स्वर्ण जयंती पर ‘उत्कर्ष’ अनुशासन, शिष्टाचार और उत्कृष्टता का संगम
० आशा पटेल ०
जयपुर। बनीपार्क स्थित होटल प्रबंधन संस्थान, जयपुर में स्वर्ण जयंती वार्षिकोत्सव ‘उत्कर्ष: उत्कृष्टता के 50 वर्ष’ बुधवार को सधे हुए प्रोटोकॉल, सांस्कृतिक गरिमा और पेशेवर अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। दोपहर बाद आरंभ हुए इस आयोजन ने संस्थान की पचास वर्षों की उपलब्धियों, विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा और आतिथ्य शिक्षा में स्थापित उच्च मानकों को एक मंच पर सजीव कर दिया।
इस अवसर पर स्वर्ण जयंती स्मारिका ‘मेराकी ’ का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। मेराकी, यूनानी मूल का शब्द, जिसका अर्थ है आत्मा, सृजनशीलता और प्रेम के साथ किया गया कार्य। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न भेंट किया गया, आभार ज्ञापन हुआ और हाई-टी के साथ संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसमें अतिथियों और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय चर्चा देखने को मिली।
‘उत्कर्ष’ केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि उस विरासत का उत्सव बनकर सामने आया, जिसने आधी सदी से सेवा, शिष्टाचार, अनुशासन और पेशेवर दक्षता के संस्कार विद्यार्थियों में रोपे हैं। यह आयोजन इसी परंपरा को नई ऊर्जा, नए संकल्प और भविष्य के स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने का सशक्त संदेश दे गया।
जयपुर। बनीपार्क स्थित होटल प्रबंधन संस्थान, जयपुर में स्वर्ण जयंती वार्षिकोत्सव ‘उत्कर्ष: उत्कृष्टता के 50 वर्ष’ बुधवार को सधे हुए प्रोटोकॉल, सांस्कृतिक गरिमा और पेशेवर अनुशासन के साथ संपन्न हुआ। दोपहर बाद आरंभ हुए इस आयोजन ने संस्थान की पचास वर्षों की उपलब्धियों, विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा और आतिथ्य शिक्षा में स्थापित उच्च मानकों को एक मंच पर सजीव कर दिया।
समारोह में होटल उद्योग, पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधि, पूर्व छात्र, शिक्षाविद और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रूकमणी रियाड़, आयुक्त, राजस्थान पर्यटन विभाग रहीं। संस्थान द्वार पर प्रोटोकॉल टीम ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया। मुख्य अतिथि रूकमणी रियाड़ ने कहा कि आतिथ्य उद्योग की रीढ़ प्रशिक्षित, संवेदनशील और पेशेवर मानव संसाधन है,
और ऐसे संस्थान इस आवश्यकता को निरंतर पूरा कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योग की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप कौशल उन्नयन और व्यवहारिक दक्षता बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने संस्थान की अनुशासन, शिष्टाचार और सेवा-भाव पर आधारित परंपरा की सराहना भी की।
संस्थान की प्राचार्या निमिषा सेठ ने ‘स्टेट ऑफ द इंस्टीट्यूट’ प्रस्तुति में संस्थान की 50 वर्ष की यात्रा पर विशेष प्रस्तुति के दौरान प्रशिक्षण परंपरा, उद्योग से सुदृढ़ जुड़ाव, शैक्षणिक नवाचार, अनुशासनात्मक संस्कार और विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए “फ्यूचर ऑफ ब्रिलियंस” रोडमैप साझा किया। प्रस्तुति में बताया गया कि व्यवहारिक प्रशिक्षण, समय-पालन और सेवा-भाव की संस्कृति ने इस संस्थान को आतिथ्य शिक्षा में विशिष्ट पहचान दिलाई है।
विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘रिबन डांस’ ने आतिथ्य पेशे में अनुकूलन और प्रवाह के भाव को अभिव्यक्त किया, जबकि ‘योगा डेमोंस्ट्रेशन’ ने पेशेवर जीवन में संतुलन और सजगता का संदेश दिया। क्लब सरगम की ‘द रिद्म ऑफ प्राइड’ प्रस्तुति ने ऊर्जा और टीमवर्क की झलक दिखाई। पुरस्कार समारोह के तीन चरणों में प्रथम से चतुर्थ वर्ष तक के शैक्षणिक अव्वल विद्यार्थियों, सह-पाठ्यक्रम उपलब्धियों और समग्र प्रदर्शन के लिए सम्मान प्रदान किए गए। ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के स्वर्ण जयंती प्रतिष्ठा पुरस्कार की घोषणा समारोह का विशेष आकर्षण रही।
संस्थान की प्राचार्या निमिषा सेठ ने ‘स्टेट ऑफ द इंस्टीट्यूट’ प्रस्तुति में संस्थान की 50 वर्ष की यात्रा पर विशेष प्रस्तुति के दौरान प्रशिक्षण परंपरा, उद्योग से सुदृढ़ जुड़ाव, शैक्षणिक नवाचार, अनुशासनात्मक संस्कार और विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए “फ्यूचर ऑफ ब्रिलियंस” रोडमैप साझा किया। प्रस्तुति में बताया गया कि व्यवहारिक प्रशिक्षण, समय-पालन और सेवा-भाव की संस्कृति ने इस संस्थान को आतिथ्य शिक्षा में विशिष्ट पहचान दिलाई है।
विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘रिबन डांस’ ने आतिथ्य पेशे में अनुकूलन और प्रवाह के भाव को अभिव्यक्त किया, जबकि ‘योगा डेमोंस्ट्रेशन’ ने पेशेवर जीवन में संतुलन और सजगता का संदेश दिया। क्लब सरगम की ‘द रिद्म ऑफ प्राइड’ प्रस्तुति ने ऊर्जा और टीमवर्क की झलक दिखाई। पुरस्कार समारोह के तीन चरणों में प्रथम से चतुर्थ वर्ष तक के शैक्षणिक अव्वल विद्यार्थियों, सह-पाठ्यक्रम उपलब्धियों और समग्र प्रदर्शन के लिए सम्मान प्रदान किए गए। ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के स्वर्ण जयंती प्रतिष्ठा पुरस्कार की घोषणा समारोह का विशेष आकर्षण रही।
इस अवसर पर स्वर्ण जयंती स्मारिका ‘मेराकी ’ का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। मेराकी, यूनानी मूल का शब्द, जिसका अर्थ है आत्मा, सृजनशीलता और प्रेम के साथ किया गया कार्य। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न भेंट किया गया, आभार ज्ञापन हुआ और हाई-टी के साथ संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसमें अतिथियों और विद्यार्थियों के बीच आत्मीय चर्चा देखने को मिली।
‘उत्कर्ष’ केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि उस विरासत का उत्सव बनकर सामने आया, जिसने आधी सदी से सेवा, शिष्टाचार, अनुशासन और पेशेवर दक्षता के संस्कार विद्यार्थियों में रोपे हैं। यह आयोजन इसी परंपरा को नई ऊर्जा, नए संकल्प और भविष्य के स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने का सशक्त संदेश दे गया।
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