कांग्रेस का संकल्प सिस्टम में मजबूती के साथ जनता की सेवा करेंगे
० पूजा शर्मा ०
जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा की अध्यक्षता में जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई। बैठक में राजस्थान में कांग्रेस के जिला प्रमुखों एवं जिला परिषद सदस्यों ने भाग लिया तथा सांसद मुरारी लाल मीणा, पूर्व मंत्री एवं विधायक अशोक चांदना भी बैठक में शामिल हुए।प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि वह स्वयं पंचायती राज संस्थाओं से चुनकर राजनीति में आए थे और पंचायती राज जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए आज विधायक, मंत्री और प्रदेशाध्यक्ष के मुकाम पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने हमेशा पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने का कार्य किया है, कांग्रेस ने तो संगठन में भी पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को स्थान देने का कार्य किया है। कांग्रेस के रायपुर अधिवेशन में प्रस्ताव पारित हुआ था कि जिला कांग्रेस कमेटियों की बैठक में जिला परिषदों के सदस्य स्थाई रूप से आमंत्रित होंगे
उन्होंने कहा कि दूसरा कुठाराघात केन्द्र सरकार ने देश में मनरेगा को बंद कर किया है, गांव में बैठे हुए व्यक्ति को स्वाभिमान से जीने का अधिकार इस योजना से मिला था, आत्मनिर्भरता के साथ वह अपने परिवार का पेट पाल रहा था, सेठ साहूकार के आगे हाथ फैलाने से बचाने का काम मनरेगा ने किया था, लेकिन उसे भी भाजपा की केन्द्र सरकार ने छीन लिया। मनरेगा कानून को पूरी तरह से खत्म कर दिया और शब्दों की चालाकी से नाम तो रख दिया,
जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा की अध्यक्षता में जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई। बैठक में राजस्थान में कांग्रेस के जिला प्रमुखों एवं जिला परिषद सदस्यों ने भाग लिया तथा सांसद मुरारी लाल मीणा, पूर्व मंत्री एवं विधायक अशोक चांदना भी बैठक में शामिल हुए।प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि वह स्वयं पंचायती राज संस्थाओं से चुनकर राजनीति में आए थे और पंचायती राज जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए आज विधायक, मंत्री और प्रदेशाध्यक्ष के मुकाम पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने हमेशा पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने का कार्य किया है, कांग्रेस ने तो संगठन में भी पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को स्थान देने का कार्य किया है। कांग्रेस के रायपुर अधिवेशन में प्रस्ताव पारित हुआ था कि जिला कांग्रेस कमेटियों की बैठक में जिला परिषदों के सदस्य स्थाई रूप से आमंत्रित होंगे
और इस निर्णय को राजस्थान में निष्पादित किया जा चुका है, यह निर्देश है कि सभी जिल कांग्रेस कमेटियों की बैठक में जिला परिषद के चुने हुए जनप्रतिनिधियों को शामिल करना आवश्यक है, क्योंकि निर्देशित किया गया है कि जिला कांग्रेस कमेटी में जिले के कांग्रेस पार्टी के टिकट पर जीते हुए पार्षद और जिला परिषद के सदस्य जिला कांग्रेस कमेटी के स्थाई सदस्य होंगे, जो पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधि चुने गए हैं वह आम जनता के बीच कार्य करेंगे और सिस्टम में मजबूती के साथ जनता की सेवा करेंगे तो आगे विधायक भी बन पाएंगे।
कांग्रेस के अनेक नेता पंचायती राज संस्थाओं से निकलकर विधायक और सांसद तक बने हैं, विधायक और सांसद पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों का सहयोग करें तो जमीन स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत होगी। इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कोई भी योग्य व्यक्ति पीछे ना रहे इसका ध्यान रखा जाएगा, क्योंकि पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए जो अपना समय देता है, उसका ध्यान पार्टी रखेगी, चाहे संगठन अथवा सत्ता में भागीदारी जरूर मिलेगी, जो इमानदारी के साथ काम कर रहा है, योग्य है, आने वाले पंचायती राज चुनाव में उसे पूर्ण स्थान मिले, इसके लिए पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर वह हर संभव मदद करेंगे।
वर्तमान सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के समय पर चुनाव नहीं कराकर प्रदेश हितों के साथ कुठाराघात किया है। केन्द्र सरकार ने राजस्थान को मिलने वाले 3000 करोड रुपए को इसीलिए रोक लिया कि पंचायती राज संस्थाओं के समय पर चुनाव नहीं हुए और 31 मार्च तक यदि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नहीं हुए तो यह पैसा प्रदेश को नहीं मिलेगा। राजस्थान सरकार ने जिस प्रकार पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने में देरी की उससे किसी को फायदा नहीं हुआ, ना विकास कार्य हुए, ना किसी जनप्रतिनिधि को फायदा हुआ है और जो प्रशासक लगाये गये हैं उससे भी कोई फायदा नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि दूसरा कुठाराघात केन्द्र सरकार ने देश में मनरेगा को बंद कर किया है, गांव में बैठे हुए व्यक्ति को स्वाभिमान से जीने का अधिकार इस योजना से मिला था, आत्मनिर्भरता के साथ वह अपने परिवार का पेट पाल रहा था, सेठ साहूकार के आगे हाथ फैलाने से बचाने का काम मनरेगा ने किया था, लेकिन उसे भी भाजपा की केन्द्र सरकार ने छीन लिया। मनरेगा कानून को पूरी तरह से खत्म कर दिया और शब्दों की चालाकी से नाम तो रख दिया,
लेकिन उससे पेट नहीं भरता, क्योंकि मनरेगा में काम का अधिकार मिलता था और नई योजना में काम का अधिकार नहीं है। मनरेगा योजना के तहत शत-प्रतिशत काम का अधिकार था और काम की गारंटी केन्द्र सरकार से मिलती थी। शत-प्रतिशत मजदूरी का पैसा केन्द्र सरकार देती थी, पगार का 90 प्रतिशत पैसा केन्द्र सरकार देती थी अब वह पैसा नहीं मिलेगा क्योंकि नई योजना के तहत केन्द्र सरकार ने यह प्रावधान कर दिया कि 40 प्रतिशत पैसा यदि राज्य सरकार देने के लिए तैयार हो तो केन्द्र सरकार 60 प्रतिशत पैसा देगी। आज की तारीख में कोई राज्य ऐसा नहीं है जिस पर बड़ा कर्जा ना हो
राजस्थान प्रदेश में ही सवा लाख करोड़ का कर्जा है और हालत ऐसे नहीं है कि इस योजना का खर्च राज्य सरकार उठा सके, क्योंकि कर्मचारियों की तनख्वाह देने का भी पैसा राज्य सरकार के पास नहीं है। मनमर्जी से केन्द्र सरकार ने यह कानून थोप दिया, किसी राज्य से सलाह और इजाजत भी नहीं ली, क्योंकि राज्य सरकार इस आशय के साथ काम कर रही है कि ना 9 मन तेल होगा, ना राधा नाचेगी, यानी की योजना के लिए कुछ करना ही ना पड़े, क्योंकि 40 प्रतिशत राज्य दे नहीं पाएंगे और 60 प्रतिशत केन्द्र देगा नहीं।
मनरेगा के तहत यह अधिकार था कि सबको बराबर कार्य मिलेगा जो आवेदन करेगा जितने लोगों को कार्य की आवश्यकता होगी वह दिया जाएगा, लेकिन अब केन्द्र सरकार तय करेगी की कहां काम देना है, किस क्षेत्र में किस जिले में काम देना है, ऐसा करके केवल और केवल उन स्थानों पर कार्य दिया जाएगा जहां से भाजपा के प्रतिनिधि चुनकर आते हो अन्यथा काम नहीं मिलेगा। इसलिए केन्द्र सरकार ने सोची-समझी साजिश के तहत गरीबों का अधिकार खत्म करने के लिए महानरेगा को खत्म किया है। केवल बीजेपी के जनप्रतिनिधि के क्षेत्र में ही केन्द्र सरकार पैसा देंगी, ऐसा भाजपा वर्तमान में भी कर चुकी है।
प्रदेश की सरकार में जो केन्द्र सरकार से फसल खराबे के मुआवजे के पैसे आए वह पैसा भी भाजपा ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में दिया है। 50 कांग्रेस विधायक जिनके क्षेत्र में फसल खराबा हुआ वहां पर मुआवजा का पैसा नहीं दिया गया, जबकि मुआवजा सभी किसानों को मिलना चाहिए था, लेकिन खराबा उन स्थानों पर दिखाया गया जहां बीजेपी का विधायक है। यदि आज मनरेगा बचाने की लड़ाई नहीं लड़ी तो नया कानून लागू हो जाएगा और उसके पश्चात ग्राम पंचायत में गरीब आदमी को जहां भी जनप्रतिनिधि कांग्रेस पार्टी से चुना जाएगा काम नहीं मिलेगा।
प्रदेश में चुनाव आयोग ने एफआईआर कराई और प्रदेश में 40 लाख लोगों के नाम काटने का काम किया गया। कांग्रेस में बूथ लेवल एजेंट नियुक्त कर दिए गये हैं, इसलिए अधिकांश कांग्रेस के नेता अपने वोटरों के नाम बचाने में कामयाब रहे और बीजेपी के नेता आज परेशान है। बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व ने भी प्रदेश सरकार के लोगों को डांट लगाई है, एसआईअर में 40 लाख लोग सूची का हिस्सा बताये गये, लेकिन पंचायती राज चुनाव के लिए इसी दूषित मतदाता सूची को राज्य सरकार काम में लेना चाहती है क्योंकि भाजपा को अनुमान हो गया है कि नई वोटर लिस्ट से तो उन्हें नुकसान ही होगा,
अब यह फर्जी नाम जुड़वाने का कार्य करेंगे, इसे रोकने के लिए सचेत रहना होगा। अब जो एसआईआर के बाद की वोटर लिस्ट सामने आ गई है और हमें ब्लू की मदद से जो वास्तविक वोटर है उसका नाम सूची में रहे और जो फर्जी है उसका नाम काटे कैसे यह कार्य करना होगा, यही हमारा धर्म है और कर्तव्य है। कांग्रेस के लोग जनता की अदालत में जाकर केन्द्र व राज्य सरकार की विफलताओं से अवगत कराएंगे और मनरेगा बंद कर जो कुठाराघात किया गया है इसकी भी जानकारी देकर जन-जागरण कर जनता की अदालत में भाजपा के विरुद्ध जन आंदोलन तैयार करेंगे।
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