पढ़ाई के साथ दिमाग को रिचार्ज करना भी जरूरी : धोनी
नई दिल्ली : एलेन करियर इंस्टीट्यूट के डिजिटल प्लेटफॉर्म एलेन ऑनलाइन ने अपनी स्टूडेंट कन्वर्सेशन सीरीज़ ‘राइज़ टू द टॉप’ का दूसरा एपिसोड जारी किया है। इसमें महेन्द्र सिंह धोनी ने दो युवा ओलंपियाड विजेताओं हरियाणा के आदिश जैन और पश्चिम बंगाल के कृष्णार्घ्य प्रमाणिक से बातचीत की।इस एपिसोड में हरियाणा के आदिश जैन की प्रेरक कहानी सामने आती है। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ दोबारा तैयारी की और आगे चलकर इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीता। वहीं पश्चिम बंगाल के कृष्णार्घ्य प्रमाणिक ने कम उम्र में ऑनलाइन पढ़ाई के जरिए इंटरनेशनल मैथेमैटिक्स ओलंपियाड में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया।
यह सीरीज़ प्रतिभाशाली छात्रों और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को एक मंच पर लाती है, जहाँ वे खुलकर महत्वाकांक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता हासिल करने के लिए जरूरी सोच पर बातचीत करते हैं। इस एपिसोड में धोनी ने छात्रों से जिज्ञासा, ओलंपियाड की तैयारी और बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ते समय दबाव को संभालने के तरीकों पर चर्चा की।
धोनी ने प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के समय संतुलन बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया। खेल और पढ़ाई के बीच समानता बताते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी तैयारी पर पूरा ध्यान देना चाहिए, लेकिन साथ ही अपने मन को तरोताजा रखने के लिए भी समय निकालना जरूरी है।
एमएस धोनी ने कहा, “पढ़ाई के दौरान ‘स्विच ऑन’ और ‘स्विच ऑफ’ करना बहुत जरूरी है। मेरे लिए बाइक चलाना या बैडमिंटन और पैडल जैसे खेल खेलना दिमाग को तरोताजा करने का तरीका है। छात्रों को भी कम उम्र में अलग-अलग खेलों को आजमाना चाहिए, क्योंकि जब तक आप कुछ नया नहीं करते, तब तक यह पता नहीं चलता कि आपकी असली क्षमता किस क्षेत्र में है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीखने की प्रक्रिया में जिज्ञासा और सवाल पूछना बेहद जरूरी है। छात्रों को संकोच किए बिना सवाल पूछने चाहिए, क्योंकि यही आदत उन्हें आगे बढ़ने में मदद करती है। युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में मेंटर्स और माता-पिता की भूमिका बेहद अहम होती है। छात्रों ने भी माना कि परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें प्रेरित रहने और अपने शैक्षणिक लक्ष्यों पर लगातार ध्यान बनाए रखने में बड़ी मदद की।
राइज़ टू द टॉप के माध्यम से एलेन ऑनलाइल ऐसा मंच तैयार करना चाहता है, जहाँ छात्र प्रेरणादायक अनुभवों से सीख सकें और प्रतिस्पर्धी माहौल में सफलता पाने के लिए जरूरी अनुशासन, जिज्ञासा और सही सोच को समझ सकें।
यह सीरीज़ प्रतिभाशाली छात्रों और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को एक मंच पर लाती है, जहाँ वे खुलकर महत्वाकांक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता हासिल करने के लिए जरूरी सोच पर बातचीत करते हैं। इस एपिसोड में धोनी ने छात्रों से जिज्ञासा, ओलंपियाड की तैयारी और बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ते समय दबाव को संभालने के तरीकों पर चर्चा की।
धोनी ने प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के समय संतुलन बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया। खेल और पढ़ाई के बीच समानता बताते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी तैयारी पर पूरा ध्यान देना चाहिए, लेकिन साथ ही अपने मन को तरोताजा रखने के लिए भी समय निकालना जरूरी है।
एमएस धोनी ने कहा, “पढ़ाई के दौरान ‘स्विच ऑन’ और ‘स्विच ऑफ’ करना बहुत जरूरी है। मेरे लिए बाइक चलाना या बैडमिंटन और पैडल जैसे खेल खेलना दिमाग को तरोताजा करने का तरीका है। छात्रों को भी कम उम्र में अलग-अलग खेलों को आजमाना चाहिए, क्योंकि जब तक आप कुछ नया नहीं करते, तब तक यह पता नहीं चलता कि आपकी असली क्षमता किस क्षेत्र में है।
उन्होंने यह भी कहा कि सीखने की प्रक्रिया में जिज्ञासा और सवाल पूछना बेहद जरूरी है। छात्रों को संकोच किए बिना सवाल पूछने चाहिए, क्योंकि यही आदत उन्हें आगे बढ़ने में मदद करती है। युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में मेंटर्स और माता-पिता की भूमिका बेहद अहम होती है। छात्रों ने भी माना कि परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें प्रेरित रहने और अपने शैक्षणिक लक्ष्यों पर लगातार ध्यान बनाए रखने में बड़ी मदद की।
राइज़ टू द टॉप के माध्यम से एलेन ऑनलाइल ऐसा मंच तैयार करना चाहता है, जहाँ छात्र प्रेरणादायक अनुभवों से सीख सकें और प्रतिस्पर्धी माहौल में सफलता पाने के लिए जरूरी अनुशासन, जिज्ञासा और सही सोच को समझ सकें।

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