कृष्ण चंद्र सहाय स्मृति समारोह : सवाई सिंह को सहाय स्मृति सम्मान
० आशा पटेल ०
वरिष्ठ पत्रकार धर्मवीर कटेवा ने कहा सहाय की पारदर्शिता ऐसी की हर साल अपना खाता सार्वजनिक करते. सबकी खेर खबर लेते. विशिष्ट अतिथि किशन सिंह चौहान ने कहा कि किसी के कष्ट को दूर करने में सहाय जी अपनी ताकत से बाहर जाकर भी हर तरह की मदद करने को सदैव तर्त्पर रहते. उनकी नजर में कोई दूसरा था ही नहीं. सभी अपने थे. उन्होंने गाँधी को पहले आत्मसात किया फ़िर समाज को संदेश दिया.
शिक्षिका नेहा शर्मा ने कहां कि गांधी जी कहा करते थे कि लापरवाही अज्ञानता से भी ज्यादा घातक है, हानिकारक है.सहाय जी के जीवन में लापरवाही का कोई स्थान नहीं था. सहाय जी की पुत्री मधु सहाय जोशी द्वारा आभार एवं सहाय की नातिन अनु सहाय जोशी द्वारा कार्यक्रम का संयोजन, नियोजन व संचालन किया गया. कार्यक्रम में एडवोकेट उमेश चंद्र शर्मा, गोपाल शरण पारीख, श्रीमती दुर्गा वर्मा, शोभना माहेश्वरी, कौशल सत्यार्थी, भुवनेश जैन, एस. एन. राव, नरेंद्र कुमार व्यास, मंगल देव पारीख, बसंत हरियाना, महावीर प्रसाद, भोजराज सिंह, आदि सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.
जयपुर | गांधीवादी कृष्ण चन्द्र सहाय की 6 ठवीं पुण्य तिथि पर वरिष्ठ अधिवक्ता हाई कोर्ट राजस्थान प्रेम कृष्ण शर्मा की अध्यक्षता में राजस्थान समग्र सेवा संघ परिसर के गाँधी अध्ययन केंद्र के शारदा भवन में आयोजित समारोह में सहाय के गांधी विचार, चम्बल घाटी शांति मिशन, देहदान, जीवन भर अन्तिम व्यक्ति की मुक्ति को लेकर किये गये अतुलनीय योगदान पर बड़ी संख्या में गांधीवादी विचारकों, समर्थकों, समाजसेवियों, साहित्यकारों, पत्रकारों आदि ने हिस्सा लिया.मुख्य अतिथि राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष, कोटा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बी. एम. शर्मा,अकबरपुर कानपुर से पधारे विशिष्ट अतिथि किशन सिंह चौहान सहित अतिथिगण ने इस मौके पर गांधी विचार, आचरण, गांधी सत्याग्रह को समर्पित वरिष्ठ गांधीवादी सवाई सिंह को गांधी विचार के माध्यमों से की गई उनकी अतुलनीय सेवाओं हेतु फूल माला, बुकें, पटका, दुशाला, सम्मान पत्र,खादी जैकेट,व साफ़ा बांधकर 'कृष्ण चंद्र सहाय स्मृति सम्मान' से विभूषित किया मुख्य अतिथि प्रो. बी. एम. शर्मा ने कहा कि सहाय सबसे पहले समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के सम्पर्क में आये. किसी कार्यक्रम को सम्पन्न करने जब डॉ. लोहिया सम्भवतः कानपुर प्लेटफार्म की ओर जा रहे थे. कृष्ण चन्द्र सहाय उनको भीख मांगते नजर आये. डॉ. लोहिया ने समाजवादी कार्यकर्ताओं को उसी वक्त आदेशित किया कि वह सहाय जी के रहने के बन्दोबस्त के साथ-साथ उनकी शिक्षा की भी मुक्कमल व्यवस्था करें.
हिन्दुस्तान में खासतौर पर उत्तर प्रदेश में देश की सड़ी-गली व्यवस्था के खिलाफ तब लोक नायक जय प्रकाश जी का आंदोलन शुरू हुआ था.तो उत्तर प्रदेश में महावीर भाई और सहाय इसके कर्ता-धर्ता थे.
समारोह के अध्य्क्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेम कृष्ण शर्मा ने कहा की सहाय निष्ठावान गांधीवादी कार्यक्रर्ता थे.उनके लिबास से ही हमे प्रेरणा मिलती थी. जीवन भर मूल्यों के लिए जिये. डाकूओं के हदय परिवर्तन कराने में उनका बड़ा योगदान था. मै उनकी स्मृतियों को प्रणाम करता हूं.सहाय जी के जीवन को नापना, तोलना, जांचना, समझना आसान नही है.
समारोह के अध्य्क्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेम कृष्ण शर्मा ने कहा की सहाय निष्ठावान गांधीवादी कार्यक्रर्ता थे.उनके लिबास से ही हमे प्रेरणा मिलती थी. जीवन भर मूल्यों के लिए जिये. डाकूओं के हदय परिवर्तन कराने में उनका बड़ा योगदान था. मै उनकी स्मृतियों को प्रणाम करता हूं.सहाय जी के जीवन को नापना, तोलना, जांचना, समझना आसान नही है.
अपनाना तो बहुत ही हिम्मत, क्षमता शक्ति और आत्मबल का काम है. गाँधी विचार की शक्ति से निरंतर काम करने वाले 'श्री कृष्ण चंद्र सहाय स्मृति सम्मान'से विभूषित वरिष्ठ गाँधीवादी सवाई सिंह ने कहा कि सहाय जी बड़ी से बड़ी चुनौती को सहजता से स्वीकार करने की क्षमता, हिम्मत रखने वाला व्यक्तित्व है. चाहे गोवा मुक्ति का सत्याग्रह हो, चबंल घाटी में अंहिसा का बेमिसाल प्रयोग हो, चंदनवन में चन्दन तस्कर बीरप्पन से मिलने जाने का मामला या साथियों द्वारा जीवन यापन के लिए प्राप्त सम्मान राशि को आपदाग्रस्तों को देने का निर्णय.
वे जो सोचते और उसमें कूद पढ़ते थे. कृष्ण चंद्र सहाय स्मृति सम्मान पाए जाने पर में आप सबका आभारी हू, कृतज्ञा ज्ञापित करता हूँ . आगरा से पधारे आयोजन समिति के प्रमुख पत्रकार हरीश चिमटी ने कहा कि उनकी वेषभूषा पहनावा अपने ही ढंग का था. सफेद खादी का बनियान रूपी जेब लगा छोटा कुर्ता, सफेद खादी की लुगी, कंधे पे खादी का थैला, साइकिल की सवारी सहाय की पहचान बन गई. मै आप सबका दिल की गहराइयों से आयोजन समिति की तरफ़ से बार बार स्वागत करता हूँ.
वरिष्ठ पत्रकार धर्मवीर कटेवा ने कहा सहाय की पारदर्शिता ऐसी की हर साल अपना खाता सार्वजनिक करते. सबकी खेर खबर लेते. विशिष्ट अतिथि किशन सिंह चौहान ने कहा कि किसी के कष्ट को दूर करने में सहाय जी अपनी ताकत से बाहर जाकर भी हर तरह की मदद करने को सदैव तर्त्पर रहते. उनकी नजर में कोई दूसरा था ही नहीं. सभी अपने थे. उन्होंने गाँधी को पहले आत्मसात किया फ़िर समाज को संदेश दिया.
पत्रकार आशा पटेल ने सहाय के साथ बिताये दिनों के अपने संस्मरण साझा करते हुए कहा कि सहाय जी मुझको अपनी मानस पुत्री मानते थे. इतना ही नहीं उन्होंने जब वसुन्धरा सरकार द्वारा गोवा मुक्ति आन्दोलन की पेंशन मंजूर हो गई तो उनका पहला फोन मुझे आया | कहने लगे मे इस पेंशन को कहाँ रखूँगा ? मैने तुम्हारे अख़बार के लिए एक 2100 रु का चेक डाक से भेज दिया है | सहाय जी , जो जीवन भर कंचन मुक्ति, बंधन मुक्ति, गोवा मुक्ति, हिंसा मुक्त समाज, साद्गी, समता, सद्भावना, सौहार्द, सांझापन, स्वलम्बन, अन्तिम व्यक्ति की मुक्ति को लेकर सक्रिय रहे.
शिक्षिका नेहा शर्मा ने कहां कि गांधी जी कहा करते थे कि लापरवाही अज्ञानता से भी ज्यादा घातक है, हानिकारक है.सहाय जी के जीवन में लापरवाही का कोई स्थान नहीं था. सहाय जी की पुत्री मधु सहाय जोशी द्वारा आभार एवं सहाय की नातिन अनु सहाय जोशी द्वारा कार्यक्रम का संयोजन, नियोजन व संचालन किया गया. कार्यक्रम में एडवोकेट उमेश चंद्र शर्मा, गोपाल शरण पारीख, श्रीमती दुर्गा वर्मा, शोभना माहेश्वरी, कौशल सत्यार्थी, भुवनेश जैन, एस. एन. राव, नरेंद्र कुमार व्यास, मंगल देव पारीख, बसंत हरियाना, महावीर प्रसाद, भोजराज सिंह, आदि सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.
सवाई सिंह को सहाय स्मृति सम्मान फूल माला रोहित रावी, सूत माला भोज राज सिंह, इलायची माला महावीर प्रसाद, श्री फल वंदना तिवारी, शाल...प्रो. बी. एम. शर्मा एवं किशन सिंह चौहान, साफा अब्दुल हामिद, बुके साधना अवस्थी- लखनऊ, सम्मान पत्र संजय सहाय- मधु सहाय जोशी द्वारा प्रदान किया गया.
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