संविधान एवं संवैधानिक संस्थाओं की साजिश से सावधान रहने एवं जन-जागृति पैदा करने की आवश्यकता पर जोर

० संवाददाता द्वारा ० 
जयपुर - दुर्गापुरा स्थित गोकुल भाई भट्ट समाधि स्थल पर निर्मित सभागार में जयपुर के जागरूक नागरिकों ने देश में बढ़ते पूंजीवाद, फासीवाद, साम्प्रदायिक एवं नफरत के वातावरण से निपटने के लिए मंथन किया । मंथन में लोकतंत्र, संविधान एवं संवैधानिक संस्थाओं की हत्या की साजिश से सावधान रहने एवं जन-जागृति पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया ।मंथन के दौरान राज.जाट महासभा के राजाराम मील, किसान नेता रामपाल जाट, समग्र सेवा संघ के सवाई सिंह , राजस्थान नागरिक मंच के राजेन्द्र कुम्भज, जन-सम्प्रभुता संघ के अनिल यादव, पत्रकार प्रेमचन्द योगी, वरूण पुरोहित, तिलक गिरी गोस्वामी, एडवोकेट नन्द किशोर स्वर्णकार, महेश चौमाल, डॉ. दशरथ हिनूनिया, अंजूरानी कराड़िया, एडवोकेट ओमप्रकाश कुरोतिया, 

मौ. मुस्तफा, मौ. एन्थोनी, द्वारिका प्रसाद गुप्ता, राजेश नन्दन, राजपाल सिंह, प्यारेलाल शकुन, हितेन्द्र उपाध्याय, सुन्दर जैन , हाफिज मनसूर, देव नन्दन, शैफाली , शंशांक आर्य, जगदीश , पूरण सिंह मौर्य, महंत रामस्वरूप सहित अनेक जागरूक नागरिकों ने अपने विचार प्रकट किए । किसान नेता रामपाल जाट ने स्वेदशी उत्पादों के प्रोत्साहन एवं किसानों से जुड़े मुददों पर जोर दिया तथा किसानों सरसों सत्याग्रह से जुड़ने का आह्वान किया। रामपाल जाट ने कहा कि हमें छोटी लाईन को मिटाने की नहीं वरन् बड़ी लाईन को खींचने की जरूरत है । 

राजस्थान जाट महासभा के अध्यक्ष राजाराम मील ने देश में बढ़ते फासीवाद एवं संवैधानिक संस्थाओं के भीषण दुरूपयोग करने को लेकर केन्द्र सरकार की खिंचाई की तथा देश में लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने पर जोर दिया । राजस्थान समग्र सेवा संघ के अध्यक्ष सवाई सिंह राठौड़ ने कहा कि जन-जागरण हेतु जागरूकता यात्रा आज समय की मांग है। जन-सम्प्रभुता संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने विश्व व देश की समस्त समस्याओं के लिए पूंजीवादी एवं अप्रत्यक्ष उपनिवेशवादी ताकतों को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि ‘लोकतंत्र ’ इन तानाशाही पंसद ताकतों की राह का सबसे बड़ा रोड़ा है 

क्योंकि मजबूत लोकतंत्र के रहते ये ताकतें कभी भी लूट के अपने मनसूबों में कामयाब नहीं हो सकती है 
अतः देश की जनता को चाहिए कि वो केवल वोटर या सपोर्टर के रूप में नहीं दलमुक्त होकर एक जागरूक नागरिक के रूप में भूमिका निभाने के लिए तैयार हो तथा प्रत्येक जनप्रतिनिधि से लगातार सवाल पूछे तथा उसपर लगाम लगाकर रखे। हाफिज मंसूर ने कहा कि हमें मैं की लड़ाई बंद करके हम के रूप में साझा संघर्ष करना होगा तथा नफ़रत से हर हाल में बचना होगा । 

समाजसेवी राजेन्द्र कुम्भज ने कहा कि देश के संवैधानिक संस्थान फासीवाद की चपेट में हैं, लोकतंत्र एवं संविधान ख़तरे में है अतः देशवासियों को एक देशभक्त नागरिक के तौर पर ना सिर्फ संविधान वरन् अपने मूल अधिकारों की रक्षा के लिए आगे भी आगे आना होगा तथा आगामी 14 अप्रेल को बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के जन्मदिन के अवसर पर संविधान की शपथ लेकर लोकतंत्र का आग़ाज करना होगा ।

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