सुरेंद्र पाल जोशी कला स्मृति ट्रस्ट ने किया बाल कला विकास कार्यक्रम

० आशा पटेल ० 
जयपुर | 
सुरेन्द्र पाल जोशी कला स्मृति ट्रस्ट की ओर से बाल कला विकास कार्यक्रम के अंतर्गत झालाना, ग्राम–मालवीय नगर स्थित सेंटर फॉर एंपावरमेंट ऑफ वीकर सेक्शन ( निःशुल्क सांध्यकालीन मोहल्ला पाठशाला ) में बच्चों के लिए एक रचनात्मक कला गतिविधि का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर बच्चों को स्केच बुक, पेंसिल, रबर, शार्पनर, स्केल एवं क्रेयॉन्स जैसी आवश्यक कला सामग्री वितरित की गई। साथ ही अनुभवी कलाकारों द्वारा ड्रॉइंग एवं रंगों के प्रयोग का लाइव कला डेमोंस्ट्रेशन देकर कला की बुनियादी समझ प्रदान की गई।
कला डेमोंस्ट्रेशन सत्र में मनी भारती ने बच्चों को सरल एवं रोचक तरीके से कोलाज पेंटिंग के माध्यम से कला की विभिन्न तकनीकों से परिचित कराया। उन्होंने मैगज़ीन एवं समाचार पत्रों की कटिंग से लैंडस्केप, पोर्ट्रेट एवं अन्य रचनात्मक चित्र बनाकर प्रैक्टिकल रूप में समझाया। साथ ही आगामी मकर संक्रांति एवं पतंग उत्सव विषय पर बनाई गई पेंटिंग ने बच्चों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जिससे बच्चों में कला के प्रति नई रुचि देखने को मिली।
कृष्णा जाग्रत द्वारा ड्रॉइंग एवं स्केचिंग का डेमोंस्ट्रेशन दिया गया। उन्होंने फ्री-हैंड ड्रॉइंग में लाइनों के महत्व, पेंसिल के सही प्रयोग तथा हल्की-गहरी लाइनों की तकनीक को लाइव स्केच के माध्यम से समझाया। इस दौरान उन्होंने एक लाइव पोर्ट्रेट भी बनाकर दिखाया, जिससे बच्चों को पोर्ट्रेट निर्माण की प्रक्रिया की समझ मिली।

ट्रस्ट के समन्वयक मुकेश कुमार ज्वाला ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में प्रारंभिक स्तर से ही कला के प्रति रुचि विकसित करना तथा उनकी रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करना है। बच्चों की सहभागिता और उत्साह से यह स्पष्ट हुआ कि कला उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है। ट्रस्ट की संस्थापक संगीता सुरेन्द्र पाल जोशी ने बताया कि बाल कला विकास कार्यक्रम के अंतर्गत भविष्य में शहर के अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रकार की कला गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को कला से जोड़ा जा सके।

कार्यक्रम के समापन पर सभी बच्चों को आर्ट किट प्रदान की गई तथा उन्हें नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित किया गया। ट्रस्ट द्वारा यह भी बताया गया कि आगामी समय में पुनः बच्चों की कलाकृतियों का अवलोकन कर उन्हें और बेहतर मार्गदर्शन दिया जाएगा। पाठशाला प्रबंधन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण एवं रचनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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