सद्भाव, भाईचारा और सौहार्द की विरासत को खत्म करने की साज़िश रचने की इजाजत नहीं दी जायेगी। न ही राजस्थान को पुलिस की गुंडागर्दी का अड्डा बनने की इजाजत दी जायेगी। राजस्थान की तमाम जनता एकजुट होकर ऐसी सभी ताकतों का मुकाबला करेगी।
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस द्वारा धरपकड़ करके फैलायी जा रही दहशत की कार्यवाही को तुरंत बंद करने और गिरफ्तार किए गए निर्दोष लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग भी की है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा हासिल की गई जानकारी के अनुसार चौमूं में बस स्टैंड पर स्थित एक मस्ज़िद को लेकर अनावश्यक हस्तक्षेप द्वारा विवाद पैदा किया गया है। पिछले लगभग 45 सालों से यह प्रकरण हाई कोर्ट में चल रहा है और लम्बे समय से माननीय उच्च न्यायालय द्वारा इस पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया हुआ है।
बिना न्यायालय की विधिवत अनुमति लिये स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा कुछ चुनिंदा लोगों के साथ मिलकर मस्जिद की यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया। जिसके तहत मस्जिद के बाहर लगे हुये पत्थरों को हटाकर रेलिंग लगाने की बात स्थानीय चौमूं थानाधिकारी ने कही और स्वत: ही अल्पसंख्यकों के कुछ चुनिंदा लोगों को साथ लेकर पुलिस की मौजूदगी में पत्थरों को हटाकर वहां लोहे की रैलिंग लगा भी दी।
तत्पश्चात किन्हीं कारणों से पुलिस ने पहले रैलिंग को थोड़ा पीछे करने और फिर कुछ समय बाद रेलिंग को हटाकर वापस पत्थर रखकर पुनः यथास्थिति बनाने का प्रस्ताव रखा। अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों ने उस प्रस्ताव को भी स्वीकार करते हुये स्वत: ही रैलिंग को हटाना शुरू भी कर दिया। परंतु इसी दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा जानबूझकर माहौल को ख़राब किया गया और अनावश्यक हस्तक्षेप कर तनाव पैदा किया गया।
इन अधिकारियों ने भड़काऊ बयानबाजी की और ना जाने किस मंसूबे के साथ रैलिंग को तोड़ने के लिए जेसीबी को मंगवाया गया जबकि उसकी वहां कोई जरूरत नहीं थी। जेसीबी मशीन को लाने के बाद मस्ज़िद को तोड़ने की अफवाहें फैल गई जिससे कि वहां भीड़ एकत्रित होनी शुरू हो गई। उसके बाद वहां मौजूद जनता पर पुलिस ने बल प्रयोग करते हुये लाठीचार्ज किया तो एकदम से अफरा तफरी मच गई व उसी दौरान आमजन के बीच मस्जिद को गिरा दिये जाने की अफवाहें फैल गई और हालात तनावपूर्ण हो गये। उसके बाद आमजन व पुलिस के बीच तनातनी और झड़पें हुई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उस दौरान आम जनता ने तीन बार पुलिस पर पथराव किया और कई पुलिस कर्मी घायल हो गए जो कि कम विश्वसनीय लगती है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा आम जनता से मिलकर, घटनास्थल का दौरा करके, पीड़ितों-घायलों से मिलकर और वहां के तमाम हालात देखकर साफ़ जाहिर हो रहा था कि तनाव,अफ़रा-तफ़री व झड़प के दौरान ही पथराव हुआ होगा। परंतु उस पथराव की आड़ में सुबह होते होते स्थानीय और बाहरी पुलिसकर्मियों के द्वारा कुछ बावर्दी और बाकी बिना वर्दी के लोगों द्वारा मौहल्लों में, गलियों में, घरों में अंदर तक घुसघुस कर भयानक तोड़फोड़ और गुंडागर्दी का तांडव मचाया गया।
महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों , मरीजों को भी पीटते हुये घसीट कर घरों से बाहर निकाला गया और पुलिस थाने में लेकर जाने के बाद भी बुरी तरह मार-पीट की गई। इस दौरान गंभीर रूप से बीमारों , बुजुर्ग महिलाओं और एक मंदबुद्धि युवक को भी अत्यंत अमानवीय तरीके से मारा-पीटा गया। दर्जनों महिलाओं और पुरुषों को गिरफ्तार करके थाने में ले जाकर बंद कर दिया गया। सीकर सांसद का.अमराराम, स्थानीय विधायक शिखा मील और अन्य प्रबुद्ध लोगों द्वारा किये गये हस्तक्षेप के बाद देर शाम और रात तक महिलाओं और कुछ बच्चों को छोड़ दिया गया परन्तु बाकी अभी भी पुलिस की गिरफ्त में हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 19 लोग गिरफ्तार हैं और डीसीपी पुलिस ने और भी लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया। प्रतिनिधिमंडल को पीड़ित महिलाओं ने बताया कि पुलिस बल के साथ केवल एक दो महिला पुलिसकर्मी ही थीं और बड़ी संख्या में बिना वर्दी के पुरुषों के द्वारा महिलाओं के साथ मारपीट की गई, घरों के दरवाज़े , अलमारियां, घरों में सामान, एसी तोड़ दिये, घरों में घुस कर बाथरूमों के दरवाजे तक तोड़ दिये। महिलाओं के साथ बदतमीजी और भद्दी गाली गलौच भी की गई। पुलिस कर्मियों ने लोगों के वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया, घरों के बाहर खड़ी मोटरसाइकिलों के साथ तोड़-फोड़ की।
जब कुछ महिलाओं ने वीडियो बनाने का प्रयास किया तो उनके मोबाइल भी छीन कर जब्त कर लिये।
पुलिस डीसीपी ने दावा किया कि पुलिस ने बहुत ही शांति से माहौल को संभाला और पुलिस का दबदबा बना रहे उसको ध्यान में रखते हुए कार्यवाही की। उन्होंने मस्ज़िद को लेकर किसी भी पहलकदमी को सिरे से नकारते हुये सारा दोष अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर डालते हुए उन पर अवैध अतिक्रमण करने का आरोप भी लगाया।पुलिस अधिकारियों के अनुसार स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है परंतु चौमूं में अत्यंत तनाव और दहशत का माहौल है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों मे भय और आक्रोश का माहौल है।
दहशत और आशंका की वज़ह से अधिकांश पुरुष और नौजवान घरों से बाहर हैं। घरों में केवल महिलायें, बच्चे और बुजुर्ग हैं। अल्पसंख्यकों की दुकानें, व्यावसाय और काम-धंधे बंद पड़े हुये हैं जिससे कि परिवारों के आर्थिक हालात भी ख़राब हो रहे हैं। लोगों में ज्यादा दुःख और आक्रोश इस बात का है कि हम पीढ़ियों से चौमूं के मूल निवासी हैं उसके बावजूद उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया गया जैसे कि हम आतंकवादी हैं।उनके अनुसार उनके घरों में की गई इस अनुचित और अमानवीय कार्यवाही में बड़ी संख्या में बाहरी लोग शामिल थे जिन्होंने महिलाओं व बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया।
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