अलवर टाइगर मेराथन बाघ बचेगा तो जंगल बचेगा,पर्यटन बढ़ेगा
जयपुर। अलवर टाइगर इंटरनेशनल हॉफ मैराथन के साथ -अलवर से जायेगा पूरी दुनिया को संदेश--बाघ बचेगा, तो जंगल बचेगा, पर्यटन बढ़ेगा | प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देशभर में चल रहे फिट इंडिया मूवमेंट और पर्यावरण संरक्षण की राष्ट्रीय सोच को ज़मीनी स्तर पर मजबूती देने के उद्देश्य से अलवर टाइगर इंटरनेशनल हॉफ मैराथन ( एटीएम-2026 ) के दूसरे संस्करण का आयोजन 8 फरवरी को अलवर में किया जाएगा
अलवर टाइगर इंटरनेशनल हॉफ मैराथन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में विदेशी धावकों की भूमिका अहम रहेगी। इस मैराथन में केन्या, दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को, बहरीन, तंज़ानिया और इथियोपिया सहित विभिन्न देशों से 42 अंतरराष्ट्रीय धावक भाग लेंगे। उनके साथ देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले हजारों धावक अलवर की सड़कों पर दौड़ते हुए बाघ संरक्षण और वन सुरक्षा का संदेश वैश्विक स्तर तक पहुंचाएंगे।
मैराथन के आयोजन में प्लास्टिक-फ्री व्यवस्था, जिम्मेदार कचरा प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल संचालन पर विशेष जोर दिया जाएगा। आयोजन को सफल बनाने में राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन अलवर, वन एवं वन्यजीव विभाग, पर्यटन विभाग, खेल विभाग, स्थानीय निकाय, पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियां, स्वास्थ्य एवं आपातकालीन सेवाएं, सिविल सोसाइटी संगठन, एनजीओ, स्थानीय समुदाय और स्वयंसेवकों की सक्रिय सहभागिता रहेगी।
अरावली की पहाड़ियों और सरिस्का टाइगर रिज़र्व के प्रवेश द्वार पर होने वाला यह आयोजन मैराथन को बाघ संरक्षण, वन सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और जिम्मेदारीपूर्ण पर्यटन से जुड़ा एक व्यापक जन-आंदोलन के स्वरूप के प्रदर्शित करेगा। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मैराथन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न को आगे बढ़ाती है, जिसमें स्वस्थ नागरिक, सुरक्षित पर्यावरण और सतत विकास को एक-दूसरे के पूरक माने गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य व्यक्तिगत फिटनेस को सामूहिक पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ते हुए नागरिकों में सकारात्मक विचारों को उत्पन्न करना है। हॉफ मैराथन का मूल फोकस बाघ एवं वन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर होगा जिसके तहत यह संदेश दिया जाएगा की बाघ वन्यजीव संरक्षण का शीर्ष संकेत है और बाघ की सुरक्षा का सीधा अर्थ जंगलों, जल स्रोतों और जैव विविधता की रक्षा से है।
मैराथन के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय व पर्यटन के प्रति जिम्मेदारियों के लिए जागरूक किया जाएगा।
अलवर को इको और वाइल्ड लाइफ टूरिज्म हब बनाने की दिशा में पहलः उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के अनुसार यह आयोजन अलवर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इको-टूरिज्म, वाइल्डलाइफ टूरिज्म और स्पोर्ट्स टूरिज्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
अलवर को इको और वाइल्ड लाइफ टूरिज्म हब बनाने की दिशा में पहलः उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के अनुसार यह आयोजन अलवर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इको-टूरिज्म, वाइल्डलाइफ टूरिज्म और स्पोर्ट्स टूरिज्म के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
सरिस्का टाइगर रिज़र्व, अरावली की प्राकृतिक विरासत और अलवर की सांस्कृतिक पहचान को इस मैराथन के माध्यम से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। इससे स्थानीय पर्यटन, होटल उद्योग, गाइड सेवाओं और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय आजीविका को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस मैराथन में 21 किलोमीटर हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर रन, 5 किलोमीटर शक्ति रन और 2 किलोमीटर पैरा रन शामिल हैं। जिसमें युवा, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगजन सभी समान रूप से सहभागी बनेंगे।
अलवर टाइगर इंटरनेशनल हॉफ मैराथन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में विदेशी धावकों की भूमिका अहम रहेगी। इस मैराथन में केन्या, दक्षिण अफ्रीका, मोरक्को, बहरीन, तंज़ानिया और इथियोपिया सहित विभिन्न देशों से 42 अंतरराष्ट्रीय धावक भाग लेंगे। उनके साथ देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले हजारों धावक अलवर की सड़कों पर दौड़ते हुए बाघ संरक्षण और वन सुरक्षा का संदेश वैश्विक स्तर तक पहुंचाएंगे।
मैराथन के आयोजन में प्लास्टिक-फ्री व्यवस्था, जिम्मेदार कचरा प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल संचालन पर विशेष जोर दिया जाएगा। आयोजन को सफल बनाने में राजस्थान सरकार, जिला प्रशासन अलवर, वन एवं वन्यजीव विभाग, पर्यटन विभाग, खेल विभाग, स्थानीय निकाय, पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियां, स्वास्थ्य एवं आपातकालीन सेवाएं, सिविल सोसाइटी संगठन, एनजीओ, स्थानीय समुदाय और स्वयंसेवकों की सक्रिय सहभागिता रहेगी।
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