डॉ.राम मनोहर लोहिया की जन्मस्थली अब ‘लोहिया नगर’ के नाम से जाना जाएगा
लोहिया नगर : समाजवादी चिंतक, प्रखर राष्ट्रवादी डॉ.राममनोहर लोहिया की जन्मस्थली अकबर पुर ( जनपद आंबेडकर नगर ) को अब ‘लोहिया नगर’ के नाम से जाना जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय डॉ. लोहिया के विचारों, संघर्षों और सामाजिक योगदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। इसके साथ ही अकबरपुर रेलवे स्टेशन को भी डॉ. राममनोहर लोहिया के नाम से संबोधित किए जाने का निर्णय लिया गया है।
यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि प्रदेश में वर्षों तक समाजवादी पार्टी की सरकारें रहने के बावजूद अपने ही वैचारिक पुरोधा के सम्मान में ऐसा कोई ठोस और निर्णायक कदम नहीं उठाया गया। जिन विचारों और आदर्शों पर राजनीति करने का दावा किया जाता रहा, उनके प्रतीक व्यक्तित्व के प्रति यह उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण कही जाएगी।
आजकल एक धारणा या कहें एक राजनीतिक ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है कि तथाकथित समाजवादी राजनीति, वैचारिक रूप से कांग्रेस के अधिक निकट दिखाई देती है। तमाम वैचारिक विरोधों और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद यह तथ्य सामने आ रहा है कि जिन कार्यों को समाजवादी सरकारों को करना चाहिए था, उन्हें वर्तमान में भाजपा सरकार व्यवहार में उतार रही है।
डॉ. लोहिया के नाम से उनकी जन्मस्थली और रेलवे स्टेशन को जोड़ना केवल नामकरण नहीं, बल्कि उनके विचारों को सार्वजनिक स्मृति में स्थायी रूप से स्थापित करने का प्रयास है। यह कदम न केवल ऐतिहासिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विचारधारा से परे जाकर राष्ट्र के महापुरुषों को सम्मान देना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।
यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि प्रदेश में वर्षों तक समाजवादी पार्टी की सरकारें रहने के बावजूद अपने ही वैचारिक पुरोधा के सम्मान में ऐसा कोई ठोस और निर्णायक कदम नहीं उठाया गया। जिन विचारों और आदर्शों पर राजनीति करने का दावा किया जाता रहा, उनके प्रतीक व्यक्तित्व के प्रति यह उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण कही जाएगी।
आजकल एक धारणा या कहें एक राजनीतिक ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है कि तथाकथित समाजवादी राजनीति, वैचारिक रूप से कांग्रेस के अधिक निकट दिखाई देती है। तमाम वैचारिक विरोधों और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद यह तथ्य सामने आ रहा है कि जिन कार्यों को समाजवादी सरकारों को करना चाहिए था, उन्हें वर्तमान में भाजपा सरकार व्यवहार में उतार रही है।
डॉ. लोहिया के नाम से उनकी जन्मस्थली और रेलवे स्टेशन को जोड़ना केवल नामकरण नहीं, बल्कि उनके विचारों को सार्वजनिक स्मृति में स्थायी रूप से स्थापित करने का प्रयास है। यह कदम न केवल ऐतिहासिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विचारधारा से परे जाकर राष्ट्र के महापुरुषों को सम्मान देना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

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