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तिलोक कोठारी की पंजाबी फिल्म "मजनू" का फर्स्ट लुक रिलीज
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० संवाददाता द्वारा ० मुंबई - शालीमार प्रोडक्शन्स की पंजाबी फिल्म "मजनू" का फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज कर दिया गया है । बेहद रोमांटिक तरीके से खेतों के बीच मचान पर प्रेमी और प्रेमिका की जोड़ी का जो रोमांटिक लुक इस पोस्टर के लिए लिया गया है वो अपनेआप में बहुत ही प्यारा फील दे रहा है । सरसो के फूल और ख़ुशगवार वातावरण के बीच प्यार की तरंगों को अपनेआप में समेटे प्रेमी जोड़े की इस अनोखी छवि से पंजाबी फिल्म जगत में इस फ़िल्म को लेकर चर्चाओं का बाज़ार भी गर्म हो गया है । फ़िल्म "मजनू" अगले साल 2024 में 22 मार्च को रिलीज करने के लिए शेड्यूल की गई है। इस त्रिकोणीय रोमांटिक फिल्म में गुरमीत सिंह ने अपने मधुर संगीत से जो समा बांधा है । उनकी बेहतरीन धुनों व हशमत सुल्ताना, कमाल खान, मन्नत नूर, सिमरन भारद्वाज और शाहिद माल्या द्वारा गाए गए सभी गाने इतने खूबसूरत बन पड़े हैं कि ये आगे चलकर लोगों की जुबां पर स्वतः ही चढ़ जाएंगे । बॉलीवुड फिल्मों के लिए प्रसिद्ध तिलोक कोठारी द्वारा निर्मित व सुजाद इकबाल खान द्वारा निर्देशित ,किरण शेरगिल द्वारा कृत फिल्म "मजनू" में प्रीत बाठ , किरण ...
रिनि चंद्रा की राजस्थानी हिपहॉप रैप सॉन्ग झोपड़ी हुआ वायरल
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० संवाददाता द्वारा ० राजस्थानी की बात की जाए तो वहाँ की डिशेज और राजस्थानी पहनावा दुनियाभर में अपनी अलग पहचान लिए हुए है । इसी तरह से यदि आप राजस्थानी गानों की बात करें तो उनमें मारवाड़ी ठाट बाट की बातें और परिधानों की प्रधानता लाज़मी है । गयिका रिनि चंद्रा की रिलीज़ हुई राजस्थानी हिपहॉप रैप सॉन्ग झोपड़ी इस थीम एक नए स्वैग और एनर्जी के साथ नज़र आता है । इस हिप हॉप रैप गाने में मदहोशी और ट्रांसफॉर्मिंग एनर्जी लेबल है जिसको आप इस गाने के साथ फील कर सकते हैं । ऐसे गाने राजस्थानी में आमतौर पर नहीं बनते लेकिन उसी परिपाटी को तोड़ते हुए और एक जबरदस्त परफॉर्मेंस के साथ इस झोपड़ी ने इंटरनेट पर सनसनी क्रिएट कर दिया है । यह हिपहॉप रैप झोपड़ी रीलीजिंग के साथ ही वायरल होने की राह पर अग्रसर है । बड़ी संख्या में लोगों को यह रैप सांग पसन्द आ रहा है । व्यूवरशिप की इस स्पीड को देखते हुए यही लगता है कि यह रैप सॉन्ग जल्द ही मिलियन का आंकड़ा छू लेगा । लोगों की जुबां पर यह गाना चढ़ने लगा है । रिलीज हुई इस झोपड़ी के बोल लिखे हैं पीके निम्बार्क ने। इस गाने को गाया है रिनि च...
पहले इतिहास तो जान लो तब कहना कि गुलामी का कानून था या मानवता का
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० डॉ. उदित राज, पूर्व सांसद ० अंग्रेजों के द्वारा स्थापित न्याय व्यवस्था के पहले का इतिहास तो जान लो तब कहना कि गुलामी का कानून था या मानवता का। दलित हत्या करने पर एक विशेष जाति को सजा नही दी जाती थी। युद्ध में पति के शहीद होने पर पत्नी को जिंदा जला दिया जाता था । भारत के ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने बंगाल सती विनियमन, 1829 को अधिनियमित किया, जिसमें जिंदा जलाने या दफनाने की प्रथा की घोषणा की गई। शूद्र तालाब का पानी भी नहीं पी सकते थे । पीने के कुएं अलग थे। शूद्र खाट पर बैठ नही सकते थे और बंधुवा मजदूरी आम थी। दलित और पिछड़े गांव के दक्षिण तरफ़ बसाए जाते थे ताकि हवा चलने पर सवर्ण अशुद्ध न हो जाएं। शूद्र की नई नवेली स्त्री को सवर्ण के साथ सोना पङता था ताकि उसका अनुष्ठान हो सके ।तीन नए क्रिमिनल लॉ बिल भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 लोकसभा और राज्य सभा से पास हुए हैं।भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023 भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 का स्थान लेगी, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्ष...
समस्याओं के साथ समाधान भी सुझाए मीडिया : प्रो. डॉ. गोविंद सिंह
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० योगेश भट्ट ० इन्दौर । आज की मीडिया समस्याओं की प्रस्तुति प्रधानता से करता है, लेकिन मीडिया को समस्याओं का समाधान तथा समाज को सजग करने की भी बात करनी होगी। मीडिया यदि खबरों की रिपोर्टिंग तत्व सार के साथ करे तो यह आने वाली पीढियों के लिए मार्गदर्शक ऐतिहासिक दस्तावेज बन जायेगा । ये विचार प्रो. डॉ. गोविंद सिंह (डीन, अकादमिक भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली ) ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मीडिया प्रभाग के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं इन्दौर जोन के पूर्व संस्थापक ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश 'भाईजी' की 8 वीं पुण्यतिथि पर ज्ञान शिखर, ओमशान्ति भवन में 'समाधान परक पत्रकारिता' विषय पर आयोजित मीडिया परिसंवाद में कही। उन्होंने कहा कि, पाश्चात्य पत्रकारिता घटनाओं को ज्यों का त्यों वर्णन करती है जबकि भारतीय पत्रकारिता घटनाओं में से तत्वसार के साथ में रिपोर्टिंग करती है जो कि अगली पीढ़ी के लिए इतिहास का अंग बन जाती है । एक शोध के अनुसार खबरों के प्रस्तुतिकरण के ढ़ंग से युवा वर्ग को समाचारों में सत्यता कम दिखने से प्रिंट मीडिया के बजाय सोशल मीडिया में ज्यादा विश्वास ह...
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दलित लेखन का मूल्यांकन और बदलाव की स्थिति पर सम्मेलन
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० समय सिंह जोल ० ग्रेटर नोएडा : अखिल भारतीय साहित्य समिति के तत्वावधान में अखिल भारतीय दलित लेखक सम्मेलन ' आयोजित किया गया। जिसका विषय था ' वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दलित लेखन का मूल्यांकन और बदलाव की स्थिति: एक विमर्श ' YMCA हाल ग्रेटर नोएडा,गौतम बुद्ध नगर (उ.प्र.) में हुआ। जिसमें विभिन्न राज्यों से पधारे साहित्यकारों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्घाटन हावड़ा विश्वविद्यालय ( कोलकाता) के उपकुलपति डॉ.विजय कुमार भारती ने किया । सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि, कथाकार एवं समालोचक तथा पूर्व सदस्य हिंदी अकादमी ( दिल्ली ) सरकार डॉ.कुसुम वियोगी ने की। सम्मेलन का सफल संचालन प्रोफेसर डॉ.टेक चंद ( दिल्ली विश्वविद्यालय ) ने किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ.राम प्रताप नीरज आलोचक/साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य बिहार विश्वविद्यालय थे। सम्मेलन तीन सत्रों में चला मुख्य अतिथियों व वक्ताओं में दलित साहित्य प्रवक्ता डॉ.जय प्रकाश कर्दम,कवि/आलोचक समीक्षक प्रो.डॉ.एन.सि़ह, प्रख्यात दलित साहित्य अध्येता एवं आलोचक प्रो.डॉ.बजरंग बिहारी तिवारी,मदन कश्यप, पत्रकार राकेश रेणू, डॉ.भाषा सिंह, कथा...
गौमाता को राष्ट्रमाता की प्रतिष्ठा दिलाने हेतु देशभर में आंदोलन { Qutub ...
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पांच रचनाकारों को प्रदान किया गया डाॅ. तिवारी स्मृति सम्मान
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० योगेश भट्ट ० इंदौर। लोकमंगल का वाहक बनकर उभरा है साहित्य। आज का समय विचारों की घर वापसी का समय है। विचारों की यह घर वापसी भारतीयता की ओर वापसी है। हम पश्चिम के नहीं अपने विचारों को अपनाकर आगे बढ़ सकते हैं। बहुभाषीय होना हम भारतीयों की ताकत है। यह बात प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने कही। वरिष्ठ शिक्षक और लेखक डाॅ. एस. एन. तिवारी स्मृति साहित्य सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। समारोह में पांच रचनाकारों को सम्मानित किया गया। इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित समारोह की अध्यक्षता साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश के निदेशक डाॅ. विकास दवे ने कहा कि वर्तमान युग साहित्य और पत्रकारिता के समन्वय का स्वर्णिम युग है। ऐसे साहित्यिक आयोजनों से भाषा और साहित्य की पुरानी गरिमा लौटाने में मदद मिलती है। विशेष अतिथि इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविन्द तिवारी ने इंदौर में बढ़ती साहित्यिक गतिविधियों पर प्रसन्नता जाहिर की। स्वागत भाषण सुषमा दुबे ने और संस्था व अतिथि परिचय मुकेश तिवारी ने दिया। अतिथियों का स्वागत दिनेश शुक्ला, डाॅ.सोनाली सिंह और डाॅ. दीपा व्यास ने किया। संचालन प्रथमेश व्य...
4 जनवरी को वृंदावन में सभी प्रदेशों के गौ भक्तों की गो सभा आयोजित होगी
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० योगेश भट्ट ० जयपुर । देश में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिये चारो पीठों के पूज्य जगदगुरू शंकराचार्य व देश के प्रतिष्ठित पूज्य संत महापुरुषों द्वारा स्वतः स्फूर्त गौमाता राष्ट्रमाता प्रतिष्ठा आंदोलन के तत्वाधान में गौ संसद के अंतर्गत काशी (वाराणसी) से भारत के सभी प्रदेशों के लिए गौ दूतों की नियुक्ति की गई है। ज्योतिषाचार्य अंकित रावल ने बताया कि आजादी के 75 वर्ष बीत जाने के पश्चात आजादी की सूत्रधार, अमृत की प्रदाता, हमारी आस्था और श्रद्धा का केंद्र, सात्विक ऊर्जा का स्रोत, राष्ट्र की संख्या समृद्धि का मूल आधार, सुव्यवस्थित उत्तम विकास व अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड, राष्ट्र धर्म व संस्कृति के अविरल विकास की जननी गौ की हत्या का कलंक ऋषि मुनियों की इस पवित्र तपोभूमि भारत से समाप्त कराकर राष्ट्रमाता का सर्वोच्च सम्मान प्रदान करवाने हेतु हमारे राज्य के सभी संसदीय क्षेत्रों से गौ-राष्ट्रभक्त, कर्तव्यनिष्ठा संतो की नियुक्ति करके विक्रम संवत 2080 माघ कृष्ण पक्ष एकादशी, दिन मंगलवार तदनुसार दिनांक 6 फरवरी, 2024 को श्री शंकराचार्य शिविर, माघ मेला क्षेत्र, प्रयागराज तीर्थ में होने जा ...
दिल्ली में जुटे दुनिया भर के बिहारी उद्यमी : 2047 तक राज्य के विकास का लिया संकल्प
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० आनंद चौधरी ० नई दिल्ली। 'लेट्स इंस्पायर बिहार' अभियान के तहत बिहार के आइपीएस विकास वैभव के नेतृत्व में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2047 तक एक विकसित बिहार की स्थापना करना है। लेट्स इंस्पायर बिहार के बैनर तले जुटे उद्यमियों ने बिहार में पूंजी निवेश कर अपने राज्य को 2047 तक विकसित बनाने का संकल्प लिया है। बिहार विजन कॉन्क्लेव 2047 में जुटे हजारों बिहारवासियों को संबोधित करते हुए विकास वैभव ने कहा कि कार्यक्रम में बिहार के तमाम ऐसे बुद्धिजीवी तथा उद्यमी व्यक्ति सम्मिलित हुए हैं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में महारथ हासिल कर रखा है। आज सभी को ये संकल्प लेना होगा कि 2047 तक बिहार विकसित राज्य बन जाये। इसके लिए जाति, संप्रदाय, लिंग भेद परे उठकर सभी को शिक्षा, समता और उद्यमिता के विकास के लिए योगदान करना होगा। बिहार में 30 वर्ष से कम आयु के करीब 9 करोड़ युवा हैं जिन्हें अगले 2 दशकों में बिहार में ही बेहतर शिक्षा तथा उचित रोजगार की जरूरत होगी, इसके लिए उद्यमिता की क्रांति आवश्यक है। बिहार के हर जिले में अगले 5 वर्षों में युवाओं द्वारा ...