भारतीय सेना के जवानों की पत्नियों ने सीखा वित्तीय प्रबंधन.बेटियों के सपने पूरे करने के लिए मां को हमेशा साथ देने का आह्वान

० आशा पटेल ० 
जयपुर : भारतीय सेना के जवानों की पत्नियों के लिए रवि फाउंडेशन और शिव शक्ति कृपा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित किया गया। समारोह में वित्तीय प्रबंधन पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। समारोह की सभी अतिथियों ने इन महिलाओं को घर में और घर के बाहर निकलकर कैसे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकती हैं, इसके गुर सिखाए। कार्यक्रम में नारी शक्ति के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार लता खण्डेलवाल ने कहा कि आधी आबादी चाहे तो क्या नहीं कर सकती है। उन्होंने देश की राष्ट्रपति और उच्च पदों पर आसीन महिलाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि वे चाहें तो घर पर ही अपना छोटा सा काम शुरू कर सकती हैं या फिर बाहर निकल कर अपने कॅरियर को नया आयाम दे सकती ह
 उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि भले ही वे खुद के कुछ सपने पूरे नहीं कर सकी हों, लेकिन अपनी बेटियों के सपने पूरे करने के लिए उनके कंधे से कंधा मिलाकर जरूर साथ खड़ी हों। फिर चाहे कितनी भी विपरित परिस्थितियां आएं, मां का सपोर्ट मिलने से आगे बढ़ती जाएंगी।
रवि फाउंडेशन के अध्यक्ष पुल्कित भारद्वाज ने महिलाओं को सशक्त बनाकर समाज की मुख्य धारा से जुड़ने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि महिलाएं पुरुषों के बराबर ही नहीं बल्कि उनसे कहीं आगे हैं। वैसे तो महिलाएं स्वयं काफी सशक्त हैं लेकिन आज के इस कार्यक्रम से महिलाओं में और जागरूकता आएगी। उन्होंने महिलाओं के प्रति समाज में अच्छी सोच बनाने के लिए महिलाओं की सफलता की कहानियों को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई।
समारोह में वित्तीय प्रबंधन कार्यशाला में सेना के जवानों की पत्नियों को सीए सोनम खंडेलवाल ने कई गुर सिखाए। मंच संचालन करते हुए आभा सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिला शक्तियों को नमन करते हुए उनका स्वागत किया। आज के समय की ये मांग बन चुकी है कि महिलाएं सशक्त होकर आत्मसम्मान के साथ जीएं। अपने पैरों पर खड़ा होना ना सिर्फ भारतीय नारी का अधिकार है बल्कि हर नारी की जिम्मेदारी भी है ताकि अपने परिवार के साथ ही वे राष्ट्र निर्माण में भी अपनी भूमिका के साथ उचित न्याय कर सकें। खुशी सिंह, अध्यक्ष, शिव शक्ति कृपा फाउंडेशन 

हमारे मन की शांति का गहरा संबंध हमारी आर्थिक स्थिति से होता है। वास्तव में, हमारे पर्स का सीधा प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। वित्तीय असंतुलन आज के समय में तनाव का एक प्रमुख कारण बन चुका है। जब खर्च और आय के बीच संतुलन नहीं होता, तो मन में चिंता, असुरक्षा और तनाव बढ़ने लगता है। इसे संतुलित करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है-लिखना। अपने रोजमर्रा के छोटे-छोटे खर्चों का लेखा-जोखा डायरी में दर्ज करना शुरू करें। डॉ. वंदना, मनोविज्ञानिक, वेलनेस काउंसलर, साउथ वेस्ट कमांड

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