सांगानेर में सरकार की संवेदनहीनता से 87 कॉलोनियों पर संकट


० आशा पटेल ० 
 जयपुर । राज्य सरकार द्वारा रजिस्टर्ड सहकारी समितियों द्वारा अवाप्ति से पूर्व व अवाप्ति प्रक्रिया के दौरान ही खातेदारों से भूमि क्रय की जाकर सरकार से पंजीकृत विभिन्न सहकारी समितियों द्वारा विभिन्न कॉलोनिया सृजित कर बसा दी गयी एवं सदस्यों द्वारा बैंक व वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऋण लेकर मकान बना लिये गये, जिनमें सरकार द्वारा सभी मूलभूत सुविधाऐं यथा पानी, बिजली, सीवर लाईन, रोड, नालिया, रोड लाईट आदि का विकास करवा दिया गया।

नियमन संघर्ष समिति के अध्यक्ष रघुनंदन सिंह हाडा ने बताया कि वर्तमान में उक्त योजना की 80 से 100 प्रतिशत तक कॉलोनियॉ विकसित है। आवासन मण्डल द्वारा बसी हुई योजनाओं की भूमि की अवाप्ति कर कुछ का मुआवजा कोर्ट में जमा करवा दिया व पेपर पजेशन तो ले लिया गया, परन्तु भौतिक रूप से सन् 1988 से आज तक कब्जा नहीं ले पाया। भौतिक रूप से भूमि के पजेशन नहीं ले पाने व योजनाऐं आवासीय भूखण्डों में निर्मित व विकसित हो जाने के कारण अवाप्ति की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पायी एवं तत्कालीन सरकारों द्वारा समय समय पर पॉलिसी के तहत आदेश जारी कर इनको अवाप्ति से मुक्त किया गया।

 अवाप्ति से पूर्व खाली भूमि का विभाग द्वारा सत्यापन नहीं किया गया एवं राजस्व रिकार्ड अनुसार ही अवाप्ति कर ली गई। सरकार से रजिस्टर्ड समितियों द्वारा किसानों को कीमत अदा कर जमीन क्रय कर ली गई एवं आवासीय कॉलोनी काट दी गई। चूंकि गृह निर्माण सहकारी समितियॉ डवलपमेन्ट हेतु सरकार से रजिस्टर्ड होने एवं अवाप्ति प्रक्रिया की जानकारी का अभाव आमजन को नहीं होने के कारण आमजन ने सोसायटीज से भूखण्ड क्रय कर अपने आवासीय आसियाने बना लियें।

 आमजन के मकान बनाने में कोई व्यवधान नहीं होने के कारण बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं वगैराह ने आवास निर्माण हेतु भूमि खरीदने के लिए ऋण आमजन को उपलब्ध करवा दिया गया। उक्त भूमि आवासन मण्डल द्वारा जनहित में आवासीय मकान बनाकर आमजन को उपलब्ध कराने हेतु अवाप्त की गई थी। लेकिन सरकार से पंजीकृत सहकारी समितियों द्वारा खातेदारों से भूमि खरीद कर सन् 1999 से पूर्व ही आमजन को विभिन्न कॉलोनियों के रूप में आवास बसा दिये गये ।

संघर्ष समिति के महामंत्री परशुराम चौधरी ने बताया की सभी स्थितियों को देखते हुए एवं आवासीय उपयोग की भूमि में आवासीय कॉलोनियॉ विकसित हो जाने के कारण तत्कालीन सरकारों द्वारा व्यापक जनहित में 21.09.2002 को पॉलिसी बनाई जाकर राजस्थान व जयपुर में भी सैकडों योजनाओं का नियमन किया गया हैं। जैसे लालकोठी योजना, पृथ्वीराज नगर, बजाज नगर, मालवीय नगर में ऐसी सैकडों

 योजनाओं का नियमन किया गया है एवं सांगानेर क्षेत्र की 48 व 19 योजनाओं की वित्तीय प्रमाण पत्र पॉलिसी 21.02.2002 के तहत 19.09.2007 को जारी किया जाकर अवाप्ति से मुक्त किया गया, जिसमें लगभग 25 योजनाओं का नियमन भी किया जा चुका है।

संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष डॉ विष्णु कुमार गुप्ता ने बताया कि ऐसी योजनाओं के नियमन बाबत् तत्कालीन सरकार द्वारा व्यापक जनहित में पूर्व में जारी पॉलिसी को पुनः संशोधित किया जाकर नीति 15.02.2011 को जारी कर नियमन किया गया सरकार द्वारा 01.07.2022 के आदेश के तहत सांगानेर की 81 योजनाओं में से 27 योजनाओं का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है एवं वर्तमान में दो योजनाओं का कृष्णा कॉलोनी एवं मारूती कॉलोनी का नियमन किया जा चुका है।

संघर्ष समिति के सलाहकार अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि उक्त सभी स्थितियों को देखते हुए यहॉ पर 87 योजनाओं में लगभग 15000 हजार मकानों का निर्माण हो गया है एवं मण्डल द्वारा अवाप्ति की धारा 4 व 6 की कार्यवाही की गई, लेकिन अवाप्ति से पूर्व ही योजनाओं में मकानों का निर्माण हो जाने के कारण उक्त भूमि पर कब्जा नहीं लिया जा सका एवं ना ही खातेदारों ने मुआवजा मण्डल से प्राप्त किया| अवाप्ति की कार्यवाही पूर्ण नहीं होने व आवासीय प्रयोजन की भूमि पर आवासीय मकान बन जाने से ऐसी योजनाओं 

की भूमि को अवाप्ति अधिनियम 2013 की धारा 24 (2) एवं केन्द्रीय भूमि अवाप्ति अधिनियम की धारा 48 के तहत स्वतः अवाप्ति से मुक्त करने एवं निकायों के सुसंगत अधिनियमों के तहत अधिसूचित योजनाओं का योजना क्षेत्र से मुक्त करने हेतु चैकलिस्ट में प्रस्ताव तैयार कर नगरीय विकास विभाग, राजस्थान सरकार 13.09.2019, 10.06.2022, 26.12.2022 को प्राप्त कर अवाप्ति से स्वतः मुक्त मानते हुए पुनः आदेश 01.07.2022 के तहत 81 योजनाओं में से 27 योजनाओं की अनापत्ति प्रमाण पत्र मण्डल द्वारा जारी कर दिया गया है।

संघर्ष समिति के विधि सलाहकार सवाई सिंह ने बताया कि वर्तमान में नगरीय विकास विभाग द्वारा जारी आदेश 12.03.2025 को माननीय उच्च न्यायालय ने स्थगित करते हुए बसी हुई योजनाओं की भूमि को मण्डल द्वारा कब्जा दिया जाकर पालना रिपोर्ट माननीय न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है एवं वर्तमान में 18 फरवरी की सुनवाई में माननीय न्यायालय ने पालना रिपोर्ट 3 सप्ताह में प्रस्तुत करने को कहा है । इसके आगे समय नहीं दिया जायेगा, का आदेश दिया गया है।

 न्यायालय में आवासन मण्डल एवं नगरीय विकास विभाग की घोर लापरवाही एवं सरकारी संवेदनहीनता के कारण उक्त योजनाओं की वास्तविक स्थिति माननीय न्यायालय में 9 माह से अब तक नहीं रखी गई, जिससे उक्त योजनाओं को अवैध घोषित करने से आमजन में भय एवं अषांति का वातावरण व्याप्त है।

 व्यापक जनहित में आवासन मण्डल, नगरीय विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा पूर्व में इन योजनाओं के नियमन के लिए किये गये प्रावधान व सैकडों योजनाओं का किया जा चुका नियमन एवं अवाप्ति से स्वतः मुक्त हो चुकी भूमि को रिकार्ड सहित मौके व रिकार्ड की वास्तविक स्थिति व्यापक जनहित में माननीय न्यायालय में प्रस्तुत कर इन योजनाओं का नियमन करवाया जाकर आमजन को राहत प्रदान करवायें 

एवं न्यायाधीष से भी अपील है कि उक्त योजनाओं की रिकार्ड व मौके की वास्तविक स्थिति को संज्ञान में लिया जाकर व्यापक जनहित में राहत प्रदान करवाने की कृपा करवायें। और इन कोलोनी वासियों के बयान भी लिए जाएँ ,तभी आम जन को न्याय मिल सकेगा |

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