महाराष्ट्र : साठ साल से अधिक आयु के कैदियों को आंतरिम ज़मानत या आपातकाल पैरोल दिए जाने मांग

लख़नऊ - देश के विभिन्न संगठनों ने कोविद 19 के बढ़ते संक्रमण के मद्देनज़र महाराष्ट्र की जेलों और कथित क्वरंटीन सेंटरों की दुर्दशा पर महराष्ट्र सरकार पत्र लिखा है। पत्र में वरिष्ठ मानवाधिकारवादी गौतम नवलखा द्वारा उनकी पत्नी को बताई गई बातों का हवाला देते हुए कहा गया है कि महराष्ट्र की तालोजा, धुले और यरावदा जेलों में 4 संक्रमित कैदियों की मौत हो चुकी है, जेलों में क्षमता से काफी अधिक बंदी कैद हैं। जिससे बंदियों में संक्रमण फैलने का जोखिम बहुत बढ़ जाता है।



पत्र में जनपद रायगढ़ के नामदार कृष्ण गोखले हाई स्कूल स्थित क्वरंटीन सेंटर का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि वहां 350 कैदियों को छः कक्षाओं में भर दिया गया है। सुविधा के नाम पर केवल तीन शौचालय, सात मूत्रालय और एक स्नान गृह जहां बाल्टी और मग तक नहीं है। लोग राहदारी और बरामदे तक में सोने को मजबूर हैं।


पत्र में वरिष्ठ नागरिकों और विभिन्न रोगों से ग्रस्त कैदियों के जीवन के खतरों को रेखांकित करते हुए महाराष्ट्र सरकार से मांग की गई है कि किसी भी अपराध में आरोपित साठ साल से अधिक आयु के कैदियों को आंतरिम ज़मानत या आपातकाल पैरोल दिया जाए। क्वरंटीन सेंटरों में विश्व स्वास्थ संगठन के क्वरंटीन मानकों को लागू किया जाए और कैदियों के परिजन से नियमित सम्पर्क की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


 


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