राजस्थान सांगानेर,बगरू विधानसभा क्षेत्र की 87 कालोनियों के लोग सड़क पर उतरे
० आशा पटेल ०
जयपुर । कथित रूप से अवाप्तशुदा भूमि पर बसी हुई 87 कॉलोनीयो के निवासियों ने सरकार द्वारा पंजीकृत सहकारी समितियो से भूखंड खरीद कर अपने जीवन भर की कमाई व वित्तीय सस्थाओ से कर्ज लेकर अपने आशियाने बनाए हैं । यह कालोनियाॅ अवाप्ति से पूर्व एवं अवाप्ति के दौरान विकसित हो गई थी जो कि 35-40 वर्षों से बसी हुई कालोनिया है और वर्तमान में 80 से 100% पूर्ण विकसित है
सरकार अविलंब व्यापक जनित में उचित निर्णय लेकर निवास रात लगभग दो लाख नागरिकों को राहत प्रदान करें अन्यथा आमजन द्वारा एक बड़ा जन आंदोलन होगा एवं आनेवाले निकाय चुनाव मे सरकार को इसका भारी खामियांजा उठाना पड़ सकता है।
जयपुर । कथित रूप से अवाप्तशुदा भूमि पर बसी हुई 87 कॉलोनीयो के निवासियों ने सरकार द्वारा पंजीकृत सहकारी समितियो से भूखंड खरीद कर अपने जीवन भर की कमाई व वित्तीय सस्थाओ से कर्ज लेकर अपने आशियाने बनाए हैं । यह कालोनियाॅ अवाप्ति से पूर्व एवं अवाप्ति के दौरान विकसित हो गई थी जो कि 35-40 वर्षों से बसी हुई कालोनिया है और वर्तमान में 80 से 100% पूर्ण विकसित है
तत्कालीन सरकारों द्वारा समय-समय पर सर्कुलर जारी किया कर ऐसी योजनाओ का पूरे राजस्थान में नियमन किया गया है उल्लेखनीय है कि 82 योजनाओं मे से 20 -25 योजनाओ का पूर्व में नियमन किया जा चुका है एवं 27 योजनाओं की अनापत्ति प्रमाण पत्र मंडल द्वारा जारी किया जा चुका है। सरकार द्वारा यहां सभी मूलभूत सुविधाएं एवं बिजली पानी सीवरेज सड़क इत्यादि उपलब्ध करा दी गई है
इस संदर्भ मे उच्च न्यायालय का आदेश दिनांक 12-8-2025 आया वह बिना दूसरे पक्ष को सुने एक पक्षीय निर्णय दिया गया जो कि जनहित के विरुद्ध है (पी आई एल का मतलब पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन)
इस संदर्भ में नियमन हेतु संघर्ष समिति आमजन की आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए कई प्रयास कर चुकी है तथा शांतिपूर्ण पैदल मार्च भी इसी कड़ी में एक प्रयास है
सरकार उच्च न्यायालय में व्यापक जनहित मे मौके एवं रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति मजबूती से रखते हुए या सरकार अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए जनहित में जनता को राहत पहुंचाये इस संदर्भ मे निवासरत नागरिकों में बहुत मायूसी एवं आक्रोश व्याप्त है
सरकार अविलंब व्यापक जनित में उचित निर्णय लेकर निवास रात लगभग दो लाख नागरिकों को राहत प्रदान करें अन्यथा आमजन द्वारा एक बड़ा जन आंदोलन होगा एवं आनेवाले निकाय चुनाव मे सरकार को इसका भारी खामियांजा उठाना पड़ सकता है।
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