उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिसेफ व शिक्षण संस्थानों के सहयोग से प्रारंभ किया युवा सेतु

० आशा पटेल ० 
जयपुर । राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिसेफ तथा आईआईएम उदयपुर और आईआईटी के सहयोग से ‘युवा सेतु’ का शुभारंभ किया। यह एक अभिनव “कैम्पस टू कम्युनिटी” पहल है, जिसका उद्देश्य महाविद्यालयी छात्रों को जमीनी विकास प्रक्रियाओं से जोड़ना तथा स्थानीय शासन को सशक्त बनाना है। राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने युवा सेतु कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसमें कार्यक्रम पुस्तिका और लोगो का विमोचन भी शामिल रहा।
बैरवा ने कहा कि युवा सेतु केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 और विकसित राजस्थान 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप एक पहल है, जो युवाओं को विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने कहा, “राजस्थान की बड़ी युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्हें सही शिक्षा, कौशल और दिशा से सशक्त बनाना राज्य के विकास को गति देने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

 युवा सेतु के माध्यम से छात्र स्थानीय विकास योजना और क्रियान्वयन में सीधे योगदान दे सकेंगे, साथ ही नेतृत्व और समस्या-समाधान जैसी क्षमताओं का विकास होगा तथा शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम होगी। इस लॉन्च-सह-ओरिएंटेशन कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, आईआईटी, आईआईएम और राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद् तथा विकास साझेदार शामिल हुए। सभी ने ग्रामीण परिवर्तन में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, कुलदीप रांका ने कहा कि यह पहल “ज्ञान सृजन से राष्ट्र निर्माण” की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है, जिसमें महाविद्यालयों को स्थानीय विकास के सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित किया गया है। उन्होंने जोर दिया कि पंचायती राज संस्थाओं के साथ संरचित सहभागिता से उच्च शिक्षा अधिक परिणामोन्मुखी, क्षेत्र से जुड़ी और प्रभाव-आधारित बनेगी।

यूनिसेफ ने कार्यक्रम की संरचना के सह-निर्माण, शिक्षण मॉड्यूल के विकास तथा गुणवत्ता और विस्तार सुनिश्चित करने में अपनी तकनीकी भागीदारी को दोहराया, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और वंचित समूहों के समावेशन पर ध्यान दिया गया है।

 के. एल. राव, यूनिसेफ राजस्थान ने कहा, “यूनिसेफ की रणनीतिक योजना 2026–29 जीवन-चक्र के विभिन्न चरणों में निरंतरता पर आधारित है, जो विकसित राजस्थान 2047 और विकसित भारत 2047 की दृष्टि के अनुरूप है। युवा सेतु एक ‘विन-विन’ मॉडल है यह पंचायतों को डेटा-आधारित योजना और युवा सहभागिता से मजबूत करता है, वहीं छात्रों को वास्तविक अनुभव, नेतृत्व कौशल और बेहतर रोजगार अवसर प्रदान करता है।

आयुक्त, कॉलेज शिक्षा, ओ. पी. बैरवा तथा महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि यह पहल भविष्य के लिए तैयार युवाओं की एक सशक्त टीम तैयार करने और स्थानीय शासन प्रणालियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम की शुरुआत ‘उन्नत भारत अभियान’ के अंतर्गत रखी गई नींव पर एक पैनल चर्चा से हुई, जिसमें सामुदायिक सहभागिता और साक्ष्य-आधारित ग्रामीण विकास में उच्च शिक्षा संस्थानों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला गया। 

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