एआईसी–जेकेएलयू से जुड़े स्टार्टअप ने किया ठोस रॉकेट मोटर का स्थैतिक अग्नि परीक्षण
० आशा पटेल ०
जयपुर : अटल इनक्यूबेशन सेंटर–जेके लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय (एआईसी–जेकेएलयू) से जुड़े स्टार्टअप बीएएएस टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड ने जयपुर स्थित जेके लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय के सुरक्षित परीक्षण स्थल पर अपने ठोस रॉकेट मोटर का सफल स्थैतिक अग्नि परीक्षण किया। यह परीक्षण कंपनी की प्रोपल्शन तकनीक के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।यह परीक्षण एक मजबूत परीक्षण स्टैंड पर किया गया, जिसमें सटीक माप के लिए कैलिब्रेटेड लोड सेल्स लगाए गए थे। इनकी मदद से परीक्षण के दौरान उत्पन्न थ्रस्ट (बल) और दहन कक्ष के दबाव को वास्तविक परिस्थितियों में मापा और लगातार निगरानी की गई। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य मोटर केसिंग की मजबूती को परिचालन दबाव पर परखना, थ्रस्ट से जुड़े प्रदर्शन डेटा को रिकॉर्ड करना और कंपनी द्वारा विकसित स्वदेशी वायरलेस इग्निशन प्रणाली की विश्वसनीयता को जांचना था।
परीक्षण की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि वायरलेस इग्निशन प्रणाली को लगभग 500 मीटर की सुरक्षित दूरी से सफलतापूर्वक सक्रिय किया गया। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इग्निशन शुरू हुआ और हॉट फायर परीक्षण नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से सम्पन्न हुआ, जिससे प्रणाली के सफल एकीकरण और संचालन क्षमता की पुष्टि हुई।
परीक्षण के बाद किए गए विश्लेषण में पाया गया कि परीक्षण के दौरान नोज़ल में अवरोध (क्लॉगिंग) उत्पन्न हो गया था। इसके कारण दहन कक्ष का दबाव अचानक बढ़ गया और लगभग 36 किलो न्यूटन का अधिकतम बल उत्पन्न हुआ। इस दबाव ने मोटर केसिंग की संरचनात्मक सीमा को पार कर लिया, जिसके कारण कार्बन फाइबर धागों में परतें अलग होने (डेलैमिनेशन) की स्थिति पैदा हो गई।
हालांकि अधिक दबाव के कारण संरचनात्मक क्षति हुई, फिर भी इस परीक्षण से टीम को महत्वपूर्ण तकनीकी डेटा और उपयोगी इंजीनियरिंग जानकारियां प्राप्त हुई हैं। परीक्षण के दौरान रिकॉर्ड किए गए थ्रस्ट और दबाव से जुड़े आंकड़ों का अब विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि मोटर की संरचना, नोज़ल प्रवाह और संपूर्ण प्रणाली की विश्वसनीयता को और बेहतर बनाया जा सके।
तनमय कानमहाले, संस्थापक, बीएएएस टेक्नोलॉजीज़ ने कहा,"हर परीक्षण हमें नई सीख देता है। यह स्थैतिक अग्नि परीक्षण हमारे इग्निशन सिस्टम को परखने और मोटर डिज़ाइन के अगले संस्करण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने में बेहद उपयोगी साबित हुआ है। निधि कच्छावा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एआईसी–जेकेएलयू ने कहा ,
परीक्षण के बाद बीएएएस टेक्नोलॉजीज़ ने प्रारंभिक विफलता विश्लेषण पूरा कर लिया है और डिज़ाइन में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी अब नोज़ल की संरचना और मोटर के संपूर्ण कॉन्फिगरेशन का दोबारा मूल्यांकन कर रही है, ताकि भविष्य में नोज़ल में अवरोध की संभावना कम हो और दहन कक्ष के दबाव को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सके। सुधारित डिज़ाइन के साथ रॉकेट मोटर का अगला स्थैतिक अग्नि परीक्षण अगले तीन से चार महीनों के भीतर किए जाने की योजना है।
लगातार परीक्षण और डेटा आधारित इंजीनियरिंग सुधारों के माध्यम से बीएएएस टेक्नोलॉजीज़, एआईसी–जेकेएलयू के सहयोग से, स्वदेशी प्रोपल्शन तकनीक को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है और एयरोस्पेस क्षेत्र में सुरक्षित, विश्वसनीय और उच्च प्रदर्शन वाली तकनीक विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जयपुर : अटल इनक्यूबेशन सेंटर–जेके लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय (एआईसी–जेकेएलयू) से जुड़े स्टार्टअप बीएएएस टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड ने जयपुर स्थित जेके लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय के सुरक्षित परीक्षण स्थल पर अपने ठोस रॉकेट मोटर का सफल स्थैतिक अग्नि परीक्षण किया। यह परीक्षण कंपनी की प्रोपल्शन तकनीक के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।यह परीक्षण एक मजबूत परीक्षण स्टैंड पर किया गया, जिसमें सटीक माप के लिए कैलिब्रेटेड लोड सेल्स लगाए गए थे। इनकी मदद से परीक्षण के दौरान उत्पन्न थ्रस्ट (बल) और दहन कक्ष के दबाव को वास्तविक परिस्थितियों में मापा और लगातार निगरानी की गई। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य मोटर केसिंग की मजबूती को परिचालन दबाव पर परखना, थ्रस्ट से जुड़े प्रदर्शन डेटा को रिकॉर्ड करना और कंपनी द्वारा विकसित स्वदेशी वायरलेस इग्निशन प्रणाली की विश्वसनीयता को जांचना था।
परीक्षण की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि वायरलेस इग्निशन प्रणाली को लगभग 500 मीटर की सुरक्षित दूरी से सफलतापूर्वक सक्रिय किया गया। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इग्निशन शुरू हुआ और हॉट फायर परीक्षण नियंत्रित और सुरक्षित तरीके से सम्पन्न हुआ, जिससे प्रणाली के सफल एकीकरण और संचालन क्षमता की पुष्टि हुई।
परीक्षण के बाद किए गए विश्लेषण में पाया गया कि परीक्षण के दौरान नोज़ल में अवरोध (क्लॉगिंग) उत्पन्न हो गया था। इसके कारण दहन कक्ष का दबाव अचानक बढ़ गया और लगभग 36 किलो न्यूटन का अधिकतम बल उत्पन्न हुआ। इस दबाव ने मोटर केसिंग की संरचनात्मक सीमा को पार कर लिया, जिसके कारण कार्बन फाइबर धागों में परतें अलग होने (डेलैमिनेशन) की स्थिति पैदा हो गई।
हालांकि अधिक दबाव के कारण संरचनात्मक क्षति हुई, फिर भी इस परीक्षण से टीम को महत्वपूर्ण तकनीकी डेटा और उपयोगी इंजीनियरिंग जानकारियां प्राप्त हुई हैं। परीक्षण के दौरान रिकॉर्ड किए गए थ्रस्ट और दबाव से जुड़े आंकड़ों का अब विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि मोटर की संरचना, नोज़ल प्रवाह और संपूर्ण प्रणाली की विश्वसनीयता को और बेहतर बनाया जा सके।
तनमय कानमहाले, संस्थापक, बीएएएस टेक्नोलॉजीज़ ने कहा,"हर परीक्षण हमें नई सीख देता है। यह स्थैतिक अग्नि परीक्षण हमारे इग्निशन सिस्टम को परखने और मोटर डिज़ाइन के अगले संस्करण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने में बेहद उपयोगी साबित हुआ है। निधि कच्छावा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एआईसी–जेकेएलयू ने कहा ,
"बीएएएस टेक्नोलॉजीज़ द्वारा किया गया यह स्थैतिक अग्नि परीक्षण उन्नत प्रोपल्शन तकनीक के विकास में लगातार परीक्षण और सीखने की प्रक्रिया की अहमियत को दर्शाता है। एआईसी–जेकेएलयू को गर्व है कि वह ऐसे स्टार्टअप्स का समर्थन कर रहा है जो भारत में स्वदेशी एयरोस्पेस नवाचार को आगे बढ़ा रहे हैं।
परीक्षण के बाद बीएएएस टेक्नोलॉजीज़ ने प्रारंभिक विफलता विश्लेषण पूरा कर लिया है और डिज़ाइन में सुधार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी अब नोज़ल की संरचना और मोटर के संपूर्ण कॉन्फिगरेशन का दोबारा मूल्यांकन कर रही है, ताकि भविष्य में नोज़ल में अवरोध की संभावना कम हो और दहन कक्ष के दबाव को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सके। सुधारित डिज़ाइन के साथ रॉकेट मोटर का अगला स्थैतिक अग्नि परीक्षण अगले तीन से चार महीनों के भीतर किए जाने की योजना है।
लगातार परीक्षण और डेटा आधारित इंजीनियरिंग सुधारों के माध्यम से बीएएएस टेक्नोलॉजीज़, एआईसी–जेकेएलयू के सहयोग से, स्वदेशी प्रोपल्शन तकनीक को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है और एयरोस्पेस क्षेत्र में सुरक्षित, विश्वसनीय और उच्च प्रदर्शन वाली तकनीक विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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