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मार्च 11, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अमोल पालेकर होंगे मेटा 2026 के लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित

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० योगेश भट्ट ०  नई दिल्ली : महिंद्रा ग्रुप द्वारा स्थापित और टीमवर्क आर्ट्स द्वारा प्रस्तुत महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवॉर्ड्स (मेटा ) का 21वां संस्करण 19 से 25 मार्च के बीच नई दिल्ली में आयोजित होगा। इस दौरान देश भर से चुने गयी उत्कृष्ट रंगमंचीय प्रस्तुतियों को एक मंच पर लाया जाएगा। इस वर्ष मेटा महान अभिनेता, निर्देशक और रंगकर्मी अमोल पालेकर को मेटा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित करेगा। यह सम्मान भारतीय रंगमंच और सिनेमा में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया जा रहा है। कई दशकों के लंबे करियर में पालेकर अपनी विशिष्ट कलात्मक दृष्टि और मंच तथा सिनेमा दोनों माध्यमों में अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते रहे हैं। अभिनेता, निर्देशक और रचनात्मक दृष्टा के रूप में उनके काम ने समकालीन भारतीय अभिनय कला पर स्थायी प्रभाव छोड़ा है। पालेकर ने भारतीय रंगमंच को नए आयाम दिए और उसे लोकतांत्रिक बनाया और थिएटर को पार्क, छत, कैंटीन और गैराज तक ले जाकर नये प्रयोग किए। उनके फिल्मी करियर ने भी हिंदी सिनेमा में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। 1970 के दशक में पालेकर ‘आम आदमी’ की सहज छवि से दर्शकों के प्रिय बन...

जन आक्रोश रैली में महिलाओं ने,महिला हिंसा और शराब के खिलाफ बुलंद की आवाज

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० आशा पटेल ०  राजातालाब /वाराणसी। घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और यौन उत्पीड़न के खिलाफ हजारों ग्रामीण महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। आक्रोशित महिलाओं ने उत्तर प्रदेश में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की जोरदार मांग उठाई।  घरेलू कामगार महिला स्वयं सहायता समूह, किशोरी संगठन, लोक समिति, दिहाड़ी मजदूर संगठन और आशा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महिला महापंचायत में आराजी लाइन और सेवापुरी ब्लॉक के करीब 80 गांवों से लगभग तीन हजार महिलाएं शामिल हुईं। महिलाओं ने ढोल-नगाड़ों, तख्तियों और बैनरों के साथ राजातालाब बाजार से तहसील तक जनआक्रोश रैली निकाली। हजारों महिलाओं के प्रदर्शन से जीटी रोड पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई। महिलाओं और लड़कियों की हुंकार से पूरा तहसील परिसर गूंज उठा। रैली के दौरान महिलाओं ने “चुप नहीं रहना है, हिंसा नहीं सहना है”, “महिला हिंसा बंद करो”, “छेड़खानी पर रोक लगाओ”, “शराब बेचना बंद करो”, “हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो”, “भीख नहीं अधिकार चाहिए, जीने का सम्मान चाहिए” तथा “भेदभाव मिटाएंगे, नया समाज बनाएंगे” जैसे नारे लगाए। तहसील पहुंचकर...